ताड़केश्वर मंदिर में सहस्त्र घट उत्सव के दौरान मची अफरा-तफरी, भीड़ संभालने Police ने भांजी लाठियां
प्रसादी वितरण के दौरान बिगड़े हालात
जयपुर के परकोटे स्थित ताड़केश्वर महादेव मंदिर में सोमवार को आयोजित सहस्त्र घट उत्सव और महाप्रसादी कार्यक्रम के दौरान भारी अव्यवस्था देखने को मिली। मंदिर प्रबंधन द्वारा 15 हजार श्रद्धालुओं के लिए प्रसादी की व्यवस्था की गई थी, लेकिन कार्यक्रम में करीब 35 हजार लोग पहुंच गए। क्षमता से दोगुनी भीड़ उमड़ने के कारण मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में अफरा-तफरी मच गई। हालात बिगड़ते देख पुलिस को लाठी फटकार कर भीड़ को नियंत्रित करना पड़ा। इस दौरान बैरिकेड्स के पास श्रद्धालुओं को रोकने के लिए धक्का-मुक्की भी हुई, जिससे भगदड़ जैसे हालात बन गए।
सोमवार सुबह से ही ताड़केश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने लगी थी। चौड़ा रास्ता स्थित इस प्रसिद्ध मंदिर में सहस्त्र घट उत्सव के तहत भक्तों ने भगवान शिव का जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक किया। मंदिर परिसर पूरे दिन रुद्रपाठ और धार्मिक मंत्रोच्चार से गूंजता रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हवन में आहुतियां भी दीं। धार्मिक आयोजन के बाद महाप्रसादी वितरण शुरू हुआ, लेकिन यहां मंदिर प्रबंधन की तैयारियां नाकाफी साबित हुईं।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार प्रसादी वितरण के लिए किसी प्रकार का कूपन सिस्टम लागू नहीं किया गया था। जैसे-जैसे भीड़ बढ़ती गई, कतारें आधा किलोमीटर तक लंबी हो गईं। घंटों इंतजार के बावजूद लोगों को प्रसादी नहीं मिल पा रही थी। भीड़ में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की हालत खराब होने लगी। कई लोगों को सांस लेने में दिक्कत का सामना करना पड़ा। हालात तब और बिगड़ गए जब श्रद्धालु बैरिकेड्स पार कर आगे बढ़ने लगे।

स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए पुलिसकर्मियों ने बैरिकेड्स के पास भीड़ को पीछे धकेलना शुरू किया। इस दौरान पुलिस को डंडों और धक्कों का सहारा लेना पड़ा। अचानक हुई सख्ती से वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और कुछ समय के लिए भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। बाद में हालात संभालने के लिए ईआरटी कमांडो भी तैनात किए गए। पुलिस और प्रशासन ने मिलकर किसी तरह व्यवस्था को नियंत्रित किया।
मंदिर प्रबंधन के अनुसार महाप्रसादी के लिए बड़े स्तर पर तैयारियां की गई थीं। श्री ताड़केश्वर नवयुवक मंडल अध्यक्ष शक्ति व्यास ने बताया कि भगवान ताड़केश्वर महादेव को 95 हजार दूध के लड्डुओं और 7 हजार किलो आम रबड़ी का भोग लगाया गया। आम रबड़ी तैयार करने के लिए करीब 5 हजार किलो दूध, 2 हजार किलो आम, बड़ी मात्रा में चीनी और मेवों का उपयोग किया गया। इसके अलावा प्रसादी और भोजन सामग्री तैयार करने में 50 से अधिक हलवाई लगे हुए थे। आयोजन में 1100 किलो चीनी, 51 पीपे तेल, 41 पीपे देशी घी और करीब 2 हजार किलो आटे का इस्तेमाल किया गया।

हालांकि इतने बड़े धार्मिक आयोजन के बावजूद भीड़ प्रबंधन को लेकर पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए, जिससे श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर प्रशासन को पहले से अनुमान लगाना चाहिए था कि सहस्त्र घट उत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे। यदि कूपन व्यवस्था और अलग-अलग प्रवेश एवं निकास मार्ग बनाए जाते तो हालात काबू में रह सकते थे।
घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी मंदिर प्रबंधन और प्रशासन की आलोचना हो रही है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि इतने बड़े आयोजन में सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए गए। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस दौरान कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, लेकिन कुछ समय के लिए हालात बेहद तनावपूर्ण बने रहे। अब प्रशासन भविष्य में ऐसे आयोजनों में बेहतर प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कह रहा है।

