तृणमूल कांग्रेस में बढ़ी हलचल, राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रे ने दिया इस्तीफा, राजनीतिक अटकलें तेज
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सियासत में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बढ़ती हलचल ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रे ने सोमवार को अपने पद और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है। उनके इस फैसले को तृणमूल कांग्रेस के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।
सुखेंदु शेखर रे लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे हैं और पार्टी की ओर से विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर मुखर भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में उनका अचानक इस्तीफा राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके इस्तीफे के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस्तीफा देने से पहले सुखेंदु शेखर रे ने लोकसभा के करीब 20 सांसदों के साथ एक गोपनीय बैठक की थी। इस बैठक की एक तस्वीर भी सामने आई है, जिसमें तृणमूल कांग्रेस के कई सांसद दिखाई दे रहे हैं। तस्वीर में शर्मिला सरकार, प्रसून बनर्जी, कालीपद सोरेन, जगदीश बसुनिया और अरूप चक्रवर्ती समेत कई नेता मौजूद नजर आए। इस तस्वीर के सामने आने के बाद राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं।
हालांकि इस बैठक को लेकर अलग-अलग दावे भी किए जा रहे हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि यह बैठक भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर हुई थी। हालांकि अब तक इस दावे की किसी भी स्तर पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। न तो तृणमूल कांग्रेस और न ही भाजपा की ओर से इस संबंध में कोई औपचारिक बयान जारी किया गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इन रिपोर्ट्स में सच्चाई है तो यह पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। हालांकि फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। लेकिन सुखेंदु शेखर रे का इस्तीफा और उसके बाद सामने आई बैठकों की खबरों ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर संभावित असंतोष को लेकर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
तृणमूल कांग्रेस फिलहाल लोकसभा में 28 सांसदों और राज्यसभा में 13 सांसदों के साथ एक मजबूत विपक्षी दल के रूप में मौजूद है। ऐसे में यदि पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ता है या सांसदों का कोई समूह अलग रुख अपनाता है तो इसका असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है।
इसी बीच हाल के घटनाक्रमों ने बंगाल की राजनीति को और अधिक रोचक बना दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार राज्य में तृणमूल कांग्रेस के कई विधायक पहले ही अलग रुख अपना चुके हैं। बताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा के 80 में से 58 विधायक एक अलग गुट का समर्थन कर रहे हैं। हालांकि इस संबंध में पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन इन खबरों ने राजनीतिक हलकों में चर्चाओं को और तेज कर दिया है।
मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के नेतृत्व में पार्टी पिछले कई वर्षों से बंगाल की राजनीति पर मजबूत पकड़ बनाए हुए है। लेकिन हालिया घटनाक्रमों ने विपक्षी दलों को नए राजनीतिक अवसर तलाशने का मौका दिया है। भाजपा सहित अन्य विपक्षी दल लगातार तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़ रहे असंतोष को मुद्दा बना रहे हैं।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में सुखेंदु शेखर रे के अगले कदम और उनके साथ जुड़े नेताओं की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होगी। यदि पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें सही साबित होती हैं तो पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
फिलहाल सभी की नजरें तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व की प्रतिक्रिया और संभावित राजनीतिक घटनाक्रमों पर टिकी हुई हैं। सुखेंदु शेखर रे के इस्तीफे ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।

