हथिनीकुंड बैराज हादसा में दोनों जवानों के शव मिलने का दावा
हथिनीकुंड बैराज हादसा में लापता सेना के दो जवानों के शव मिलने का दावा किया गया है। मंगलवार को यमुनानगर में अभ्यास के दौरान मोटर बोट डूबने के बाद सेना के दो जवान लापता हो गए थे। इसके बाद सेना, NDRF, SDRF, पुलिस और प्रशासन की टीमें लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही थीं।
अब सामने आई जानकारी के मुताबिक, एक शव उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के बरथा कोरसी गांव के पास मिला, जबकि दूसरा शव हरियाणा के जींद जिले में हांसी ब्रांच नहर के अमरेहड़ी गांव के पास बरामद किया गया। दोनों शव डाइविंग सूट में मिलने की बात सामने आई है।
हालांकि, सेना की ओर से दोनों शवों की आधिकारिक पहचान की पुष्टि अभी नहीं की गई है। इसलिए दोनों जवानों के शव होने की बात फिलहाल दावे और प्रारंभिक जानकारी के तौर पर ही सामने आई है।
कैसे हुआ हथिनीकुंड बैराज हादसा?
जानकारी के अनुसार, मंगलवार 1 सितंबर की शाम करीब 5 बजे वन पैरा स्पेशल फोर्स के पांच जवान प्रशिक्षण अभ्यास में शामिल थे। अभ्यास के दौरान जवान चिनूक हेलिकॉप्टर से यमुना नदी में खड़ी एक मोटर बोट पर पहुंचे।
बताया गया कि जवानों के बोट में पहुंचने के बाद मोटर बोट शुरू नहीं हो सकी और अचानक पानी में डूबने लगी। स्थिति बिगड़ने पर जवानों ने डाइविंग किट और लाइफ जैकेट के साथ पानी में छलांग लगा दी।
पांच जवानों में से तीन किसी तरह तैरकर पश्चिमी यमुना नहर के गेट से बाहर निकलने में सफल रहे। वहीं, महाराष्ट्र के पीआर नारायण और जम्मू-कश्मीर के अखनूर निवासी अजय का पता नहीं चल सका।
हादसे के तुरंत बाद दोनों लापता जवानों की तलाश शुरू कर दी गई थी।
हथिनीकुंड बैराज हादसा के बाद बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन
दो जवानों के लापता होने के बाद सेना के साथ-साथ NDRF, SDRF, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें भी सर्च अभियान में जुट गईं। बैराज से जुड़े नदी और नहर क्षेत्रों में अलग-अलग टीमों को लगाया गया।
सर्च ऑपरेशन के दौरान सेना की कई टीमों ने पश्चिमी यमुना नहर के आसपास तलाश की। पानी का बहाव कम करने के लिए नहर में कुछ समय के लिए पानी रोकने की प्रक्रिया भी अपनाई गई, ताकि जवानों की तलाश में आसानी हो सके।
जवानों ने ह्यूमन चेन बनाकर पानी में उतरकर भी तलाशी अभियान चलाया। इसके अलावा हेलिकॉप्टर के जरिए भी आसपास के क्षेत्रों पर नजर रखी गई।

दूसरे दिन मिला अहम सुराग
हादसे के अगले दिन यानी 2 सितंबर को सर्च ऑपरेशन के दौरान बैराज से करीब 15 किलोमीटर दूर दादूपुर हेड के पास दो लाइफ जैकेट और एक डाइविंग किट बरामद होने की जानकारी सामने आई।
इन सामानों को लेकर यह स्पष्ट नहीं किया गया कि वे लापता जवानों के ही थे या नहीं। इसके बाद भी सर्च टीमों ने आसपास के इलाकों में तलाश जारी रखी।
बुधवार रात करीब 8 बजे उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के बरथा कोरसी गांव में डाइविंग सूट पहने एक युवक का शव बरामद हुआ। सिंचाई विभाग की ओर से इसकी सूचना सेना को दी गई।
प्रारंभिक जानकारी में इस शव को जम्मू-कश्मीर के अखनूर निवासी जवान अजय का बताया गया, लेकिन सेना की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई।
200 किलोमीटर दूर मिला दूसरा शव
गुरुवार 3 सितंबर को सर्च ऑपरेशन को लेकर एक और बड़ी जानकारी सामने आई। हथिनीकुंड बैराज के अलावा सेना की टीमें करनाल के इंद्री क्षेत्र में भी निगरानी कर रही थीं।
