हरिद्वार से चित्तौड़ा कांवड़ यात्रा: 11 अगस्त को होगा गंगाजल से शिवाभिषेक, शिवभक्तों की अनोखी आस्था
हरिद्वार से चित्तौड़ा कांवड़ यात्रा सावन माह में श्रद्धा और भक्ति का अनूठा उदाहरण बन गई है। तीन शिवभक्त पैदल हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर चित्तौड़ा पहुंचेंगे, जहां 11 अगस्त को भगवान शिव का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक किया जाएगा।
हरिद्वार से चित्तौड़ा कांवड़ यात्रा: 11 अगस्त को होगा गंगाजल से शिवाभिषेक
हरिद्वार से चित्तौड़ा कांवड़ यात्रा सावन माह में शिवभक्ति, आस्था और सनातन परंपरा का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई है। हरिद्वार से शुरू हुई इस पवित्र पदयात्रा में तीन शिवभक्त मां गंगा का पवित्र जल लेकर पैदल चित्तौड़ा के लिए रवाना हुए हैं। यात्रा का समापन 11 अगस्त को होगा, जब भगवान शिव का पवित्र गंगाजल से विशेष रुद्राभिषेक और जलाभिषेक किया जाएगा।
सावन के पवित्र महीने में देशभर से लाखों श्रद्धालु कांवड़ यात्रा करते हैं। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए चित्तौड़ा के श्रद्धालुओं ने भी हरिद्वार से गंगाजल लाकर भोलेनाथ का अभिषेक करने का संकल्प लिया है। श्रद्धालुओं का कहना है कि यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि अनुशासन, सेवा, संयम और आध्यात्मिक साधना का भी प्रतीक है।

हरिद्वार में गंगा पूजन के साथ शुरू हुई यात्रा
हरिद्वार से चित्तौड़ा कांवड़ यात्रा की शुरुआत विधिवत गंगा पूजन के साथ हुई। शिवभक्त शंकर लाल नारनोलिया, बलवीर सिंह नरूका और शिवराज बुनकर ने मां गंगा की पूजा-अर्चना कर कांवड़ उठाई और “हर-हर महादेव” के जयघोष के साथ अपनी पैदल यात्रा प्रारंभ की।
यात्रा के दौरान तीनों श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और अनुशासन के साथ निर्धारित नियमों का पालन करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। रास्ते में विभिन्न धार्मिक स्थलों पर रुककर भगवान शिव की आराधना, भजन-कीर्तन और शिव स्तुति का आयोजन भी किया जा रहा है।

11 अगस्त को होगा भव्य स्वागत
कांवड़ यात्रियों के 11 अगस्त को चित्तौड़ा पहुंचने की संभावना है। गांव में उनके स्वागत की तैयारियां पहले से ही शुरू हो चुकी हैं। स्थानीय ग्रामीण और शिवभक्त यात्रा के समापन को लेकर उत्साहित हैं और भव्य स्वागत समारोह की योजना बनाई जा रही है।
सामाजिक कार्यकर्ता मुकेश प्रजापति ने बताया कि गांव पहुंचने पर कांवड़ यात्रियों का पुष्प वर्षा और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ स्वागत किया जाएगा। इसके बाद शिव मंदिर में मां गंगा के पवित्र जल से भगवान भोलेनाथ का विशेष रुद्राभिषेक और जलाभिषेक होगा।
सावन में गंगाजल से शिवाभिषेक का विशेष महत्व
हिंदू धर्म में सावन मास भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र समय माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस माह गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करने से सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसी कारण हर वर्ष लाखों श्रद्धालु हरिद्वार, गंगोत्री और अन्य तीर्थस्थलों से गंगाजल लेकर अपने-अपने क्षेत्रों के शिवालयों में जलाभिषेक करते हैं।
हरिद्वार से चित्तौड़ा कांवड़ यात्रा भी इसी धार्मिक परंपरा का हिस्सा है, जो लोगों को आस्था, सेवा, भाईचारे और सामाजिक एकता का संदेश देती है।

सनातन संस्कृति को मजबूत कर रही कांवड़ यात्रा
श्रद्धालुओं का कहना है कि इस प्रकार की यात्राएं नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से जोड़ने का कार्य करती हैं। यात्रा के दौरान अनुशासन, संयम, सेवा और सामूहिक सहयोग की भावना देखने को मिलती है। यही कारण है कि हर वर्ष इस कांवड़ यात्रा में लोगों की भागीदारी बढ़ती जा रही है।
आयोजकों ने विश्वास जताया कि भगवान भोलेनाथ की कृपा से यात्रा सफलतापूर्वक संपन्न होगी और यह पूरे क्षेत्र में धार्मिक आस्था, सामाजिक सद्भाव और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश फैलाएगी। ग्रामीणों ने भी सभी श्रद्धालुओं से यात्रा के दौरान सहयोग और सुरक्षित यात्रा की कामना की है।
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