US की रिपोर्ट में भारत समेत 54 अर्थव्यवस्थाएं शामिल, जबरन मजदूरी से बने सामानों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की तैयारी
वॉशिंगटन/नई दिल्ली। US ने भारत सहित दुनिया की 54 अर्थव्यवस्थाओं को ऐसी सूची में शामिल किया है, जिनके बारे में उसका मानना है कि वे जबरन मजदूरी (फोर्स्ड लेबर) से तैयार किए गए उत्पादों के आयात और व्यापार को रोकने में पर्याप्त रूप से सफल नहीं रही हैं। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) द्वारा जारी एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि इन देशों में श्रम अधिकारों की रक्षा और जबरन मजदूरी पर रोक लगाने के लिए प्रभावी कानूनी एवं प्रशासनिक उपायों की कमी है। इस आधार पर अमेरिका अतिरिक्त कस्टम ड्यूटी और व्यापारिक प्रतिबंधों जैसे कदमों पर विचार कर रहा है।
यह रिपोर्ट अमेरिकी व्यापार कानून के तहत किए गए ‘सेक्शन 301’ जांच का हिस्सा है। सेक्शन 301 वह प्रावधान है जिसके तहत अमेरिका किसी देश की व्यापारिक नीतियों या प्रथाओं की जांच करता है और यदि वे अमेरिकी व्यापार हितों के खिलाफ पाई जाती हैं तो उनके विरुद्ध कार्रवाई कर सकता है।

भारत को लेकर रिपोर्ट में क्या कहा गया?
रिपोर्ट के अनुसार भारत उन 54 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है जहां अमेरिका को लगता है कि जबरन मजदूरी से जुड़े मामलों को रोकने के लिए पर्याप्त और प्रभावी व्यवस्था नहीं है। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि इन देशों में श्रम कानूनों का पालन सुनिश्चित करने, आपूर्ति श्रृंखलाओं की निगरानी करने और श्रमिकों के शोषण को रोकने के लिए आवश्यक कदम पर्याप्त नहीं हैं।
हालांकि रिपोर्ट में भारत को सीधे तौर पर जबरन मजदूरी को बढ़ावा देने वाला देश नहीं बताया गया है, लेकिन यह कहा गया है कि मौजूदा व्यवस्था ऐसे उत्पादों की पहचान और रोकथाम के लिए पर्याप्त प्रभावी नहीं मानी जा सकती। अमेरिका का तर्क है कि वैश्विक व्यापार में पारदर्शिता और श्रमिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े उपाय आवश्यक हैं।
क्या है जबरन मजदूरी?
जबरन मजदूरी या फोर्स्ड लेबर वह स्थिति होती है जिसमें किसी व्यक्ति से उसकी इच्छा के विरुद्ध काम कराया जाता है। इसमें धमकी, दबाव, कर्ज, पहचान पत्र जब्त करना, वेतन रोकना या अन्य प्रकार के शोषण शामिल हो सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के अनुसार यह आधुनिक दासता का एक रूप माना जाता है।
अमेरिका लंबे समय से उन उत्पादों के आयात पर निगरानी रखता रहा है जिनके निर्माण में जबरन मजदूरी के इस्तेमाल की आशंका होती है। हाल के वर्षों में उसने कई देशों और कंपनियों पर ऐसे आरोपों के आधार पर प्रतिबंध भी लगाए हैं।
अतिरिक्त कस्टम ड्यूटी का क्या असर हो सकता है?
यदि अमेरिका इस रिपोर्ट के आधार पर अतिरिक्त कस्टम ड्यूटी लागू करता है, तो इसका असर उन देशों के निर्यात पर पड़ सकता है जो अमेरिकी बाजार पर निर्भर हैं। भारत के लिए भी यह महत्वपूर्ण मुद्दा है क्योंकि अमेरिका उसका प्रमुख व्यापारिक साझेदार है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अतिरिक्त शुल्क लगने से भारतीय निर्यातकों की लागत बढ़ सकती है और कुछ क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित हो सकती है। हालांकि किसी भी संभावित कार्रवाई से पहले अमेरिका और संबंधित देशों के बीच बातचीत तथा समीक्षा की प्रक्रिया भी हो सकती है।
भारत की संभावित प्रतिक्रिया
भारत सरकार की ओर से इस रिपोर्ट पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि अतीत में भारत ने श्रम सुधारों, श्रमिक सुरक्षा और कार्यस्थल मानकों को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। भारतीय पक्ष यह तर्क दे सकता है कि देश में श्रम कानूनों के अनुपालन और श्रमिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए व्यापक कानूनी ढांचा मौजूद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं, श्रम अधिकारों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मानकों से भी जुड़ा हुआ है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका इस रिपोर्ट के आधार पर कौन से कदम उठाता है और भारत सहित अन्य प्रभावित देश इस पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं।
फिलहाल USTR की रिपोर्ट ने वैश्विक व्यापार जगत में नई बहस छेड़ दी है। यदि प्रस्तावित अतिरिक्त शुल्क लागू होते हैं, तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों और कई देशों की निर्यात अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

