Balod News: 20 साल बाद जिंदा मिली मां, बेटे-बेटी से भावुक मिलन ने भर दीं सबकी आंखें
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Balod News की यह कहानी इंसानियत, उम्मीद और परिवार के अटूट रिश्तों की मिसाल बन गई है। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से सामने आई इस भावुक घटना ने हर किसी को भावुक कर दिया। जिस 70 वर्षीय महिला को परिवार ने करीब दो दशक पहले लापता होने के बाद मृत मान लिया था, वह समाजसेवियों और स्थानीय महिला मंडली के प्रयासों से अपने बेटे-बेटी से दोबारा मिल सकीं।
करीब 20 साल पहले घर से बिछड़ी मां को सामने देखकर बेटे और बेटी की आंखों से आंसू छलक पड़े। वर्षों की जुदाई के बाद हुआ यह मिलन पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
20 साल पहले अचानक घर से चली गई थीं
जानकारी के अनुसार, बेमेतरा जिले के जेवरा गांव निवासी 70 वर्षीय चंद्रप्रभा मानिकपुरी करीब 20 वर्ष पहले किसी कारणवश घर छोड़कर चली गई थीं। उनके अचानक लापता होने के बाद परिवार ने कई वर्षों तक लगातार तलाश की।
महिला के बेटे लखनदास मानिकपुरी ने बताया कि उन्होंने करीब चार से पांच वर्षों तक रिश्तेदारों, परिचितों और आसपास के कई इलाकों में मां की खोज की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। समय बीतने के साथ परिवार ने यह मान लिया कि अब उनकी मां इस दुनिया में नहीं रहीं।
एक फोन कॉल ने बदल दी जिंदगी
करीब दो दशक बाद परिवार को एक अप्रत्याशित फोन कॉल मिला। बालोद निवासी समाजसेवी सुरेश निर्मलकर ने लखनदास से संपर्क कर बताया कि उनकी मां बालोद में हैं।
शुरुआत में परिवार को इस सूचना पर विश्वास नहीं हुआ। लेकिन जब वे बालोद पहुंचे और अपनी मां को सामने देखा, तो वर्षों का इंतजार खत्म हो गया। मां को जीवित देखकर बेटे और बेटी दोनों भावुक हो गए।
Balod News: अस्पताल में इलाज के दौरान शुरू हुई परिवार की तलाश
बताया गया कि कुछ समय पहले चंद्रप्रभा मानिकपुरी की तबीयत खराब होने पर उन्हें बालोद जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
वह दो दिनों तक बेहोश रहीं और डॉक्टरों ने उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा। करीब एक सप्ताह तक इलाज चलने के बाद उनकी तबीयत में सुधार हुआ।
इसी दौरान समाजसेवियों ने यह प्रयास शुरू किया कि महिला के परिवार का पता लगाया जाए, क्योंकि उनके पास कोई मोबाइल नंबर या पहचान संबंधी दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे।
समाजसेवियों ने नहीं छोड़ी उम्मीद
समाजसेवी सुरेश निर्मलकर, एल्डरमैन हितेश्वरी कौशिक और शिव कृपा महिला मानस मंडली ने महिला की पहचान और परिवार तक पहुंचने के लिए लगातार प्रयास किए।
स्थानीय लोगों से जानकारी जुटाई गई, पुराने रिकॉर्ड खंगाले गए और कई स्तरों पर संपर्क करने के बाद महिला के बेटे लखनदास और बेटी सोनी मानिकपुरी का पता लगाया गया।
परिवार से संपर्क होते ही उन्हें सूचना दी गई कि उनकी मां जीवित हैं और बालोद में हैं।
भावुक कर देने वाला मिलन
सूचना मिलने के बाद बेटा और बेटी तुरंत बालोद पहुंचे। वर्षों बाद मां को सामने देखकर दोनों अपने आंसू नहीं रोक सके।
मां ने भी अपने बच्चों को पहचान लिया और पूरे परिवार का भावुक मिलन हुआ। यह दृश्य देखने वाले अस्पताल के कर्मचारी, समाजसेवी और अन्य लोग भी भावुक हो गए।
इसके बाद परिवार अपनी मां को अपने साथ घर ले गया।
दस वर्षों तक की गई निस्वार्थ सेवा
समाजसेवियों के अनुसार, शिव कृपा महिला मानस मंडली पिछले कई वर्षों से चंद्रप्रभा की देखभाल कर रही थी।
मंडली की अध्यक्ष कल्याणी कौशिक सहित अनीता देशमुख, रेखा यादव, गुनीता साहू, सुशीला यादव, निर्मला यादव, यशोदा यादव और गंगा शर्मा ने महिला की सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
समाजसेवियों का कहना है कि मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और इसी भावना के साथ उन्होंने महिला की देखभाल जारी रखी।
परिवार ने जताया आभार
बेटे लखनदास मानिकपुरी ने समाजसेवियों और महिला मंडली का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने लगभग 20 साल पहले अपनी मां को आखिरी बार देखा था। उन्हें कभी उम्मीद नहीं थी कि एक दिन फिर मां से मुलाकात होगी।
उन्होंने कहा कि यदि समाजसेवियों ने प्रयास नहीं किए होते, तो यह मिलन संभव नहीं हो पाता।
पूरे क्षेत्र में हो रही सराहना
इस मानवीय पहल की पूरे बालोद और आसपास के क्षेत्रों में सराहना हो रही है। लोग समाजसेवियों और महिला मंडली के प्रयासों को प्रेरणादायक बता रहे हैं।
यह घटना इस बात का उदाहरण है कि यदि संवेदनशीलता और सेवा की भावना हो, तो वर्षों बाद भी बिछड़े रिश्ते दोबारा मिल सकते हैं।
इंसानियत की मिसाल बनी यह कहानी
Balod News केवल एक समाचार नहीं, बल्कि उम्मीद, परिवार और मानवता की ऐसी कहानी है जिसने हजारों लोगों का दिल छू लिया है।
करीब 20 वर्षों की जुदाई के बाद मां और बच्चों का यह मिलन यह संदेश देता है कि उम्मीद कभी नहीं छोड़नी चाहिए। समाजसेवियों की निस्वार्थ सेवा और मानवीय संवेदनाओं ने एक परिवार को फिर से जोड़ दिया और इस भावुक पल ने हर किसी की आंखें नम कर दीं।

