जयपुर हवेली खजाना कांड में बड़ा खुलासा, जंगल में दबाई 66 किलो से ज्यादा चांदी बरामद
जयपुर हवेली खजाना कांड में पुलिस ने करीब 10 महीने बाद बड़ा खुलासा किया है। माणक चौक थाना पुलिस और डीएसटी नॉर्थ की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर 66.400 किलोग्राम चांदी बरामद की है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब पौने दो करोड़ रुपये बताई जा रही है।
पुलिस के मुताबिक, यह मामला जयपुर के परकोटा क्षेत्र में स्थित एक पुरानी हवेली को तोड़ने के दौरान सामने आए कथित गुप्त खजाने से जुड़ा है। आरोप है कि हवेली को गिराने और निर्माण कार्य से जुड़े लोगों को वहां पुराने सिक्के और कीमती धातुएं मिली थीं। इसके बाद कथित तौर पर उन्होंने इसकी जानकारी हवेली मालिक को देने के बजाय कीमती सामान आपस में बांट लिया।
Table of Contents
- क्या है जयपुर हवेली खजाना कांड?
- हवेली तोड़ने के दौरान मिला था खजाना
- 10 महीने बाद पुलिस को कैसे मिला सुराग?
- जंगल में छिपाई गई थी 66.400 किलो चांदी
- सोने के सिक्कों की तलाश जारी
- मामले में आगे क्या होगा?
क्या है जयपुर हवेली खजाना कांड?
जयपुर हवेली खजाना कांड की शुरुआत त्रिपोलिया बाजार क्षेत्र में स्थित एक पुरानी हवेली को गिराने के दौरान हुई। पुलिस के अनुसार, मकान संख्या 630 के मालिक ने पुराने भवन को हटाकर नया निर्माण कराने के लिए एक फर्म से संपर्क किया था।
हवेली को गिराने का काम ठेकेदार महेश मल्होत्रा उर्फ छोटू खटीक को दिया गया था। बताया गया है कि निर्माण कार्य शुरू होने से पहले हवेली मालिक ने ठेकेदार को निर्देश दिए थे कि खुदाई या तोड़फोड़ के दौरान यदि कोई पुरानी धातु, सिक्के या अन्य कीमती वस्तु मिलती है तो इसकी जानकारी तुरंत दी जाए।
पुलिस के अनुसार, हवेली तोड़ते समय कुछ पुराने कीमती सामान मिलने के बाद कथित तौर पर इसकी सूचना मालिक को नहीं दी गई। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने इस सामान को अपने बीच बांट लिया था।
मामले में हवेली मालिक की ओर से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत के अनुसार, हवेली से बड़ी संख्या में पुराने चांदी के सिक्के, चांदी की सिल्लियां और सोने के सिक्के मिलने का दावा किया गया था।

हवेली तोड़ने के दौरान मिला था खजाना
पुलिस को दी गई शिकायत में हवेली मालिक ने बताया था कि कथित खजाने में बड़ी संख्या में पुरानी चांदी की सिल्लियां मौजूद थीं। प्रत्येक चांदी की सिल्लियों का वजन काफी अधिक बताया गया।
इसके अलावा पुराने चांदी के हजारों सिक्के और सोने के सिक्के मिलने का भी दावा किया गया। पुलिस की जांच अब इसी बात पर केंद्रित है कि कथित तौर पर मिले कुल खजाने में से कितना सामान आरोपियों ने अपने पास रखा और कितना अन्य लोगों तक पहुंचा।
मामले में मुख्य आरोपी के साथ उसके कुछ साथियों के नाम सामने आए हैं। पुलिस ने जांच के बाद पांच लोगों को गिरफ्तार किया है।
10 महीने बाद पुलिस को कैसे मिला सुराग?
इस मामले की सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि शिकायत घटना के काफी समय बाद सामने आई। करीब 10 महीने का अंतराल बीत चुका था। इस दौरान पुरानी हवेली को पूरी तरह गिराया जा चुका था और वहां नए निर्माण का काम भी शुरू हो गया था।
ऐसे में पुलिस के सामने मौके से सीधे सबूत जुटाने की चुनौती थी। पुरानी इमारत के जमींदोज होने के कारण घटनास्थल की पहले जैसी स्थिति भी नहीं बची थी।
पुलिस ने मामले से जुड़े लोगों की गतिविधियों की जांच शुरू की। इसी दौरान मुख्य आरोपी के रहन-सहन और आर्थिक स्थिति में अचानक आए बदलाव ने जांचकर्ताओं का ध्यान खींचा।
पुलिस के अनुसार, आरोपी पहले मजदूरी और ठेकेदारी से जुड़ा काम करता था। बाद में उसने महंगी मशीनरी और वाहन खरीदे। उसके खर्च करने के तौर-तरीकों में भी बदलाव देखा गया।
इन्हीं परिस्थितियों के आधार पर पुलिस ने संदिग्धों पर नजर रखी और तकनीकी जांच के साथ पूछताछ को आगे बढ़ाया।
अचानक बदली आर्थिक स्थिति से बढ़ा पुलिस का शक
जांच के दौरान पुलिस को कथित तौर पर पता चला कि मुख्य आरोपी की आर्थिक स्थिति में अचानक बदलाव आया था। पहले सामान्य मजदूरी और ठेकेदारी करने वाले आरोपी ने जेसीबी और ट्रैक्टर जैसी मशीनें खरीद ली थीं।
पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इन वाहनों की खरीद में इस्तेमाल रकम का संबंध हवेली से मिले कथित खजाने से था या नहीं।