दरअसल, आशंका थी कि पानी के बहाव के साथ कोई शव पश्चिमी यमुना नहर के जरिए आगे तक पहुंच सकता है। इसी संभावना के चलते नहर के आसपास निगरानी रखी जा रही थी।
इसी दौरान दोपहर करीब 12 बजे हरियाणा के जींद जिले से दूसरे शव के मिलने की सूचना आई। बताया गया कि हांसी ब्रांच नहर में अमरेहड़ी गांव के पास डाइविंग सूट पहने एक शव बरामद हुआ।
यह स्थान हथिनीकुंड बैराज से करीब 200 किलोमीटर दूर बताया जा रहा है। प्रारंभिक जानकारी में शव की पहचान महाराष्ट्र निवासी जवान पीआर नारायण के रूप में किए जाने का दावा किया गया है। हालांकि, इस पहचान की भी सेना की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
पानी के बहाव के साथ दूर तक पहुंचने की आशंका
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि दूसरा शव हादसे वाली जगह से करीब 200 किलोमीटर दूर मिला। इससे आशंका जताई जा रही है कि पानी के तेज बहाव के कारण शव नहरों के रास्ते काफी दूर तक पहुंच गया होगा।
पश्चिमी यमुना नहर और उससे जुड़ी नहरों में पानी के बहाव को देखते हुए सर्च ऑपरेशन को अलग-अलग क्षेत्रों तक बढ़ाया गया था। इसी वजह से सेना और बचाव दलों को बैराज के आसपास के साथ-साथ दूर के नहर क्षेत्रों में भी निगरानी रखनी पड़ी।
सेना की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
फिलहाल दोनों शवों के मिलने की सूचना सामने आ चुकी है, लेकिन उनकी पहचान को लेकर सेना की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। शवों की पहचान और अन्य औपचारिक प्रक्रियाओं के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
हथिनीकुंड बैराज हादसा के बाद लगातार तीन दिनों तक चले सर्च ऑपरेशन में कई एजेंसियां शामिल रहीं। सेना और बचाव दलों ने नदी, नहर और आसपास के इलाकों में अलग-अलग स्तर पर तलाशी अभियान चलाया।
घटना के बाद बरामद मोटर बोट, डाइविंग किट, लाइफ जैकेट और अन्य साक्ष्यों को भी जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
तीन दिन में ऐसे चला सर्च ऑपरेशन
1 सितंबर:
शाम करीब 5 बजे अभ्यास के दौरान मोटर बोट डूबने के बाद पांच जवान पानी में कूदे। तीन जवान सुरक्षित बाहर निकल आए, जबकि दो जवान लापता हो गए।
2 सितंबर:
सेना, SDRF और अन्य एजेंसियों ने बड़े स्तर पर तलाशी अभियान चलाया। दादूपुर हेड के पास लाइफ जैकेट और डाइविंग किट मिली। रात में सहारनपुर के बरथा कोरसी गांव के पास डाइविंग सूट पहने एक शव मिला।
3 सितंबर:
सर्च ऑपरेशन को आगे बढ़ाते हुए करनाल और आसपास के नहर क्षेत्रों में निगरानी रखी गई। दोपहर में जींद की हांसी ब्रांच नहर में दूसरा शव मिलने की सूचना सामने आई।
महत्वपूर्ण बातें
- हथिनीकुंड बैराज के पास प्रशिक्षण अभ्यास के दौरान हादसा हुआ।
- पांच जवानों में से तीन सुरक्षित बाहर निकल आए थे।
- दो जवान लापता हुए थे।
- सहारनपुर में एक शव मिलने का दावा किया गया।
- जींद की हांसी ब्रांच नहर में दूसरा शव मिलने की सूचना है।
- दूसरा शव करीब 200 किलोमीटर दूर मिलने की बात सामने आई है।
- दोनों शव डाइविंग सूट में मिले होने का दावा है।
- दोनों जवानों की पहचान की सेना से आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
- सेना, NDRF, SDRF, पुलिस और प्रशासन की टीमें सर्च ऑपरेशन में जुटी थीं।
नोट: यह खबर उपलब्ध प्रारंभिक जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। दोनों शवों की पहचान को लेकर सेना की आधिकारिक पुष्टि होने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।
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