131 मीटर लंबी कांवड़ बनी कासगंज में आकर्षण
131 मीटर लंबी कांवड़ कासगंज के सोरों स्थित लहरा गंगाघाट से निकली कांवड़ यात्रा में आकर्षण का सबसे बड़ा केंद्र रही। हनुमान की पूंछ के आकार में तैयार की गई इस विशाल कांवड़ को देखने के लिए रास्ते में जगह-जगह लोगों की भीड़ जुटी।
रविवार सुबह लहरा गंगाघाट पर धार्मिक आस्था और भक्ति का अनोखा नजारा देखने को मिला। फिरोजाबाद जिले के गांव नाऊआ से करीब 40 शिवभक्त गंगाजल लेने के लिए सोरों पहुंचे थे।
गंगा स्नान और पूजा-अर्चना के बाद शिवभक्तों ने कांवड़ में पवित्र गंगाजल भरा। इसके बाद ‘बम भोले’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों के साथ जत्था फिरोजाबाद के लिए रवाना हो गया।
विशाल कांवड़ के साथ भगवान हनुमान, भगवान शिव और जामवंत का स्वरूप धारण किए तीन शिवभक्त भी यात्रा में शामिल हुए। धार्मिक पात्रों के स्वरूप और विशाल कांवड़ ने पूरी यात्रा को खास बना दिया।

हनुमान की पूंछ के आकार में तैयार हुई 131 मीटर लंबी कांवड़
इस कांवड़ यात्रा की सबसे खास बात इसका अनोखा स्वरूप रहा। 131 मीटर लंबी कांवड़ को भगवान हनुमान की पूंछ के आकार में तैयार किया गया था।
विशाल आकार की वजह से इसे संभालकर आगे बढ़ाने के लिए कई शिवभक्त साथ चल रहे थे। कांवड़ जैसे-जैसे आगे बढ़ी, लोगों की नजरें इस पर टिकती गईं।
रास्ते में मौजूद लोगों ने कांवड़ को देखने के लिए कुछ देर रुककर यात्रा का नजारा देखा। कई लोगों ने मोबाइल फोन से इसकी तस्वीरें और वीडियो भी बनाए।
आम कांवड़ यात्राओं से अलग इस विशाल कांवड़ ने स्थानीय लोगों के बीच खास चर्चा बटोरी। शिवभक्त भी इसे लेकर काफी उत्साहित नजर आए।
40 शिवभक्त गंगाजल लेकर फिरोजाबाद रवाना
फिरोजाबाद जिले के गांव नाऊआ से करीब 40 शिवभक्तों का जत्था रविवार तड़के सोरों के लहरा गंगाघाट पहुंचा।
गंगाघाट पर पहुंचने के बाद सभी शिवभक्तों ने गंगा स्नान किया। इसके बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई और कांवड़ में गंगाजल भरा गया।
गंगाजल भरने के बाद सभी शिवभक्त भगवान शिव के जयकारे लगाते हुए अपने गंतव्य की ओर रवाना हुए।
यात्रा के दौरान शिवभक्तों में जबरदस्त उत्साह दिखाई दिया। पूरा रास्ता ‘बम भोले’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंजता रहा।
हनुमान, शिव और जामवंत के स्वरूप ने बढ़ाई शोभा
विशाल कांवड़ के साथ तीन शिवभक्त धार्मिक स्वरूप धारण कर यात्रा में शामिल हुए।
बाॅबी निगुआ भगवान हनुमान के स्वरूप में नजर आए। वहीं नथुनी प्रसाद ने भगवान शिव का स्वरूप धारण किया और उदय जामवंत के रूप में यात्रा में शामिल हुए।
तीनों धार्मिक स्वरूप लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बने रहे। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने उन्हें उत्सुकता के साथ देखा।
विशाल कांवड़ और धार्मिक पात्रों के स्वरूपों ने यात्रा के दृश्य को और भव्य बना दिया। कई स्थानों पर स्थानीय लोग रास्ते में रुककर कांवड़ियों और धार्मिक स्वरूपों को देखते नजर आए।

लहरा गंगाघाट से फिरोजाबाद तक निकली यात्रा
लहरा गंगाघाट से रवाना हुआ शिवभक्तों का जत्था सोरोंजी, प्रहलादपुर, गोराहा, भिटोना और कासगंज होते हुए फिरोजाबाद की ओर बढ़ा।
पूरी यात्रा के दौरान शिवभक्त भगवान शिव के जयकारे लगाते रहे। रास्ते में कई जगह स्थानीय लोगों ने कांवड़ियों का स्वागत किया।
‘बम भोले’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। विशाल कांवड़ की वजह से जहां-जहां से जत्था गुजरा, वहां लोगों की नजरें यात्रा की ओर खिंच गईं।
रास्ते में लोगों ने बनाए फोटो और वीडियो
131 मीटर लंबी कांवड़ को देखने के लिए मार्ग में कई जगह लोग एकत्र हुए।
