63 साल बाद भी मूलभूत सुविधाओं को तरस रहा पुराना झोटवाड़ा इंडस्ट्रीज एरिया, उद्यमियों ने उठाई आवाज
जयपुर का पुराना झोटवाड़ा इंडस्ट्रीज एरिया प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में गिना जाता है। यहां सैकड़ों उद्योग संचालित हो रहे हैं और हजारों लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि स्थापना के 63 वर्ष बाद भी यह औद्योगिक क्षेत्र मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। सड़क, ड्रेनेज, स्ट्रीट लाइट और प्रशासनिक समन्वय जैसी समस्याएं आज भी उद्योगपतियों और कर्मचारियों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
उद्यमियों का आरोप है कि क्षेत्र के विकास कार्य विभिन्न विभागों के बीच उलझकर रह गए हैं। रीको, जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) और नगर निगम के बीच जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा नहीं होने के कारण विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उद्योगपति सर्विस चार्ज रीको को देते हैं, यूडी टैक्स नगर निगम वसूलता है, सड़क निर्माण का कार्य जेडीए करता है, जबकि स्ट्रीट लाइटों की जिम्मेदारी किस विभाग की है, यह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है।

व्यापारियों का कहना है कि विभागों के बीच समन्वय की कमी के कारण क्षेत्र का विकास प्रभावित हो रहा है। मानसून सिर पर है, लेकिन ड्रेनेज व्यवस्था का काम अभी तक अधूरा पड़ा है। ऐसे में बारिश के दौरान जलभराव की समस्या गंभीर रूप ले सकती है। उद्योगपतियों को आशंका है कि यदि समय रहते ड्रेनेज कार्य पूरा नहीं हुआ तो उत्पादन और आवागमन दोनों प्रभावित होंगे।
उद्योग क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों और व्यापारियों के अनुसार सबसे बड़ी समस्या खराब सड़कें और अपर्याप्त रोशनी हैं। कई प्रमुख मार्गों पर स्ट्रीट लाइटें लंबे समय से खराब पड़ी हैं। रात के समय क्षेत्र का बड़ा हिस्सा अंधेरे में डूबा रहता है। इससे सुरक्षा संबंधी खतरे बढ़ जाते हैं और रात्रिकालीन शिफ्ट में कार्य करने वाले कर्मचारियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
व्यापारियों का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्र में रात के समय भारी वाहनों की आवाजाही रहती है। अंधेरे और खराब सड़कों के कारण दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। कई बार कर्मचारियों को अंधेरे में पैदल चलकर अपने कार्यस्थल तक पहुंचना पड़ता है, जिससे उनकी सुरक्षा पर भी सवाल खड़े होते हैं।
उद्योगपतियों का आरोप है कि पिछले कई वर्षों से वे संबंधित विभागों के समक्ष समस्याएं उठा रहे हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। क्षेत्र की आधारभूत सुविधाओं में सुधार के लिए कई बार ज्ञापन और पत्राचार किया गया, लेकिन जिम्मेदार विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आते हैं। इसका सीधा असर उद्योगों के संचालन और निवेश के माहौल पर पड़ रहा है।
व्यापारियों का मानना है कि यदि उद्योग क्षेत्र में बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तो यहां निवेश और रोजगार दोनों में वृद्धि हो सकती है। वर्तमान में हजारों लोगों को रोजगार देने वाला यह क्षेत्र अपनी संभावनाओं के अनुरूप विकास नहीं कर पा रहा है।
समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर व्यापारियों ने उद्योग मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ और रीको के प्रबंध निदेशक सुरेश ओला को पत्र भेजा है। पत्र में क्षेत्र की बदहाल स्थिति का उल्लेख करते हुए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है। उद्योगपतियों ने आग्रह किया है कि तीनों विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर विकास कार्यों को गति दी जाए और जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण किया जाए।
उद्योग जगत का कहना है कि यदि समय रहते सड़क, ड्रेनेज और स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो इसका असर न केवल उद्योगों पर बल्कि हजारों कर्मचारियों और क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ेगा। ऐसे में अब सभी की निगाहें सरकार और संबंधित विभागों की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

