सोना-चांदी हुआ सस्ता, 10 दिनों में चांदी 27 हजार और सोना 8 हजार रुपए टूटा, मिडिल ईस्ट तनाव का असर
मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सोना और चांदी के दामों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। निवेशकों के बदलते रुझान और बाजार में बढ़ती सतर्कता का असर कीमती धातुओं की कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है। मंगलवार, 10 जून को सोना और चांदी दोनों की कीमतों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई, जिससे निवेशकों और खरीदारों के बीच नई चर्चा शुरू हो गई है।
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 24 कैरेट 10 ग्राम सोने की कीमत में 4,090 रुपए की गिरावट दर्ज की गई है। इसके बाद सोने का भाव घटकर लगभग 1.48 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं चांदी की कीमत में और भी बड़ी गिरावट देखने को मिली। एक किलो चांदी का भाव 9,658 रुपए टूटकर 2.36 लाख रुपए प्रति किलो रह गया।

विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में सोना और चांदी दोनों में लगातार दबाव देखने को मिल रहा है। आंकड़े बताते हैं कि 31 मई को चांदी की कीमत लगभग 2.63 लाख रुपए प्रति किलो थी। यानी महज 10 दिनों के भीतर चांदी करीब 27 हजार रुपए तक सस्ती हो चुकी है। इसी अवधि में सोने की कीमत में भी लगभग 8 हजार रुपए की गिरावट दर्ज की गई है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक स्तर पर पैदा हो रही अनिश्चितता के कारण निवेशकों का व्यवहार बदल रहा है। आमतौर पर संकट के समय सोने को सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में कई निवेशक बाजार से पैसा निकालकर नकदी अपने पास रखना ज्यादा सुरक्षित समझ रहे हैं। यही वजह है कि कीमती धातुओं में बिकवाली का दबाव बढ़ा है।
विश्लेषकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में निवेशकों की रणनीति में बदलाव के कारण भी सोना और चांदी प्रभावित हुए हैं। कई बड़े निवेशक फिलहाल जोखिम कम करने की नीति अपना रहे हैं। इसके चलते वे विभिन्न निवेश साधनों से पूंजी निकालकर नकदी स्थिति मजबूत कर रहे हैं। इसका सीधा असर कमोडिटी बाजार पर देखने को मिल रहा है।
ज्वेलरी कारोबारियों का मानना है कि कीमतों में आई गिरावट से घरेलू बाजार में खरीदारी बढ़ सकती है। खासकर शादी-विवाह और आगामी त्योहारों के सीजन को देखते हुए ग्राहक इस अवसर का लाभ उठा सकते हैं। सोना और चांदी सस्ते होने से आभूषण बाजार में मांग बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि विशेषज्ञ निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि वैश्विक घटनाक्रम तेजी से बदल रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का सीधा असर कीमती धातुओं के बाजार पर पड़ सकता है। ऐसे में निवेश से पहले बाजार की दिशा और आर्थिक संकेतकों पर नजर रखना जरूरी है।
वित्तीय जानकारों के अनुसार, यदि मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ता है या वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में कोई बड़ा बदलाव आता है तो सोना और चांदी फिर से तेजी पकड़ सकते हैं। वहीं यदि निवेशकों का नकदी की ओर झुकाव जारी रहता है तो कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।
फिलहाल बाजार में सबसे बड़ी चर्चा इसी बात को लेकर है कि पिछले 10 दिनों में चांदी करीब 27 हजार रुपए और सोना लगभग 8 हजार रुपए तक सस्ता हो चुका है। ऐसे में आम उपभोक्ताओं, निवेशकों और ज्वेलरी कारोबारियों की नजर आने वाले दिनों में सोना-चांदी की कीमतों की दिशा पर टिकी हुई है। आने वाले सप्ताह बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

