ConsumerPrice में फिर बढ़ोतरी के संकेत, कंपनियां घटा सकती हैं पैकेट का वजन
ConsumerPrice बढ़ने के संकेत, रोजमर्रा के सामान हो सकते हैं महंगे
देश में महंगाई का असर अब आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर और ज्यादा पड़ सकता है। आने वाले दिनों में खाने-पीने और घरेलू इस्तेमाल के कई जरूरी सामान महंगे हो सकते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनियों पर लगातार बढ़ती लागत का दबाव बना हुआ है, जिसके कारण ConsumerPrice में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।

सिस्टेमैटिक्स रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार अलग-अलग कैटेगरी की कंपनियां पिछले कुछ महीनों से लगातार लागत बढ़ने की समस्या का सामना कर रही हैं। कच्चे माल की कीमतों में तेजी के कारण कंपनियों की लागत काफी बढ़ गई है। यही वजह है कि ConsumerPrice में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले एक से दो महीनों के दौरान कई कंपनियों ने अपने प्रोडक्ट्स की कीमतों में औसतन 3% से 7% तक की बढ़ोतरी कर दी है। कंपनियों की रॉ मटीरियल बास्केट की लागत में करीब 10% तक इजाफा हुआ है। इस बढ़ती लागत का असर सीधे ConsumerPrice पर पड़ रहा है।

महंगाई के ताजा आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल महीने में रिटेल महंगाई बढ़कर 3.48% तक पहुंच गई है। मार्च में यह आंकड़ा 3.40% था। खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने की वजह से फूड इन्फ्लेशन भी बढ़कर 4.20% तक पहुंच गया है। बढ़ती महंगाई के कारण ConsumerPrice पर दबाव और बढ़ गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में FMCG कंपनियां अपने कई प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ा सकती हैं। ConsumerPrice में बढ़ोतरी का असर सबसे ज्यादा मध्यम वर्ग और आम परिवारों के घरेलू बजट पर देखने को मिल सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक कंपनियां कीमत बढ़ाने के साथ-साथ ‘ग्रामेज कट’ यानी पैकेट का वजन कम करने का तरीका भी अपना सकती हैं। इसे अर्थशास्त्र की भाषा में Shrinkflation कहा जाता है। इसमें कंपनियां प्रोडक्ट की कीमत वही रखती हैं लेकिन पैकेट के अंदर मिलने वाला सामान कम कर देती हैं। ConsumerPrice का यह तरीका ग्राहकों को सीधे तौर पर दाम बढ़ने का एहसास नहीं होने देता।
कच्चे माल की लागत बढ़ने की सबसे बड़ी वजह पाम ऑयल, क्रूड ऑयल और पैकेजिंग कॉस्ट में आई तेजी है। रिपोर्ट के अनुसार HDPE यानी प्लास्टिक पैकेजिंग मटीरियल की कीमतों में करीब 56% तक बढ़ोतरी हुई है। इसका इस्तेमाल शैंपू की बोतलें, डिटर्जेंट कंटेनर और फ्लेक्सिबल पैकेजिंग में किया जाता है। इस वजह से ConsumerPrice पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है।
वहीं पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में भी करीब 32% की तेजी आई है। इसके अलावा पाम ऑयल के दाम भी 11% तक बढ़ चुके हैं। इन सभी कारणों से कंपनियों की लागत तेजी से बढ़ रही है और ConsumerPrice में बढ़ोतरी की संभावना मजबूत हो रही है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कच्चे माल की महंगाई का असर कंपनियों के मुनाफे पर भी दिखाई देने लगा है। मार्च तिमाही में कई बड़ी कंपनियों के ग्रॉस मार्जिन में करीब 0.50% तक की गिरावट दर्ज की गई। कंपनियां लगातार लागत बढ़ने से दबाव में हैं और ConsumerPrice बढ़ाकर नुकसान से बचने की कोशिश कर रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में इस महंगाई का असर और ज्यादा दिखाई दे सकता है। हालांकि कंपनियां कीमतें बढ़ाकर अपने घाटे को कम करने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन बढ़ती लागत के कारण उनका कुल मुनाफा प्रभावित हो सकता है। ConsumerPrice बढ़ने से बाजार में खपत पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई है।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि लगातार बढ़ती रिटेल महंगाई के कारण आने वाले समय में सामान की कुल बिक्री यानी कंजम्पशन वॉल्यूम कम हो सकता है। अगर ConsumerPrice इसी तरह बढ़ता रहा तो लोग खर्च कम कर सकते हैं और इसका असर कंपनियों की बिक्री पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल कंपनियां लागत घटाने और सप्लाई चेन मजबूत करने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन अगर कच्चे माल की कीमतें कम नहीं हुईं तो आने वाले महीनों में ConsumerPrice में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। आम लोगों को आने वाले समय में अपने घरेलू बजट को लेकर ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत पड़ सकती है।
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