पेट्रोल-डीजल हुआ सस्ता! नायरा एनर्जी ने घटाए दाम, क्रूड ऑयल में गिरावट से मिली राहत
देशभर में महंगाई से परेशान आम लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। देश की सबसे बड़ी निजी फ्यूल रिटेलर कंपनियों में शामिल नायरा एनर्जी ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ी कटौती का ऐलान किया है। कंपनी ने पेट्रोल के दाम में 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल के दाम में 3 रुपये प्रति लीटर की कमी कर दी है। इस फैसले के बाद नायरा एनर्जी के पेट्रोल पंपों पर वाहन चालकों को पहले की तुलना में कम कीमत पर ईंधन मिलेगा।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में नई दरें लागू होने के बाद पेट्रोल की कीमत 119.79 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 102.57 रुपये प्रति लीटर हो गई है। लंबे समय बाद ईंधन की कीमतों में इस तरह की राहत मिलने से वाहन मालिकों के चेहरे पर खुशी देखने को मिल रही है। खासकर रोजाना वाहन चलाने वाले लोगों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर को इसका सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है।

जानकारों का कहना है कि यह कटौती अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट का असर है। पिछले कुछ सप्ताह पहले अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई थीं। हालात ऐसे बन गए थे कि ब्रेंट क्रूड ऑयल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने की आशंका जताई जा रही थी और कई बाजारों में कीमतें तेज़ी से ऊपर चली गई थीं।
हालांकि अब दोनों देशों के बीच तनाव कम होने और युद्ध जैसी स्थिति में राहत मिलने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम लगातार नीचे आ रहे हैं। फिलहाल ब्रेंट क्रूड ऑयल करीब 73 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। कच्चे तेल की इस गिरावट का असर धीरे-धीरे भारतीय ईंधन बाजार पर भी दिखाई देने लगा है।
नायरा एनर्जी ने इसी वैश्विक गिरावट का फायदा अपने ग्राहकों तक पहुंचाने का फैसला किया है। कंपनी का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में जब कच्चा तेल सस्ता होता है तो उसका लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचना चाहिए। इसी सोच के तहत पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी की गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह नियंत्रित रहती हैं तो अन्य निजी कंपनियां भी अपने ईंधन के दाम घटा सकती हैं। इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां भी कीमतों की समीक्षा कर सकती हैं। हालांकि सरकारी कंपनियों की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार, टैक्स, फ्रेट और अन्य कई कारकों को ध्यान में रखकर तय की जाती हैं।
ईंधन की कीमतों में कमी का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है। पेट्रोल सस्ता होने से निजी वाहन चलाने वालों का खर्च कम होगा, जबकि डीजल सस्ता होने से ट्रकों, बसों और मालवाहक वाहनों की परिचालन लागत घट सकती है। इससे आने वाले समय में परिवहन लागत कम होने की संभावना बढ़ जाती है, जिसका असर खाद्य पदार्थों, फल-सब्जियों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर भी सकारात्मक रूप से पड़ सकता है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 70 से 75 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में बनी रहती हैं, तो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश को काफी राहत मिलेगी। इससे आयात बिल कम होगा, महंगाई पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी और अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
फिलहाल नायरा एनर्जी की ओर से की गई यह कीमतों में कटौती वाहन चालकों के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या आने वाले दिनों में अन्य तेल कंपनियां भी इसी तरह पेट्रोल और डीजल के दाम कम करती हैं या नहीं। अगर ऐसा होता है तो देशभर के करोड़ों उपभोक्ताओं को महंगाई के दौर में बड़ी राहत मिल सकती है।

