Stock Market Today: IT Stocks में बड़ी गिरावट से Sensex-Nifty धड़ाम, जानिए पूरी वजह
19 जून 2026, शुक्रवार के दिन भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों को बड़ा झटका लगा। दिन की शुरुआत से ही बिकवाली का दबाव दिखा और देखते ही देखते बेंचमार्क इंडेक्स अपने पांच दिन की तेजी की लय खो बैठे। Sensex और Nifty दोनों ही भारी गिरावट के साथ लाल निशान में कारोबार करते दिखे, और इसकी सबसे बड़ी वजह बनी IT सेक्टर के शेयरों में आई जोरदार बिकवाली।
Sensex-Nifty में कितनी गिरावट आई
कारोबार के दौरान BSE Sensex करीब 830 से 850 अंकों तक लुढ़क गया और दिन के निचले स्तर पर 76,578 के आसपास पहुंच गया। वहीं NSE का Nifty 50 इंडेक्स भी 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर को तोड़कर 23,930 के आसपास कारोबार करता देखा गया। दोपहर करीब 1 बजे तक Nifty 50 लगभग 235 अंक यानी 0.97 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,932.70 पर था, जबकि Sensex 831 अंक यानी 1.05 प्रतिशत टूटकर 76,578.93 के स्तर पर आ गया था।
सुबह के कारोबार में भी यही रुझान देखने को मिला। सुबह 10:16 बजे के आसपास Sensex 675 अंकों की गिरावट के साथ 76,734 पर था, जबकि Nifty 166 अंक गिरकर 24,001 के स्तर पर था। इस गिरावट के साथ ही बाजार ने अपनी पिछली पांच दिनों की लगातार तेजी का सिलसिला तोड़ दिया।
सबसे ज्यादा असर डालने वाला इंडेक्स रहा Nifty IT, जो शुरुआती कारोबार में करीब 6 प्रतिशत तक टूट गया और बीते तीन साल के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया।
आखिर गिरावट की वजह क्या है
इस पूरी गिरावट की जड़ में है अमेरिकी कंसल्टिंग और टेक्नोलॉजी दिग्गज कंपनी Accenture का कमजोर तिमाही नतीजा और घटा हुआ रेवेन्यू गाइडेंस। रात भर अमेरिकी बाजार में हुए कारोबार में Accenture के शेयर 18 प्रतिशत तक टूट गए, जो कंपनी के इतिहास में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है।
दरअसल Accenture ने अपने पूरे वित्त वर्ष के लिए राजस्व वृद्धि का अनुमान घटाकर 3 से 4 प्रतिशत के बीच कर दिया, जबकि पहले यह अनुमान 3 से 5 प्रतिशत के दायरे में था। भले ही यह गिरावट आंकड़ों में मामूली लगे, लेकिन निवेशकों ने इसे वैश्विक स्तर पर IT खर्च में सुस्ती और आने वाले समय में डिमांड कमजोर रहने के संकेत के रूप में लिया।
Accenture के नतीजों का असर सिर्फ उसी कंपनी तक सीमित नहीं रहा। इसके असर में Cognizant के शेयर भी करीब 11 प्रतिशत और Capgemini के शेयर करीब 9 प्रतिशत तक गिर गए। भारतीय कंपनियों के अमेरिकी डिपॉजिटरी रिसीट यानी ADR भी इस सेल-ऑफ से अछूते नहीं रहे — Infosys के ADR रातोंरात करीब 10 प्रतिशत तक टूट गए, जबकि Wipro के ADR में 3.6 से 4 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
विश्लेषकों का मानना है कि चूंकि भारतीय IT कंपनियां इसी तरह की ऑफशोर सर्विस डिलीवरी मॉडल पर काम करती हैं और Accenture के साथ कई समान ग्राहक साझा करती हैं, इसलिए इस तरह की कमजोर गाइडेंस को आगे आने वाली तिमाहियों के नतीजों के लिए एक चेतावनी संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
किन शेयरों पर सबसे ज्यादा मार पड़ी 
IT सेक्टर के लगभग हर बड़े नाम पर आज भारी बिकवाली का दबाव दिखा।
- Infosys के शेयर आज सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। स्टॉक 8 प्रतिशत से अधिक टूटकर दिन के निचले स्तर पर 1,030 रुपये के आसपास पहुंच गया, जो बीते पांच साल का सबसे निचला स्तर है। शेयर पिछले बंद भाव 1,127 रुपये से गैप-डाउन के साथ खुला और कंपनी का मार्केट कैप घटकर करीब 4.23 लाख करोड़ रुपये रह गया।
- TCS के शेयरों में भी करीब 6.5 से 7 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज हुई और स्टॉक करीब 2,060 रुपये के स्तर पर आ गया, जो छह साल के निचले स्तर के करीब है।
- Mphasis के शेयर करीब 6 प्रतिशत गिरकर 2,200 रुपये के आसपास पहुंचे।
- Tech Mahindra, LTIMindtree, Persistent Systems, Coforge और KPIT Technologies जैसी कंपनियों के शेयरों में भी 3 से 5 प्रतिशत के बीच गिरावट देखी गई।
- Wipro और HCL Technologies के शेयर भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे।
