Bareilly BDA Bulldozer Action: महामंडलेश्वर की कामधेनु गौशाला पर चला बुलडोजर, पुलिस छावनी में बदला इलाका

Bareilly BDA Bulldozer Action के तहत उत्तर प्रदेश के बरेली शहर में मंगलवार को एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई देखने को मिली। प्रेमनगर थाना क्षेत्र के मौलानगर में स्थित कामधेनु गौशाला पर बरेली विकास प्राधिकरण (BDA) ने बुलडोजर चलाते हुए कथित अवैध निर्माण को हटाने की कार्रवाई की। पूरे अभियान के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस, पीएसी, सिविल पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती रही ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।
प्रशासन की इस कार्रवाई को लेकर इलाके में दिनभर हलचल बनी रही। स्थानीय लोगों की मौजूदगी और विरोध की आशंका को देखते हुए पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में रखा गया।
Bareilly BDA Bulldozer Action के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम
ध्वस्तीकरण अभियान शुरू होने से पहले प्रशासन ने इलाके की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी थी। मौके पर पुलिस बल के अलावा पीएसी के जवान भी तैनात किए गए। अधिकारियों ने पहले पूरे क्षेत्र का निरीक्षण किया और उसके बाद बुलडोजर की मदद से कार्रवाई शुरू कराई।
प्रशासन का उद्देश्य था कि कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था पूरी तरह सामान्य बनी रहे और किसी प्रकार की अव्यवस्था उत्पन्न न हो।
कामधेनु गौशाला को लेकर क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, संबंधित कामधेनु गौशाला का संचालन महामंडलेश्वर संजीव गौड़ द्वारा किया जा रहा बताया जाता है।
स्थानीय निवासियों की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई थी कि लगभग 500 वर्गगज सरकारी पार्क भूमि पर निर्माण कर लिया गया है। शिकायतकर्ताओं का कहना था कि जिस स्थान को पार्क के रूप में विकसित किया जाना था, वहां निर्माण होने से बच्चों के खेलने तथा स्थानीय नागरिकों के घूमने-फिरने के लिए उपलब्ध सार्वजनिक स्थान समाप्त हो गया।
इसी शिकायत के आधार पर बरेली विकास प्राधिकरण ने मामले की जांच कराई।
BDA जांच में क्या सामने आया?
बरेली विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित निर्माण को प्राधिकरण के रिकॉर्ड के अनुसार अवैध माना गया।
इसके बाद नियमानुसार नोटिस जारी किए गए और ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। प्रशासन का कहना है कि पूरी कार्रवाई निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए की गई।
24 जुलाई को भी प्रस्तावित थी कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार, इस निर्माण को हटाने की कार्रवाई पहले 24 जुलाई को प्रस्तावित की गई थी।
हालांकि उस दिन किसी कारणवश BDA की टीम मौके तक नहीं पहुंच सकी थी, जिसके चलते अभियान स्थगित कर दिया गया।
इसके बाद नई तारीख तय की गई और मंगलवार को प्रशासन पूरी तैयारी के साथ बुलडोजर एवं सुरक्षा बलों के साथ मौके पर पहुंचा।
विरोध के बीच चला ध्वस्तीकरण अभियान
कार्रवाई शुरू होने के दौरान कुछ लोगों ने इसका विरोध भी किया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मौके पर मौजूद कुछ लोगों और अधिकारियों के बीच तीखी बहस हुई। हालांकि पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं होने दी।
सुरक्षा बलों ने विरोध कर रहे लोगों को निर्धारित दूरी पर रखा और प्रशासन ने निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ध्वस्तीकरण अभियान जारी रखा।
Bareilly BDA Bulldozer Action पर प्रशासन का पक्ष
बरेली विकास प्राधिकरण का कहना है कि यह कार्रवाई न्यायालय एवं प्राधिकरण के आदेशों के अनुरूप की गई है।
अधिकारियों का कहना है कि सरकारी भूमि पर यदि किसी प्रकार का अवैध निर्माण पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाती है और इसी प्रक्रिया के तहत यह अभियान भी चलाया गया।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि पूरे अभियान के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता रही।
स्थानीय लोगों की शिकायत क्या थी?
स्थानीय निवासियों का कहना था कि जिस भूमि पर निर्माण किया गया, वह सार्वजनिक पार्क के लिए निर्धारित थी।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार—
- बच्चों के खेलने की जगह प्रभावित हुई।
- स्थानीय नागरिकों के टहलने का स्थान कम हो गया।
- सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर निर्माण होने से क्षेत्रीय व्यवस्था प्रभावित हुई।
इन्हीं शिकायतों के आधार पर संबंधित विभाग ने जांच प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
भारी पुलिस बल क्यों किया गया तैनात?
प्रशासन को आशंका थी कि ध्वस्तीकरण के दौरान विरोध हो सकता है।
इसी कारण—
- पीएसी
- सिविल पुलिस
- स्थानीय पुलिस
- प्रशासनिक अधिकारी
को पहले से मौके पर तैनात किया गया ताकि किसी भी स्थिति को तुरंत नियंत्रित किया जा सके।
आगे क्या होगा?
प्रशासन की कार्रवाई के बाद अब पूरे मामले पर सभी की नजर बनी हुई है।
यदि किसी पक्ष की ओर से कानूनी चुनौती दी जाती है तो मामला न्यायालय में भी आगे बढ़ सकता है।
फिलहाल BDA का कहना है कि कार्रवाई नियमानुसार पूरी की गई है।
Bareilly BDA Bulldozer Action उत्तर प्रदेश के बरेली में प्रशासन द्वारा की गई एक महत्वपूर्ण कार्रवाई के रूप में सामने आया है। सरकारी भूमि पर कथित अतिक्रमण की शिकायतों के बाद जांच, नोटिस और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के पश्चात ध्वस्तीकरण अभियान चलाया गया। पूरे अभियान के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा और प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए कार्रवाई पूरी की।

