Panchayat चुनाव से पहले मतदाता सूची विवाद: बीजेपी नेता अमन शुक्ला का नाम कटने पर उठे सवाल, डीएम ने शुरू कराई जांच
बस्ती। उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद में आगामी Panchayat चुनाव की तैयारियों के बीच मतदाता सूची को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। हर्रैया तहसील क्षेत्र के ग्राम परासडीह निवासी और भाजपा से जुड़े युवा नेता अमन शुक्ला का नाम अंतिम मतदाता सूची-2026 से हटाए जाने के मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अमन शुक्ला ने जिला निर्वाचन अधिकारी को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया है कि बिना किसी सूचना और वैध कारण के उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया, जबकि वर्ष 2025 की मतदाता सूची में उनका नाम दर्ज था।

अमन शुक्ला ने अपने शिकायत पत्र में बताया कि वह ग्राम Panchayat परासडीह के स्थायी निवासी हैं और लंबे समय से गांव के सामाजिक, विकासात्मक तथा जनहित से जुड़े कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 की अनंतिम मतदाता सूची में उनका नाम शामिल था, लेकिन अंतिम सूची जारी होने पर उनका नाम अचानक गायब मिला। सबसे हैरानी की बात यह है कि उन्होंने स्वयं गांव के कई लोगों के वोटर कार्ड बनवाने और मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने में सहयोग किया था, लेकिन उनका अपना नाम ही सूची से हटा दिया गया।
राजनीतिक रूप से भी अमन शुक्ला का क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रभाव माना जाता है। वह भारतीय जनता पार्टी के पूर्व कार्यसमिति सदस्य रह चुके हैं और गौर ब्लॉक के प्रथम प्रमुख के नाती भी हैं। इसके बावजूद उनका नाम मतदाता सूची से हटाया जाना कई सवालों को जन्म दे रहा है। अमन का आरोप है कि यह केवल प्रशासनिक त्रुटि नहीं बल्कि एक सोची-समझी साजिश भी हो सकती है, जिसका उद्देश्य Panchayat चुनाव में उनकी संभावित दावेदारी को कमजोर करना है।
अमन शुक्ला ने बताया कि Panchayat चुनाव को ध्यान में रखते हुए वह पिछले कई महीनों से जनसंपर्क अभियान चला रहे थे और ग्राम प्रधान पद के संभावित उम्मीदवार के रूप में अपनी तैयारी कर रहे थे। ऐसे समय में मतदाता सूची से नाम हट जाना न केवल उनके मतदान के अधिकार को प्रभावित करता है बल्कि चुनाव लड़ने की पात्रता पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नाम हटाने से पहले उन्हें किसी प्रकार की सूचना नहीं दी गई और न ही कोई नोटिस जारी किया गया। उनका कहना है कि निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए पात्र मतदाताओं को उचित अवसर और जानकारी देना आवश्यक है। यदि बिना सूचना के नाम हटाए जाएंगे तो इससे चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित होगी।

अपने शिकायत पत्र में अमन शुक्ला ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, मतदाता सूची का पुनः परीक्षण करने और उनका नाम तत्काल बहाल करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही अथवा जानबूझकर की गई कार्रवाई सामने आती है तो उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी कृतिका ज्योत्सना ने तत्काल संज्ञान लिया है। सूत्रों के अनुसार डीएम ने संबंधित अधिकारियों को मामले की जांच के निर्देश दिए हैं और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन भी दिया है।
Panchayat चुनाव से पहले मतदाता सूची से जुड़े इस विवाद ने जिले में राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच और उसके निष्कर्षों पर टिकी हैं। यदि शिकायत सही पाई जाती है तो यह मामला चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता अधिकारों की सुरक्षा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है। वहीं जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नाम हटाया जाना महज तकनीकी त्रुटि थी या इसके पीछे कोई अन्य कारण मौजूद था।

