होर्मुज पर ईरान की नई चाल, जहाजों से वसूलेगा फीस! अमेरिका बोला- मंजूर नहीं
ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान की नई बनाई गई “पर्सियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (PGSA)” ने होर्मुज स्ट्रेट के लिए “मैनेजमेंट सुपरविजन एरिया” तय कर दिया है। इस क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों को अब परमिट लेने की आवश्यकता पड़ सकती है।
ईरान की नई चाल से बढ़ा वैश्विक तनाव! होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर फीस वसूलने की तैयारी,अमेरिका का कड़ा विरोध

सूत्रों के मुताबिक ईरान सीधे टोल टैक्स लगाने के बजाय “सर्विस फीस मॉडल” पर काम कर रहा है। इसके तहत जहाजों से ट्रांजिट फीस, पर्यावरण शुल्क और अन्य समुद्री सेवाओं के नाम पर वसूली की जा सकती है। दो ईरानी अधिकारियों ने दावा किया कि ओमान भी इस प्रस्ताव में आर्थिक फायदे देख रहा है और संभावित साझेदारी पर चर्चा कर रहा है।
दरअसल, फरवरी में
अमेरिकी और इजराइली हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल ट्रैफिक लगभग रोक दिया था।
इससे वैश्विक शिपिंग और ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर पड़ा था। इसके बाद तेहरान ने इस रणनीतिक समुद्री रास्ते से राजस्व कमाने के विकल्पों पर काम शुरू किया।
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में गिना जाता है। दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत समुद्री तेल और प्राकृतिक गैस सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव, शुल्क या प्रतिबंध सीधे वैश्विक ऊर्जा कीमतों और तेल बाजार को प्रभावित कर सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डो
नाल्ड ट्रम्प ने इस प्रस्ताव पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। ट्रम्प ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री जलमार्ग है और यहां किसी भी तरह का टोल सिस्टम स्वीकार नहीं किया जाएगा। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ईरान जहाजों से फीस वसूलता है, तो अमेरिका और ईरान के बीच किसी संभावित समझौते की राह मुश्किल हो जाएगी।
इसी बीच ईरान ने अपने हाईली एनरिच्ड यूरेनियम को विदेश नहीं भेजने का फैसला लेकर तनाव और बढ़ा दिया है। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मुजतबा खामेनेई ने आदेश दिया है कि समृद्ध यूरेनियम देश के बाहर नहीं भेजा जाएगा। यह फैसला अमेरिका की उस मांग के खिलाफ है, जिसमें ईरान से उसका यूरेनियम स्टॉक बाहर भेजने को कहा गया था।
रॉयटर्स के मुताबिक ईरानी नेतृत्व को डर है कि अगर यूरेनियम विदेश भेजा गया तो भविष्य में अमेरिका और इजराइल के संभावित हमलों के खिलाफ ईरान कमजोर हो सकता है। इसलिए तेहरान अब अपने परमाणु संसाधनों को देश के भीतर ही सुरक्षित रखने पर जोर दे रहा है।
वहीं दूसरी तरफ अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर दी हैं। अरब सागर में तैनात USS अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर से अमेरिकी फाइटर जेट्स ने उड़ान भरी है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि उसकी फोर्सेस हाई ऑपरेशनल रेडीनेस पर हैं और क्षेत्र में किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं।
तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमतें 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। वैश्विक बाजार में आशंका बढ़ गई है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट में स्थिति और बिगड़ी तो तेल सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है। इससे दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल और ऊर्जा कीमतों में और तेजी आ सकती है।
मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। ईरान अब दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर फीस वसूली की तैयारी कर रहा है। इस मुद्दे पर ईरान और ओमान के बीच बातचीत जारी है, जबकि अमेरिका ने साफ कहा है कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर किसी तरह का टोल या नियंत्रण स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस घटनाक्रम ने वैश्विक तेल बाजार, शिपिंग सेक्टर और पश्चिम एशिया की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है
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ईरान होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर फीस वसूली की तैयारी में
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ओमान के साथ संभावित आर्थिक साझेदारी पर चर्चा
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अमेरिका ने टोल सिस्टम का कड़ा विरोध किया
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दुनिया की 20% तेल सप्लाई होर्मुज स्ट्रेट से गुजरती है
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ईरान ने यूरेनियम विदेश भेजने से इनकार किया
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अमेरिकी सैन्य गतिविधियां तेज, तेल बाजार में उथल-पुथल
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होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की नई रणनीति”
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“होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की नई रणनीति से तेल बाजार में हलचल”
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“होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की नई रणनीति पर अमेरिका नाराज”
होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की नई रणनीति ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। ईरान अब इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर फीस वसूली की तैयारी कर रहा है, जिसको लेकर अमेरिका ने कड़ा विरोध जताया है।हालांकि फिलहाल युद्धविराम और बातचीत की कोशिशें जारी हैं, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट, यूरेनियम विवाद और बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने साफ कर दिया है कि पश्चिम एशिया में हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। अगर ईरान अपने फैसलों पर आगे बढ़ता है और अमेरिका-इजराइल का दबाव जारी रहता है, तो इसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, तेल बाजार और वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में दुनिया की नजरें अब होर्मुज स्ट्रेट और ईरान-अमेरिका वार्ता पर टिकी रहेंगी
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