महंगाई का डबल झटका! पेट्रोल-डीजल संकट से बढ़ेगी रोजमर्रा की चीजों की कीमत?
देश में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और सप्लाई संकट का असर अब आम लोगों की जेब पर और ज्यादा पड़ सकता है। ट्रांसपोर्ट सेक्टर में बढ़ती लागत के चलते सब्जियां, राशन, दवाइयां और रोजमर्रा के इस्तेमाल का सामान महंगा होने की आशंका बढ़ गई है
ऑल इंडिया ट्रांसपोर्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन (AITWA) ने माल ढुलाई के किराए में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। संगठन ने Fuel Adjustment Factor (FAF) लागू किया है, जो 20 मई 2026 से प्रभावी हो चुका है। इसके तहत 15 मई 2026 की डीजल कीमत को आधार मानते हुए आगे हर 1 रुपये प्रति लीटर डीजल बढ़ने पर फ्रेट रेट में 0.65 फीसदी की बढ़ोतरी स्वतः जुड़ जाएगी।
होर्मुज तनाव और महंगे आयात का असर
ट्रांसपोर्टरों के मुताबिक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास बढ़ते वैश्विक तनाव के कारण कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। वहीं रुपये पर दबाव बढ़ने से तेल आयात और महंगा हो गया है। इसका सीधा असर ट्रांसपोर्ट लागत पर पड़ रहा है।
संगठन का कहना है कि ट्रांसपोर्ट लागत में डीजल की हिस्सेदारी करीब 65 फीसदी होती है। इसके अलावा AdBlue (DEF) की कीमतें पिछले दो महीनों में लगभग दोगुनी हो चुकी हैं। टायरों के दाम करीब 5 फीसदी तक बढ़ गए हैं और 1 अप्रैल 2026 से टोल टैक्स में भी वृद्धि हुई है।

ट्रांसपोर्टरों और ड्राइवरों की बढ़ी परेशानी
ड्राइवरों का कहना है कि अगर भाड़ा नहीं बढ़ाया गया तो खर्च निकालना मुश्किल हो जाएगा। उनका कहना है कि बढ़ती लागत का असर आखिरकार ग्राहकों तक पहुंचना तय है।
कई ट्रक ड्राइवरों ने यह भी दावा किया कि कुछ पेट्रोल पंपों पर डीजल की किल्लत शुरू हो गई है। कई जगहों पर एक बार में 100 लीटर से ज्यादा डीजल नहीं दिया जा रहा, जिससे लंबी दूरी तय करने वाले ट्रकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
आम आदमी पर पड़ेगा सीधा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ट्रांसपोर्ट लागत लगातार बढ़ती रही तो खाद्य पदार्थों से लेकर दवाइयों और जरूरी सामान तक हर चीज महंगी हो सकती है। ट्रक देर से पहुंचने और माल ढुलाई महंगी होने से सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ेगा, जिसका सीधा असर बाजार कीमतों पर दिखाई देगा।
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