Sikkim Tunnel Landslide: निर्माणाधीन सुरंग पर लैंडस्लाइड, 7 मजदूरों की मौत, 20 अब भी फंसे

Sikkim Tunnel Landslide: सिक्किम के नामची जिले में स्थित निर्माणाधीन सुरंग में सोमवार को हुए भीषण लैंडस्लाइड ने बड़ा हादसा खड़ा कर दिया। सुरंग के प्रवेश द्वार पर भारी मलबा गिरने से कई मजदूर अंदर फंस गए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इस दुर्घटना में 7 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 20 मजदूर अब भी सुरंग के भीतर फंसे हुए हैं।
प्रशासन, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें लगातार राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं। हालांकि सुरंग के भीतर मीथेन गैस रिसाव की आशंका और सीमित जगह के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
कैसे हुआ Sikkim Tunnel Landslide हादसा?
यह हादसा सिक्किम के नामची जिले के मामरिंग क्षेत्र स्थित समरदुंग सुरंग में हुआ, जहां निर्माण कार्य चल रहा था। अचानक हुए लैंडस्लाइड के कारण सुरंग का प्रवेश द्वार मलबे से पूरी तरह बंद हो गया।
उस समय कई मजदूर सुरंग के भीतर काम कर रहे थे। प्रशासन के अनुसार अंदर फंसे मजदूरों की संख्या में बदलाव संभव है क्योंकि अंतिम सत्यापन जारी है।
7 मजदूरों की मौत, 20 अब भी फंसे
जिला प्रशासन के अनुसार हादसे में अब तक 7 मजदूरों के शव बरामद किए जा चुके हैं।
इसके अलावा लगभग 20 मजदूर अभी भी सुरंग के अंदर फंसे होने की आशंका है।
अधिकारियों का कहना है कि राहत कार्य पूरा होने के बाद ही फंसे हुए लोगों की वास्तविक संख्या स्पष्ट हो सकेगी।
मीथेन गैस बनी सबसे बड़ी चुनौती
रेस्क्यू अभियान के दौरान सबसे बड़ी समस्या सुरंग के भीतर मीथेन गैस की मौजूदगी मानी जा रही है।
इसके कारण—
- बचाव दल को अंदर जाने में कठिनाई हो रही है।
- कई बचावकर्मियों को चक्कर आए।
- कुछ कर्मचारी बेहोश भी हो गए।
- ऑक्सीजन की कमी और सीमित जगह ने अभियान को और जटिल बना दिया है।
इसी वजह से गैस मास्क और विशेष सुरक्षा उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है।
पश्चिम बंगाल से बुलाई गई विशेष रेस्क्यू टीम
Sikkim Tunnel Landslide के बाद प्रशासन ने बड़े स्तर पर राहत अभियान शुरू किया।
मौके पर मौजूद एजेंसियां—
- NDRF
- SDRF
- जिला पुलिस
- फायर ब्रिगेड
- प्रशासनिक अधिकारी
इसके अलावा पश्चिम बंगाल से गैस-रोधी उपकरणों से लैस विशेष रेस्क्यू टीम को भी बुलाया गया है ताकि सुरंग के भीतर सुरक्षित तरीके से पहुंचा जा सके।
किन कंपनियों के मजदूर थे अंदर?
प्रशासन के अनुसार सुरंग में कुल 27 मजदूर होने की आशंका है।
इनमें शामिल हैं—
- पटेल इंजीनियरिंग कंपनी के लगभग 21 कर्मचारी
- NHPC के 6 कर्मचारी
अभी सभी मजदूरों की अंतिम पुष्टि की प्रक्रिया जारी है।
किस परियोजना का हिस्सा थी यह सुरंग?
जिस सुरंग में हादसा हुआ, उसका निर्माण तीस्ता स्टेज-6 हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट के तहत किया जा रहा था।
यह परियोजना क्षेत्र में जलविद्युत उत्पादन क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से विकसित की जा रही है। निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों और प्राकृतिक परिस्थितियों को लेकर भी जांच की जाएगी।
प्रशासन ने क्या कहा?
जिला प्रशासन के अनुसार दोपहर लगभग 3:40 बजे हादसे की सूचना मिली।
इसके बाद तुरंत राहत एजेंसियों को सक्रिय किया गया और आसपास के अस्पतालों में एंबुलेंस व मेडिकल टीमों को अलर्ट पर रखा गया।
प्रशासन का कहना है कि प्राथमिकता सभी फंसे हुए मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालना है।
रेस्क्यू ऑपरेशन क्यों हो रहा है मुश्किल?
विशेषज्ञों के अनुसार कई कारण बचाव अभियान को प्रभावित कर रहे हैं—
मलबे से बंद हुआ प्रवेश द्वार
भारी मलबा सुरंग के मुख्य प्रवेश मार्ग पर जमा हो गया है।
गैस रिसाव
मीथेन गैस के कारण अंदर लंबे समय तक रुकना खतरनाक है।
कम रोशनी
सुरंग के भीतर विजिबिलिटी बेहद कम है।
सीमित कार्य क्षेत्र
संकीर्ण रास्तों के कारण भारी मशीनों का उपयोग सीमित हो गया है।
सुरक्षा व्यवस्था और आगे की कार्रवाई
प्रशासन ने घटनास्थल पर मेडिकल सहायता, एंबुलेंस और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए हैं।
हादसे के कारणों की जांच भी शुरू की जाएगी। इसमें यह देखा जाएगा कि—
- निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन हुआ या नहीं।
- लैंडस्लाइड के पीछे प्राकृतिक कारण थे या तकनीकी लापरवाही।
- भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए क्या कदम उठाए जाएं।
Sikkim Tunnel Landslide ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और आपदा प्रबंधन की चुनौतियों को उजागर किया है। राहत एजेंसियां लगातार बचाव अभियान चला रही हैं और उम्मीद है कि सुरंग में फंसे मजदूरों को जल्द सुरक्षित बाहर निकाला जा सकेगा। प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।