आरोपियों के खर्च और गतिविधियों से जुड़े इन सुरागों को जोड़ते हुए पुलिस ने पूछताछ की। इसके बाद कथित तौर पर चांदी को छिपाने की जानकारी सामने आई।
जंगल में छिपाई गई थी 66.400 किलो चांदी
जयपुर हवेली खजाना कांड में पुलिस को सबसे बड़ी सफलता तब मिली, जब आरोपियों की निशानदेही पर जामडोली के पास जंगल से चांदी बरामद की गई।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने चांदी की सिल्लियों को खुले बाजार में तुरंत बेचने के बजाय जमीन के अंदर छिपाने की योजना बनाई थी। इसके लिए जंगल में एक स्थान पर मिट्टी खोदकर चांदी को दबाया गया।
आरोपियों ने कथित तौर पर उस जगह की पहचान के लिए एक लकड़ी का निशान भी लगाया था। पुलिस ने इसी निशान और आरोपियों की निशानदेही के आधार पर तलाशी अभियान चलाया।
कार्रवाई के दौरान 66.400 किलोग्राम चांदी बरामद हुई। इसकी कीमत करीब पौने दो करोड़ रुपये आंकी गई है।
यह बरामदगी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि घटना के कई महीने बाद भी कथित तौर पर इतनी बड़ी मात्रा में चांदी को सुरक्षित तरीके से छिपाकर रखा गया था।
सोने के सिक्कों और पुराने चांदी के सिक्कों की तलाश जारी
पुलिस की कार्रवाई फिलहाल सिर्फ चांदी की बरामदगी तक सीमित नहीं है। पूछताछ में कथित तौर पर सोने के सिक्कों और पुराने चांदी के सिक्कों से जुड़ी जानकारी भी सामने आई है।
शिकायत में बड़ी संख्या में पुराने चांदी के सिक्कों और सोने के सिक्कों का जिक्र किया गया था। ऐसे में पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बाकी सामान कहां गया।
जांच अधिकारी आरोपियों से अलग-अलग और आमने-सामने पूछताछ कर रहे हैं। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित खजाने को कितने लोगों के बीच बांटा गया था और क्या इसमें अन्य व्यक्ति भी शामिल हैं।
परकोटा क्षेत्र की दूसरी हवेलियों की भी जांच
मामले की जांच अब अन्य संभावित हवेलियों तक भी पहुंच गई है। पुलिस मुख्य आरोपी द्वारा परकोटा क्षेत्र में पहले किए गए तोड़फोड़ और निर्माण से जुड़े कामों की जानकारी जुटा रही है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या आरोपी इससे पहले भी किसी पुरानी हवेली या भवन में इसी तरह के काम से जुड़ा था।
अगर जांच के दौरान ऐसे मामलों में कोई समानता सामने आती है तो पुलिस आगे की कार्रवाई कर सकती है।
पांच आरोपी पुलिस की गिरफ्त में
पुलिस ने मामले में मुख्य आरोपी महेश मल्होत्रा उर्फ छोटू खटीक समेत कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ जारी है। बरामद चांदी के स्रोत, कथित खजाने में शामिल अन्य सामान और उसकी हिस्सेदारी को लेकर भी जांच की जा रही है।
जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि कथित तौर पर मिले सोने के सिक्कों और हजारों पुराने चांदी के सिक्कों का क्या हुआ।
जयपुर हवेली खजाना कांड में अब आगे क्या?
जयपुर हवेली खजाना कांड में चांदी की बरामदगी के बाद पुलिस के सामने अब कई अहम सवाल हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि हवेली से कथित तौर पर मिला पूरा खजाना आखिर कितना था और उसमें से कितना सामान बरामद किया जा चुका है।
पुलिस सोने के सिक्कों और बाकी पुराने सिक्कों की तलाश कर रही है। साथ ही आरोपियों की आर्थिक गतिविधियों और संपत्तियों की भी जांच की जा रही है।
पुलिस के अनुसार, जांच आगे बढ़ने पर इस मामले में और बरामदगी या नए नाम सामने आ सकते हैं।

निष्कर्ष
करीब 10 महीने पुराने जयपुर हवेली खजाना कांड में 66.400 किलो चांदी की बरामदगी ने पूरे मामले को फिर चर्चा में ला दिया है। पुरानी हवेली से कथित तौर पर मिले कीमती सामान को छिपाने के आरोप में पांच लोगों की गिरफ्तारी हुई है।
जंगल में जमीन के अंदर दबाई गई चांदी तक पुलिस का पहुंचना इस केस की सबसे अहम कड़ी मानी जा रही है। अब पुलिस की जांच इस बात पर टिकी है कि कथित खजाने में शामिल बाकी सोने और चांदी के सिक्के कहां हैं और इस पूरे मामले में कितने लोग शामिल थे।
नोट: इस खबर में खजाने, आरोप और बरामदगी से संबंधित बातें पुलिस जांच और उपलब्ध शिकायत/जांच विवरण के आधार पर प्रस्तुत की गई हैं। अंतिम तथ्य न्यायिक प्रक्रिया और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेंगे।
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