Andaman Oil Mission: गंगा बेसिन नहीं, अंडमान में छिपा भारत का असली तेल खजाना
UP-बिहार में तेल-गैस मिलने का दावा! ONGC बोला- ये सिर्फ ‘News Hype’
देश में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच उत्तर प्रदेश के बलिया और बिहार के समस्तीपुर में तेल और प्राकृतिक गैस मिलने की खबरों ने खूब सुर्खियां बटोरी हैं। लेकिन ONGC के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इन दावों को तकनीकी तौर पर सिर्फ “न्यूज हाइप” बताया है। उनका कहना है कि असली कहानी गंगा बेसिन में नहीं, बल्कि Andaman Oil Mission में लिखी जा रही है।

देहरादून स्थित Oil and Natural Gas Corporation यानी ONGC मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक गंगा बेसिन में जो गैस फ्लो मिला है, उसका स्तर बेहद छोटा है। स्थानीय स्तर पर 40 हजार क्यूबिक मीटर गैस फ्लो को बड़ी खोज बताया जा रहा है, जबकि ONGC का रोजाना उत्पादन ही करीब 6 से 6.5 करोड़ क्यूबिक मीटर है। इसलिए ONGC इसे बड़ा कमर्शियल प्रोजेक्ट नहीं मान रहा।

अधिकारी ने कहा कि मीडिया में 3000 से 3500 मीटर की ड्रिलिंग को बहुत बड़ा दिखाया जा रहा है, जबकि ONGC दशकों पहले 6000 मीटर तक ड्रिलिंग कर चुकी है। फिलहाल गंगा बेसिन को हाइड्रोकार्बन खोज की तीसरी श्रेणी में रखा गया है। वहीं दूसरी तरफ सरकार का पूरा फोकस अब Andaman Oil Mission पर है।
दरअसल भारत सरकार अंडमान-निकोबार के गहरे समुद्री इलाके में अब तक का सबसे बड़ा तेल और गैस एक्सप्लोरेशन मिशन चला रही है। इस Andaman Oil Mission में एक कुआं खोदने की लागत ही 1100 से 1200 करोड़ रुपए तक पहुंच रही है। सिर्फ ड्रिलिंग रिग का रोजाना किराया करीब 5 करोड़ रुपए बताया जा रहा है।
समुद्र में पहले 500 से 1000 मीटर तक सिर्फ पानी की गहराई होती है। इसके बाद समुद्र तल के नीचे हजारों फीट तक ड्रिलिंग करनी पड़ती है। खराब मौसम होने पर खर्च और जोखिम दोनों कई गुना बढ़ जाते हैं। यही वजह है कि Andaman Oil Mission को भारत का सबसे हाई-रिस्क एनर्जी प्रोजेक्ट माना जा रहा है।
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri के मुताबिक अंडमान द्वीप समूह के पास “श्री विजयपुरम-2” कुएं में प्राकृतिक गैस मिलने की पुष्टि हुई है। शुरुआती परीक्षण में गैस में 87 प्रतिशत मीथेन पाई गई। सरकार ने इस पूरे अभियान को “समुद्र मंथन” नाम दिया है, जो कि Andaman Oil Mission का हिस्सा है।
भारत इस मिशन पर इतना बड़ा दांव इसलिए लगा रहा है क्योंकि देश अपनी जरूरत का 90 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। प्राकृतिक गैस का इंपोर्ट भी करीब 60 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। ऐसे में Andaman Oil Mission भारत को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
हालांकि तेल और गैस की खोज को इंडस्ट्री में “बिग गैंबलिंग” कहा जाता है। कई बार हजारों करोड़ रुपए खर्च करने के बाद भी रिजल्ट नहीं मिलता। अधिकारी के मुताबिक कई निजी कंपनियां भारी जोखिम के डर से पीछे हट चुकी हैं और अब बड़े स्तर की खोज का जिम्मा ONGC के कंधों पर है।
अधिकारी ने उदाहरण देते हुए बताया कि अमेरिकी कंपनी एक्सॉन मोबिल ने दक्षिण अमेरिकी देश गयाना में 58 बार असफल होने के बाद बड़ा तेल भंडार खोजा था। उसी तरह भारत भी Andaman Oil Mission में लंबी रणनीति के साथ निवेश कर रहा है।
इस बीच ONGC विदेशों में भी कई चुनौतियों का सामना कर रही है। ईरान, रूस, सूडान, सीरिया और मोजाम्बिक जैसे देशों में युद्ध, प्रतिबंध और राजनीतिक हालात के कारण कई प्रोजेक्ट प्रभावित हुए हैं। इसके बावजूद भारत का सबसे बड़ा भरोसा अभी भी बॉम्बे हाई पर टिका हुआ है, जहां से देश का सबसे ज्यादा घरेलू तेल उत्पादन होता है।
सरकार पेट्रोल-डीजल पर टैक्स कम क्यों नहीं करती, इस सवाल पर अधिकारी ने कहा कि तेल और गैस की खोज बेहद जोखिम भरा काम है। हजारों करोड़ रुपए के निवेश और भारी रिस्क को संभालने के लिए सरकार को लगातार बड़ा रेवेन्यू चाहिए होता है। इसलिए टैक्स पूरी तरह कम करना आसान नहीं है।
अब सबकी नजर Andaman Oil Mission पर है, क्योंकि अगर यहां बड़ी मात्रा में तेल और गैस मिलती है तो यह भारत की ऊर्जा तस्वीर बदल सकता है और देश की विदेशी तेल पर निर्भरता काफी हद तक कम हो सकती है।
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