भामाशाहों के सहयोग से बदली सिंचाणा School की तस्वीर
शुरू हुआ छत मरम्मत कार्य
कोटपूतली-बहरोड़ क्षेत्र के सिंचाणा गांव में शिक्षा और बच्चों की सुरक्षा को लेकर ग्रामीणों ने एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय सिंचाणा की जर्जर हो चुकी छत और पूर्व में हुई घटनाओं को देखते हुए गांव के लोगों ने विद्यालय के विकास और बच्चों की सुरक्षा के लिए जनसहयोग अभियान शुरू किया। इस अभियान का नेतृत्व विद्यालय के शिक्षक गिरधारी लाल वर्मा (आसलपुर) ने किया, जिसे ग्रामीणों और भामाशाहों का भरपूर समर्थन मिला। सामूहिक प्रयासों से करीब 4 लाख रुपये की राशि एकत्रित कर विद्यालय की जर्जर छत के मरम्मत कार्य की शुरुआत कर दी गई है।

विद्यालय की छत लंबे समय से खराब स्थिति में थी, जिससे बच्चों और स्टाफ की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई थी। बरसात के दिनों में स्थिति और भी खतरनाक हो जाती थी। कई बार प्लास्टर टूटकर गिरने की घटनाएं भी सामने आई थीं, जिसके बाद विद्यालय स्टाफ और ग्रामीणों ने मिलकर समाधान निकालने का निर्णय लिया। बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए गांव में जनसहयोग अभियान चलाया गया, जिसमें लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।

इस सामाजिक पहल में गांव के भामाशाहों ने भी दिल खोलकर सहयोग किया। भामाशाह खंगारराम देवड़ा ने 1 लाख रुपये की राशि देकर अभियान को मजबूती दी, जबकि देवाराम भायल ने 51 हजार रुपये का सहयोग प्रदान किया। इनके अलावा करीब 85 ग्रामीणों और समाजसेवियों ने अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार आर्थिक सहायता देकर विद्यालय के विकास में भागीदारी निभाई। ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय गांव के भविष्य की नींव होता है और बच्चों की सुरक्षा व अच्छी शिक्षा सुनिश्चित करना पूरे समाज की जिम्मेदारी है।
शिक्षक गिरधारी लाल वर्मा ने बताया कि विद्यालय की स्थिति को देखते हुए यह अभियान शुरू किया गया था। शुरुआत में लोगों से सहयोग की अपील की गई, जिसके बाद गांव के लोगों ने इसे अपना अभियान बना लिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह ग्रामीणों ने एकजुट होकर सहयोग किया, वह समाज की शिक्षा के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता को दर्शाता है। उन्होंने सभी सहयोगकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल मरम्मत कार्य नहीं, बल्कि बच्चों के सुरक्षित भविष्य की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम है।
विद्यालय के संस्था प्रधान छगन लाल गर्ग ने भी सभी भामाशाहों और ग्रामीणों का धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि सामूहिक सहयोग से विद्यालय का कायाकल्प संभव हो पाया है। उन्होंने बताया कि विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को अब सुरक्षित वातावरण मिलेगा, जिससे वे बिना किसी भय के शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे। संस्था प्रधान ने कहा कि समाज और विद्यालय का यह तालमेल शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने का बेहतरीन उदाहरण है।
गांव में इस पहल की व्यापक सराहना हो रही है। लोग इसे सामाजिक एकता और शिक्षा के प्रति जागरूकता का प्रतीक मान रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समाज इसी तरह शिक्षा और बच्चों के भविष्य के लिए आगे आता रहा तो सरकारी विद्यालयों की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। गांव के युवाओं और बुजुर्गों ने भी इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई और लोगों को सहयोग के लिए प्रेरित किया।
सिंचाणा गांव की यह पहल अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग इसे एक प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में देख रहे हैं, जहां समाज ने मिलकर बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा के लिए जिम्मेदारी निभाई। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि भविष्य में भी इसी तरह जनसहयोग से विद्यालय में अन्य विकास कार्य कराए जाएंगे, ताकि बच्चों को बेहतर सुविधाएं और सुरक्षित वातावरण मिल सके।

