Sensex Fall : ईरान जंग से सेंसेक्स 1900 अंक टूटा, रुपया रिकॉर्ड गिरावट पर, कच्चा तेल 60% महंगा
Sensex Fall : अमेरिका-इजराइल और ईरान युद्ध के असर से भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट आई है। सेंसेक्स करीब 1900 अंक टूटकर 77 हजार पर पहुंच गया, जबकि रुपया डॉलर के मुकाबले 92.28 के ऑलटाइम लो पर पहुंचा। कच्चा तेल 10 दिनों में 60% महंगा होकर 116 डॉलर प्रति बैरल हो गया।
Sensex Fall : ईरान जंग से सेंसेक्स 1900 अंक टूटा, रुपया रिकॉर्ड गिरावट पर
युद्ध के असर से शेयर बाजार में भारी गिरावट
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक बाजारों के साथ-साथ भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिल रहा है। सोमवार 9 मार्च को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई।
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स करीब 1900 अंक यानी 2.50% गिरकर 77,000 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया।
वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी इंडेक्स भी करीब 600 अंक की गिरावट के साथ 23,850 के आसपास कारोबार करता रहा।
आज बाजार में बैंकिंग, ऑटो, मेटल, एनर्जी और FMCG सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिली।
जियोपॉलिटिकल तनाव से निवेशकों में घबराहट
मध्य-पूर्व में बढ़ते युद्ध जैसे हालात के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि जियोपॉलिटिकल तनाव बढ़ने पर महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है।
जब युद्ध या वैश्विक संकट की स्थिति बनती है तो कच्चे तेल और अन्य जरूरी संसाधनों की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं। इससे कंपनियों की लागत बढ़ती है और मुनाफा घट सकता है।
ऐसी स्थिति में निवेशक जोखिम कम करने के लिए शेयर बेचकर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं। इसका सीधा असर शेयर बाजार पर पड़ता है और बाजार में तेज गिरावट देखने को मिलती है।
बाजार गिरने की तीन मुख्य वजहें

विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा गिरावट के पीछे तीन प्रमुख कारण हैं।
पहला कारण:
ईरान-इजराइल युद्ध के कारण वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होने का खतरा।
दूसरा कारण:
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी, जिससे भारत का आयात बिल और महंगाई बढ़ सकती है।
तीसरा कारण:
अमेरिकी और एशियाई बाजारों में कमजोरी का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ रहा है।
निवेशकों की वेल्थ में ₹25 लाख करोड़ की गिरावट
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव का असर निवेशकों की संपत्ति पर भी पड़ा है।
ईरान और इजराइल-अमेरिका के बीच युद्ध जैसी स्थिति बनने के बाद से शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली है।
27 फरवरी को युद्ध शुरू होने से पहले BSE में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब ₹4.63 लाख करोड़ था।
लेकिन लगातार गिरावट के बाद 9 मार्च तक यह घटकर ₹4.38 लाख करोड़ रह गया। यानी निवेशकों की कुल संपत्ति में ₹25 लाख करोड़ से ज्यादा की कमी आ चुकी है।
कच्चा तेल 10 दिनों में 60% महंगा
वैश्विक तनाव का सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिला है।
ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक केवल 10 दिनों में कच्चा तेल करीब 60% तक महंगा हो चुका है।
इससे पहले 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान तेल की कीमतें 100 डॉलर के पार पहुंची थीं।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।
भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा होने की आशंका

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर भारत में भी देखने को मिल सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें 5 से 6 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ सकती हैं।
हालांकि सरकार का कहना है कि फिलहाल देश में पर्याप्त तेल भंडार मौजूद है और सप्लाई को लेकर तत्काल चिंता की स्थिति नहीं है।
रुपया डॉलर के मुकाबले ऑल टाइम लो पर
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और वैश्विक अनिश्चितता का असर भारतीय मुद्रा पर भी पड़ा है।
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 46 पैसे कमजोर होकर 92.28 के स्तर पर पहुंच गया।
यह रुपया का अब तक का सबसे निचला स्तर (ऑल टाइम लो) है। विशेषज्ञों का कहना है कि मिडिल ईस्ट में बिगड़ते हालात के कारण विदेशी निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर जा रहे हैं, जिससे रुपया कमजोर हो रहा है।
सोना-चांदी भी हुए महंगे
वैश्विक अनिश्चितता के बीच निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख किया है। इसका असर सोना और चांदी की कीमतों पर भी दिखाई दिया।
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के अनुसार
10 ग्राम 24 कैरेट सोना 800 रुपए बढ़कर 1.60 लाख रुपए तक पहुंच गया है।
वहीं एक किलो चांदी 2000 रुपए बढ़कर 2.63 लाख रुपए पर पहुंच गई है।
एशियाई और अमेरिकी बाजारों पर भी असर
मध्य-पूर्व संकट का असर वैश्विक बाजारों पर भी पड़ा है।
एशियाई बाजारों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। वहीं अमेरिकी बाजार में भी गिरावट दर्ज की गई।
अमेरिकी बाजार में
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डाउ जोन्स 453 अंक गिरकर 47,501 पर बंद हुआ।
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नैस्डैक 1.59% गिरकर 22,387 पर बंद हुआ।
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S&P 500 इंडेक्स 90 अंक गिरकर 6,740 पर बंद हुआ।
पिछले सत्र में भी गिरा था बाजार
इससे पहले शुक्रवार यानी 6 मार्च को भी भारतीय शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई थी।
उस दिन सेंसेक्स 1097 अंक गिरकर 78,919 पर बंद हुआ था।
वहीं निफ्टी 315 अंक टूटकर 24,450 के स्तर पर बंद हुआ था।