हालांकि पूरा बाजार बिकवाली की चपेट में नहीं था। बैंकिंग शेयरों ने कुछ हद तक बाजार को सहारा देने की कोशिश की और गिरावट को थोड़ा सीमित रखने में मदद की।
एक्सपर्ट्स और ब्रोकरेज हाउस की राय
कई ब्रोकरेज फर्मों ने आज की गिरावट पर अपनी प्रतिक्रिया दी। Equirus ब्रोकरेज का कहना है कि Accenture के चौथी तिमाही के ग्रोथ अनुमान से यह संकेत मिलता है कि भारतीय IT सेक्टर के लिए मैक्रो-इकोनॉमिक स्तर पर मांग से जुड़ी दिक्कतें वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में भी बनी रह सकती हैं।
Nirmal Bang की रिसर्च टीम के अनुसार, राजस्व गाइडेंस के ऊपरी छोर में कटौती और सुस्त डील साइनिंग, दोनों ही इस बात की पुष्टि करते हैं कि सेक्टर में रेवेन्यू दबाव और डील साइनिंग में ठहराव की स्थिति बनी हुई है। फर्म ने यह भी कहा कि हालांकि इसका कुछ हिस्सा मिडिल ईस्ट में जारी तनाव से जुड़ा हो सकता है, लेकिन इसका बड़ा कारण AI की वजह से आ रहे बदलाव और दक्षता में सुधार को माना जा रहा है। ब्रोकरेज ने सुझाव दिया कि भारतीय IT कंपनियों को AI क्षमताओं को बढ़ाने, बड़ी डील्स हासिल करने और परिचालन दक्षता सुधारने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए ताकि मार्जिन पर पड़ने वाले दबाव को कम किया जा सके।
HDFC सिक्योरिटीज के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट नंदीश शाह ने भी कहा कि कैलेंडर वर्ष 2026 और वित्त वर्ष 2027 के अनुमानित आंकड़ों में डिस्क्रिशनरी यानी विवेकाधीन खर्च को लेकर सतर्कता बनाए रखने की जरूरत है।
दिलचस्प बात यह है कि Accenture की प्रबंधन टीम ने खुद इस तस्वीर को पूरी तरह नकारात्मक नहीं बताया। कंपनी की चेयरपर्सन और सीईओ जूली स्वीट का कहना था कि बड़े पैमाने पर रीइन्वेंशन यानी कारोबार के पुनर्गठन की मांग मजबूत बनी हुई है, और कैलेंडर वर्ष 2026 में अब तक कंपनी को 100 क्वार्टरली क्लाइंट बुकिंग्स मिल चुकी हैं जिनकी कीमत 10 करोड़ डॉलर या उससे अधिक है। उनके अनुसार कंपनी बड़े पैमाने पर AI ट्रांसफॉर्मेशन प्रोग्राम पर काम कर रही है और नए ग्रोथ क्षेत्रों में पकड़ बनाने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।
वहीं CLSA के विश्लेषकों का मानना है कि Accenture का रेवेन्यू आंकड़ा बाजार की उम्मीदों के अनुरूप ही रहा, और मैनेज्ड सर्विसेज रेवेन्यू में 5 प्रतिशत की सम्मानजनक वृद्धि भी दर्ज हुई। हालांकि असली चिंता की बात रहा ऑर्डर बुक का कमजोर प्रदर्शन, जो सालाना आधार पर 14.7 प्रतिशत घट गया। इसकी एक वजह वेस्ट एशिया में जारी संघर्ष की वजह से बड़ी डील्स में आई कमी को भी बताया जा रहा है।
निवेशकों के लिए आगे क्या
टेक्निकल विश्लेषकों के अनुसार बाजार के लिए आने वाले दिनों में 24,050 का स्तर एक अहम सपोर्ट लेवल माना जा रहा है। अगर इस स्तर से नीचे टिकाऊ तरीके से गिरावट आती है, तो प्रॉफिट बुकिंग का दबाव इंडेक्स को 23,950 और उसके बाद 23,850 के स्तर तक ले जा सकता है। हालांकि जब तक इंडेक्स 24,000 के स्तर के ऊपर बना रहता है, तब तक मध्यम अवधि का तेजी का रुझान बरकरार रहने की उम्मीद जताई जा रही है, और गिरावट में खरीदारी की रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।
बाजार पर नजर रखने वालों का यह भी कहना है कि यह गिरावट सिर्फ एक दिन की घटना नहीं बल्कि एक बड़े ट्रेंड का हिस्सा है। पिछले कुछ समय से वैश्विक स्तर पर AI की वजह से पारंपरिक IT सर्विसेज मॉडल पर दबाव बढ़ता जा रहा है, और इसका असर भारतीय IT कंपनियों के बिजनेस मॉडल और मार्जिन, दोनों पर पड़ रहा है।
निष्कर्ष
19 जून 2026 का दिन भारतीय शेयर बाजार और खासतौर पर IT सेक्टर के निवेशकों के लिए एक बड़ा झटका लेकर आया। Accenture के कमजोर नतीजों और घटे हुए गाइडेंस ने वैश्विक स्तर पर पूरे IT सेक्टर में हलचल मचा दी, जिसका सीधा असर Infosys, TCS, Wipro, HCL Tech और अन्य भारतीय IT कंपनियों के शेयरों पर पड़ा। हालांकि बैंकिंग सेक्टर ने बाजार को कुछ हद तक संभाला, लेकिन कुल मिलाकर Sensex और Nifty दोनों ही लाल निशान में बंद होने की दिशा में बढ़ते दिखे। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि क्या यह गिरावट अस्थायी है या भारतीय IT सेक्टर के लिए एक लंबी चुनौती की शुरुआत साबित होती है।

