पेट्रोल-डीजल फिर महंगा, 9 दिन में तीसरी बार बढ़े दाम
देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बड़ा इजाफा हुआ है। पेट्रोल 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल 91 पैसे प्रति लीटर महंगा हो गया है। खास बात यह है कि पिछले 9 दिनों में यह तीसरी बार है जब ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। लगातार बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इसका सीधा असर रोजमर्रा के खर्च और महंगाई पर पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव और क्रूड ऑयल की कीमतों में आया उछाल है। ईरान, इजराइल और खाड़ी क्षेत्र से जुड़े हालात के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसी वजह से ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी देखने को मिली है, जिसका असर भारत समेत कई देशों में पेट्रोल-डीजल के दामों पर पड़ा है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल महंगा होते ही घरेलू बाजार में भी ईंधन के दाम बढ़ने लगते हैं। तेल कंपनियां वैश्विक कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति को देखते हुए दाम तय करती हैं। पिछले कुछ दिनों में रुपये में कमजोरी और अंतरराष्ट्रीय संकट ने मिलकर तेल कंपनियों पर अतिरिक्त दबाव बनाया है।

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार तीसरी बार बढ़ोतरी ने आम जनता की चिंता बढ़ा दी है। पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ है। तेल कंपनियों का कहना है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी के कारण यह फैसला लिया गया है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होते ही घरेलू बाजार पर असर दिखाई देता है। ईंधन के दाम बढ़ने से ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ेगा, जिसका असर खाने-पीने की चीजों और अन्य जरूरी सामानों की कीमतों पर भी पड़ सकता है। आम लोगों का कहना है कि पहले से बढ़ती महंगाई के बीच यह बढ़ोतरी घरेलू बजट बिगाड़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट का संकट जल्द नहीं थमा तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।
देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी ने आम आदमी की चिंता बढ़ा दी है। पेट्रोल 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल 91 पैसे प्रति लीटर महंगा हो गया है। पिछले 9 दिनों में यह तीसरी बार है जब तेल कंपनियों ने ईंधन के दाम बढ़ाए हैं। लगातार बढ़ती कीमतों का सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ रहा है। खासतौर पर ऐसे समय में जब पहले से ही महंगाई लोगों के घरेलू बजट को प्रभावित कर रही है, ईंधन की कीमतों में यह उछाल बड़ी परेशानी बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव और क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी है। ईरान, इजराइल और खाड़ी क्षेत्र से जुड़े हालात के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। मिडिल ईस्ट दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक क्षेत्रों में से एक माना जाता है। यहां किसी भी प्रकार का सैन्य या राजनीतिक तनाव अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार को तुरंत प्रभावित करता है। हाल के दिनों में मिडिल ईस्ट में बढ़ती अस्थिरता के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में लगातार उछाल देखा गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का असर सीधे भारत जैसे देशों पर पड़ता है, जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करते हैं। भारत अपनी कुल तेल जरूरत का लगभग 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा विदेशों से खरीदता है। ऐसे में वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी होने पर घरेलू बाजार में भी पेट्रोल और डीजल महंगा होना लगभग तय माना जाता है। तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कीमतों, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति और टैक्स ढांचे को देखते हुए रोजाना ईंधन के दाम तय करती हैं। पिछले कुछ समय से डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी भी देखने को मिली है। इससे तेल आयात और महंगा हो गया है। यही कारण है कि पेट्रोल और डीजल के दामों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ईंधन की कीमत बढ़ने का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। इसका व्यापक प्रभाव पूरे बाजार और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ जाती है। ट्रक, बस, मालवाहक वाहन और कृषि उपकरणों में डीजल का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। जब डीजल महंगा होता है तो सामान ढुलाई की लागत भी बढ़ जाती है। इसका असर फल, सब्जियां, दूध, अनाज, दवाइयां और रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं की कीमतों पर दिखाई देने लगता है। 
पेट्रोल की कीमत बढ़ने से निजी वाहन चलाने वाले लोगों का खर्च बढ़ जाता है। रोजाना ऑफिस जाने वाले कर्मचारी, टैक्सी चालक, ऑटो चालक और डिलीवरी से जुड़े लोग सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। कई शहरों में लोग पहले ही ट्रैफिक और महंगे परिवहन खर्च से परेशान हैं। ऐसे में लगातार बढ़ते ईंधन दामों ने आम आदमी की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसका असर साफ दिखाई दे सकता है। किसान खेती में डीजल का उपयोग सिंचाई पंप, ट्रैक्टर और अन्य कृषि उपकरणों में करते हैं। डीजल महंगा होने से खेती की लागत बढ़ेगी, जिसका असर कृषि उत्पादन की कीमतों पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो खाद्य महंगाई भी बढ़ सकती है। विपक्षी दलों ने ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। विपक्ष का कहना है कि सरकार को जनता को राहत देने के लिए टैक्स कम करना चाहिए। उनका आरोप है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव का पूरा बोझ आम जनता पर डाला जा रहा है। वहीं सरकार का कहना है कि वैश्विक परिस्थितियों और तेल बाजार में अस्थिरता के कारण कीमतों पर दबाव बना हुआ है। आर्थिक जानकारों का मानना है कि यदि मिडिल ईस्ट का संकट और गहराता है तो आने वाले दिनों में क्रूड ऑयल की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है। खासकर यदि तेल सप्लाई रूट प्रभावित हुए तो वैश्विक बाजार में बड़ा उछाल आ सकता है। इसका सीधा असर भारत के ईंधन बाजार पर पड़ेगा। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि आने वाले दिनों में महंगाई दर पर इसका असर दिखाई दे सकता है। रिजर्व बैंक और आर्थिक एजेंसियां पहले ही महंगाई को लेकर सतर्क हैं। यदि ईंधन कीमतों में लगातार बढ़ोतरी जारी रही तो परिवहन, खाद्य पदार्थ और उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में तेजी आ सकती है। कई शहरों में लोगों ने सोशल मीडिया और विरोध प्रदर्शनों के जरिए सरकार से राहत की मांग की है। आम जनता का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई के बीच पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ना मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों के लिए बड़ी समस्या बनता जा रहा है। नौकरीपेशा लोगों का मासिक बजट प्रभावित हो रहा है, जबकि छोटे व्यवसायियों और ट्रांसपोर्ट कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। फिलहाल देशभर की नजरें अंतरराष्ट्रीय हालात और तेल कंपनियों के अगले फैसले पर टिकी हैं। यदि मिडिल ईस्ट का तनाव जल्द कम नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इससे आम आदमी की जेब पर बोझ और बढ़ेगा तथा महंगाई का दबाव भी तेज हो सकता है। ऐसे में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती आम जनता को राहत देने और आर्थिक संतुलन बनाए रखने की होगी।


