सांसद हनुमान बेनीवाल ने अपने बयान से एक बार फिर सियासी हलचल बढ़ा दी है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “वोट हमें दो और काम उनसे कराओ”, जिसके बाद स्थानीय राजनीति में चर्चा तेज हो गई है। बेनीवाल ने कलेक्टर साहिबा की ‘वार-फेर’ का जिक्र करते हुए प्रशासनिक व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जनता अपनी समस्याओं को लेकर लगातार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के पास पहुंचती है, लेकिन समाधान को लेकर लोगों में नाराजगी बनी हुई है। बेनीवाल के मुताबिक जैसे ही ट्रेन पहुंचती है, युवा अपनी मांगों और समस्याओं को लेकर मौके पर पहुंच जाते हैं। उनका कहना है कि युवाओं की मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और प्रशासन को समय पर कार्रवाई करनी चाहिए। बेनीवाल के इस बयान को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है। समर्थकों का कहना है कि वे जनता की आवाज उठा रहे हैं, वहीं विरोधी इसे राजनीतिक बयानबाजी बता रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन और संबंधित विभाग इन मुद्दों पर क्या कदम उठाते हैं और युवाओं की मांगों का समाधान कब तक होता है।
नमस्कार
सांसद महोदय ने अपने कार्यकर्ताओं को कुशल राजनीति के महत्वपूर्ण ‘टिप्स’ दिए। बाड़मेर में कलेक्टर साहिबा पर ‘वार-फेर’ कर नोट कलाकार को दिया गया। नौतपा में कोटा के जलसेवक के क्या कहने।
राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में..
1. ‘वोट हमें दो, काम कराओ BJP से’
नागौर वाले सांसदजी धरना किंग हो चुके हैं। जहां कहीं धरना-प्रदर्शन चलता है वहां वे पहुंच जाते हैं और सीधे कूच वाली धमकी दे डालते हैं।
वे जयपुर के दूदू में संतों के आंदोलन का समर्थन करने पहुंचे थे। साथ ही उन्हें यकीन दिला रहे थे कि ‘हनुमान’ आपके साथ है।
इन दिनों ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की बड़ी चर्चा रही। इसका असर लगता है सांसद महोदय पर भी गहराई से हुआ। वे एक कदम आगे बढ़े। उनके दिमाग में ‘दीमक’ वाली बात आई।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से दीमक बन जाने की अपील की। कहा- कांग्रेस वालों को पागल बनाओ और बीजेपी वालों को धोखा दो।
उनके अंदर घुस जाओ। उन्हें खोखला कर दो। उन्हें अंदर ही अंदर खत्म कर दो। बोलो करोगे? कार्यकर्ताओं को यह सुझाव पसंद आया। बोले- करेंगे।
कार्यक्रम में किसी ने ट्रांसफर कराने की बात कह दी। सांसदजी ने उसे भी लपेट लिया।
बोले- बंडल लेकर घूमते हो। ट्रांसफर करा दो, ये करा दो, वो करा दो, ये काम अपना है क्या? काम कराओ बीजेपी वालों से और वोट दो आरएलपी को।
कार्यकर्ताओं को ये सुझाव भी पसंद आया और सभागार तालियों से गूंज उठा।

2. कलेक्टर चिन्मयी गोपाल पर ‘वार-फेर’
पूर्व कलेक्टर साहिबा ने नवो बाड़मेर अभियान चलाया था। बाड़मेर के कारण वे और उनके कारण बाड़मेर सुर्खियों में रहने लगा। कायाकल्प होने लगा।
कलेक्टर साहिबा जो भी करतीं उनके फैन्स सोशल मीडिया पर एक्टिव हो जाते थे। फिर मैडम का तबादला हो गया।
नई कलेक्टर मैडम ने चार्ज संभाला। प्रशासन के अधिकारियों-कर्मचारियों से घिरी रामसर पहुंचीं। वहां मैडम के स्वागत के लिए लोक कलाकारों में बरामदे में वाद्य यंत्रों के साथ बैठाया गया था।
मैडम के आगमन की सुगबुगाहट पाकर कलाकारों ने गायन-वादन शुरू कर दिया। मैडम उन्हें नजरअंदाज करके नहीं निकल सकीं।
वहां रुकीं और लोक कलाकारों का उत्साह बढ़ाने के लिए भेंट देनी चाहिए। मैडम ने सचिवजी को इशारा किया। इस बीच वहां खड़े अन्य लोग उतावले हो गए।
सचिवजी की जेब से नोट निकलने से पहले ही उत्साही सज्जन ने नोट निकाला और कलेक्टर साहिबा के सिर पर दो बार घुमाकर लोक कलाकार को थमा दिया।
तीसरे सज्जन तो जेब टटोलते ही रह गए। वे यह दिखाना चाहते थे कि मैं भी देने के मामले में कहीं पीछे नहीं।
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