Petrol-Diesel Price Hike से बढ़ेगी महंगाई, FuelShock के बाद आम जनता पर बढ़ा बोझ
पेट्रोल ₹2.61 और डीजल ₹2.71 महंगा, FuelShock से ट्रांसपोर्ट से लेकर खेती तक असर
देशभर में एक बार फिर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी ने आम जनता की चिंता बढ़ा दी है। तेल कंपनियों ने 25 मई से पेट्रोल ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल ₹2.71 प्रति लीटर महंगा कर दिया है। इस बढ़ोतरी के बाद राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर पहुंच गई है। लंबे समय बाद हुई इस बढ़ोतरी ने बाजार से लेकर आम आदमी की जेब तक हर जगह असर डालना शुरू कर दिया है। पूरे देश में इस FuelShock को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ते ही सबसे पहले असर ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर देखने को मिलेगा। ट्रक, टेम्पो और मालवाहक वाहनों का किराया बढ़ सकता है, जिससे दूसरे राज्यों से आने वाली सब्जियां, फल और राशन महंगे हो जाएंगे। व्यापारियों का कहना है कि डीजल महंगा होने से मालभाड़ा बढ़ेगा और इसका सीधा असर बाजार में मिलने वाली रोजमर्रा की चीजों पर पड़ेगा। यही वजह है कि इस FuelShock को आने वाले दिनों में महंगाई बढ़ाने वाला बड़ा कारण माना जा रहा है।
खेती-किसानी पर भी इसका बड़ा असर पड़ने वाला है। किसानों को ट्रैक्टर और पंपिंग सेट चलाने के लिए अब ज्यादा खर्च करना होगा। खेती की लागत बढ़ने से अनाज और अन्य कृषि उत्पादों के दाम भी बढ़ सकते हैं। ग्रामीण इलाकों में डीजल की कीमत बढ़ना सीधे किसानों की कमर तोड़ने जैसा माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह FuelShock लंबे समय तक जारी रहा तो खेती की लागत में भारी इजाफा देखने को मिल सकता है।
सार्वजनिक परिवहन पर भी इसका असर साफ दिखाई देगा। बस, ऑटो और स्कूल वाहनों का किराया बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। रोजाना सफर करने वाले लोगों को अब पहले से ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ सकता है। कई शहरों में ऑटो और टैक्सी यूनियन पहले ही किराया बढ़ाने की मांग करने लगी हैं। आम आदमी के लिए यह FuelShock अब हर दिन के खर्च को बढ़ाने वाला साबित हो सकता है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी बताई जा रही है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात के कारण क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। तेल कंपनियों पर लगातार दबाव बढ़ रहा था और घाटे की भरपाई के लिए कंपनियों ने दाम बढ़ाने का फैसला लिया। इसी कारण यह FuelShock अब सीधे जनता तक पहुंच गया है।
भारत अपनी जरूरत का करीब 90 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का असर सीधे देश के पेट्रोल और डीजल के दामों पर पड़ता है। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति भी कीमत तय करने में अहम भूमिका निभाती है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में थोड़ी भी हलचल देश में FuelShock बनकर सामने आती है।
ईंधन की कीमतों में सिर्फ कच्चे तेल का खर्च ही शामिल नहीं होता। इसमें रिफाइनिंग कॉस्ट, तेल कंपनियों का मार्जिन, केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और राज्य सरकारों का वैट भी जुड़ता है। अलग-अलग राज्यों में वैट की दर अलग होने की वजह से हर शहर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें अलग दिखाई देती हैं। यही कारण है कि FuelShock का असर हर राज्य में अलग-अलग स्तर पर महसूस किया जा रहा है।
मार्च 2024 से पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई थीं। लोकसभा चुनाव से पहले सरकार ने जनता को राहत देते हुए ₹2 प्रति लीटर की कटौती भी की थी। उस समय सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कमी कर कीमतों को नियंत्रित रखा था। लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों ने तेल कंपनियों को फिर दाम बढ़ाने पर मजबूर कर दिया है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियों को हर महीने करीब ₹30 हजार करोड़ का नुकसान हो रहा था। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार कंपनियां लगातार घाटे में चल रही थीं और यही वजह है कि FuelShock के रूप में जनता को अब महंगे ईंधन का सामना करना पड़ रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पहले लोगों से पेट्रोल और डीजल का इस्तेमाल संयम से करने की अपील कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि भारत के पास तेल के बड़े भंडार नहीं हैं और देश को आयात पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में पेट्रोलियम उत्पादों का सावधानी से उपयोग करना जरूरी है।
फिलहाल जनता को डर है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल और महंगे हो सकते हैं। इसका सीधा असर आम आदमी की जेब, खेती, ट्रांसपोर्ट और बाजार की कीमतों पर पड़ेगा। देशभर में अब इस FuelShock को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।
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