मुकेश अंबानी ने लगातार छठे साल नहीं ली सैलरी, Reliance Industries रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
Reliance Industries: सैलरी जीरो लेकिन डिविडेंड से हजारों करोड़ की कमाई जारी
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने एक बार फिर सभी को चौंकाते हुए लगातार छठे साल भी कोई सैलरी नहीं ली है। कंपनी की एनुअल रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 (FY26) में उनकी सैलरी, अलाउंस, भत्ते और रिटायरल बेनिफिट्स पूरी तरह जीरो रहे हैं। यह फैसला कॉर्पोरेट जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है और इसका सीधा संबंध Reliance Industries से है।

मुकेश अंबानी ने यह निर्णय जून 2020 में कोरोना महामारी के दौरान लिया था, जब देश की आर्थिक स्थिति पर बड़ा असर पड़ा था। उन्होंने तय किया था कि जब तक कंपनी के सभी बिजनेस पूरी तरह सामान्य स्थिति में नहीं लौट आते, तब तक वह कोई वेतन नहीं लेंगे। इसके बाद से वह लगातार बिना सैलरी के काम कर रहे हैं, और यह पूरी कहानी Reliance Industries की नेतृत्व शैली को दर्शाती है।
हालांकि सैलरी न लेने के बावजूद उनकी कमाई पूरी तरह बंद नहीं है। उनकी आय का मुख्य स्रोत कंपनी से मिलने वाला डिविडेंड है। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने FY26 के लिए ₹6 प्रति शेयर का डिविडेंड घोषित किया है, जिससे उन्हें व्यक्तिगत रूप से भी अच्छी आय होगी। यह पूरा मामला Reliance Industries की मजबूत फाइनेंशियल स्थिति को दिखाता है।
इसके अलावा प्रमोटर ग्रुप की हिस्सेदारी भी उनकी कुल कमाई में बड़ा योगदान देती है। प्रमोटर ग्रुप के पास कंपनी के 664.5 करोड़ शेयर (50.07% हिस्सेदारी) हैं, जिससे हजारों करोड़ रुपये का डिविडेंड प्राप्त होता है। यह संरचना भी Reliance Industries की ताकत को और मजबूत बनाती है।

मुकेश अंबानी दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में शामिल हैं और उनकी नेटवर्थ अरबों डॉलर में है। इसके बावजूद उनका सैलरी न लेना कॉर्पोरेट दुनिया में एक अलग संदेश देता है। यह स्थिति भी Reliance Industries को वैश्विक स्तर पर एक विशेष पहचान दिलाती है।
कंपनी के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के वेतन में भी बदलाव देखने को मिला है। कुछ एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स को करोड़ों रुपये का पैकेज दिया गया है, जबकि बोर्ड सदस्यों को सिटिंग फीस और कमीशन प्राप्त हुआ है। यह पूरी मैनेजमेंट स्ट्रक्चर भी Reliance Industries के संचालन मॉडल को दर्शाती है।
अनंत अंबानी को एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में ₹12.17 करोड़ का पैकेज मिला है, जबकि आकाश और ईशा अंबानी को बोर्ड में शामिल होने के बाद केवल सिटिंग फीस और प्रॉफिट कमीशन दिया गया है। यह पूरा ढांचा भी Reliance Industries की उत्तराधिकार योजना का हिस्सा माना जाता है।
कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो चौथी तिमाही में नेट प्रॉफिट में गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन रेवेन्यू में बढ़ोतरी देखने को मिली है। यह संकेत देता है कि Reliance Industries अभी भी मजबूत ग्रोथ बनाए हुए है।
डिविडेंड के जरिए प्रमोटर ग्रुप को लगभग ₹3,987 करोड़ की आय हुई है, जो कंपनी की मजबूत स्थिति को और स्पष्ट करता है। यह पूरी वित्तीय संरचना भी Reliance Industries की ताकत को दिखाती है।
मुकेश अंबानी की व्यक्तिगत कमाई का बड़ा हिस्सा डिविडेंड से आता है, जबकि वह स्वयं कोई वेतन नहीं लेते। यह अनोखा मॉडल कॉर्पोरेट दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है और इसे Reliance Industries की खास रणनीति माना जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला न केवल प्रतीकात्मक है बल्कि कंपनी की स्थिरता और आत्मविश्वास को भी दर्शाता है। यही वजह है कि Reliance Industries निवेशकों के लिए अब भी एक मजबूत ब्रांड बना हुआ है।
कुल मिलाकर मुकेश अंबानी का लगातार सैलरी न लेना और डिविडेंड से आय प्राप्त करना एक अनोखा कॉर्पोरेट उदाहरण है, जो पूरी तरह Reliance Industries के इर्द-गिर्द केंद्रित है और कंपनी की वैश्विक पहचान को और मजबूत करता है।
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