विशाल कांवड़ को देखकर लोगों में उत्सुकता नजर आई। कई लोगों ने अपने मोबाइल फोन से कांवड़ की तस्वीरें और वीडियो बनाए।
कांवड़ को सुरक्षित तरीके से आगे ले जाने के लिए शिवभक्त आपसी सहयोग से काम करते रहे। विशाल आकार की वजह से कांवड़ को संभालना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन जत्थे के सदस्यों ने मिलकर यात्रा को आगे बढ़ाया।
इस दौरान श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था।
पहली बार लहरा गंगाघाट पहुंचे बाॅबी निगुआ
भगवान हनुमान का स्वरूप धारण करने वाले बाॅबी निगुआ ने बताया कि वह पहली बार सोरों के लहरा गंगाघाट से गंगाजल लेने पहुंचे हैं।
उन्होंने इस यात्रा को अपने लिए विशेष आध्यात्मिक अनुभव बताया। उनके अनुसार भगवान शिव की भक्ति और आस्था के साथ कांवड़ यात्रा में शामिल होना बेहद खास अनुभव है।
विशाल कांवड़ के साथ यात्रा करने को लेकर सभी शिवभक्तों में उत्साह था। धार्मिक स्वरूप धारण करने वाले शिवभक्त भी पूरे भक्तिभाव के साथ जत्थे के साथ आगे बढ़े।
शिवभक्तों के लिए कांवड़ यात्रा आस्था और समर्पण का प्रतीक
यात्रा में शामिल शिवभक्तों के अनुसार कांवड़ यात्रा केवल गंगाजल ले जाने का माध्यम नहीं है। यह भगवान शिव के प्रति आस्था, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है।
इसी भावना के साथ शिवभक्त अनुशासनपूर्वक आगे बढ़ते रहे। विशाल कांवड़ को सुरक्षित रखने और उसे आगे ले जाने के लिए सभी ने एक-दूसरे का सहयोग किया।
यात्रा के दौरान जयकारों और भक्ति गीतों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
जयकारों से गूंजता रहा कांवड़ यात्रा का मार्ग
लहरा गंगाघाट से फिरोजाबाद की ओर बढ़ते जत्थे के साथ लगातार ‘बम भोले’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे सुनाई देते रहे।
कई स्थानों पर स्थानीय लोगों ने कांवड़ियों का स्वागत किया और उनकी यात्रा के प्रति श्रद्धा जताई।
131 मीटर लंबी कांवड़, धार्मिक स्वरूपों में सजे शिवभक्त और लगातार गूंजते जयकारों ने इस यात्रा को सामान्य कांवड़ यात्रा से अलग बना दिया।
आस्था के साथ दिखा अनोखा प्रयोग
इस कांवड़ यात्रा में धार्मिक आस्था के साथ रचनात्मकता का भी अनोखा संगम देखने को मिला। हनुमान की पूंछ के आकार में तैयार की गई विशाल कांवड़ ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा।
कांवड़ के साथ हनुमान, शिव और जामवंत के स्वरूपों का शामिल होना भी यात्रा को विशेष बना रहा।
लहरा गंगाघाट से शुरू हुई यह यात्रा क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी रही। राहगीरों से लेकर स्थानीय लोगों तक ने कुछ पल रुककर इस अनोखी कांवड़ यात्रा को देखा।
Table of Contents
- 131 मीटर लंबी कांवड़ बनी आकर्षण
- हनुमान की पूंछ के आकार में तैयार कांवड़
- 40 शिवभक्त गंगाजल लेकर रवाना
- हनुमान, शिव और जामवंत के स्वरूप
- लहरा गंगाघाट से फिरोजाबाद तक यात्रा
- रास्ते में उमड़ी लोगों की भीड़
- पहली बार लहरा घाट पहुंचे बाॅबी निगुआ
- कांवड़ यात्रा आस्था और समर्पण का प्रतीक
- जयकारों से गूंजता रहा मार्ग
- आस्था और अनोखे प्रयोग का संगम
निष्कर्ष
कासगंज के सोरों स्थित लहरा गंगाघाट से निकली 131 मीटर लंबी कांवड़ ने इस कांवड़ यात्रा को खास बना दिया। हनुमान की पूंछ के आकार की विशाल कांवड़ के साथ 40 शिवभक्त गंगाजल लेकर फिरोजाबाद की ओर रवाना हुए।
यात्रा में भगवान हनुमान, भगवान शिव और जामवंत के स्वरूप भी आकर्षण का केंद्र रहे। रास्ते में लोगों की भीड़, मोबाइल कैमरों में कैद होते दृश्य और ‘बम भोले’ के जयकारों ने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया।
यह यात्रा शिवभक्तों की आस्था, समर्पण और धार्मिक उत्साह का अनोखा उदाहरण बनकर सामने आई।
Wacth More:- https://youtu.be/jVQ-CCQ8XlI

