राजस्थान में बढ़ी गोडावण की संख्या, जैसलमेर ब्रीडिंग सेंटर में तीन नए शावकों का जन्म
जयपुर/जैसलमेर। राजस्थान के लिए एक बेहद सुखद और गौरवपूर्ण खबर सामने आई है। राज्य पक्षी गोडावण (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) के संरक्षण और संवर्धन के प्रयासों को बड़ी सफलता मिली है। जैसलमेर स्थित गोडावण संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र में तीन नए गोडावण शावकों का जन्म हुआ है, जिसके बाद इस दुर्लभ पक्षी की कुल संख्या बढ़कर 94 हो गई है। वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
गोडावण दुनिया के सबसे दुर्लभ और संकटग्रस्त पक्षियों में से एक है। राजस्थान विशेष रूप से जैसलमेर और आसपास के मरुस्थलीय क्षेत्रों को इसका प्रमुख प्राकृतिक आवास माना जाता है। पिछले कुछ दशकों में आवासीय क्षेत्रों में कमी, बिजली लाइनों से टकराव और अन्य मानवीय गतिविधियों के कारण इसकी संख्या में लगातार गिरावट आई थी। इसी खतरे को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार ने इसके संरक्षण के लिए विशेष अभियान शुरू किया था।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार हाल ही में जन्मे तीन गोडावण शावकों में से दो का जन्म कृत्रिम गर्भाधान (आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन) तकनीक के माध्यम से प्राप्त अंडों से हुआ है। वहीं तीसरे शावक का जन्म जंगल से सुरक्षित रूप से लाए गए एक अंडे से हुआ है। यह उपलब्धि वैज्ञानिकों और वन्यजीव विशेषज्ञों के लंबे प्रयासों का परिणाम मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कृत्रिम गर्भाधान तकनीक का सफल उपयोग गोडावण संरक्षण कार्यक्रम के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है। इस तकनीक की मदद से दुर्लभ पक्षियों की संख्या बढ़ाने और उनकी प्रजाति को संरक्षित करने में मदद मिल रही है। जैसलमेर स्थित संरक्षण केंद्र में वैज्ञानिक आधुनिक तकनीकों के माध्यम से गोडावण के प्रजनन और पालन-पोषण पर लगातार कार्य कर रहे हैं।
गौरतलब है कि वर्ष 2018 में गोडावण संरक्षण के लिए विशेष प्रजनन कार्यक्रम की शुरुआत की गई थी। उस समय इस पक्षी की संख्या चिंताजनक स्तर तक पहुंच गई थी। इसके बाद केंद्र सरकार, राज्य सरकार, वन विभाग और विभिन्न संरक्षण संस्थाओं ने मिलकर इसके संरक्षण के लिए व्यापक अभियान चलाया। इसी अभियान के तहत अंडों को सुरक्षित वातावरण में विकसित करने और नवजात शावकों की विशेष देखभाल की व्यवस्था की गई।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान में गोडावण का प्रजनन सीजन जारी है। ऐसे में आने वाले महीनों में और भी नए शावकों के जन्म की संभावना जताई जा रही है। यदि संरक्षण कार्यक्रम इसी प्रकार सफल रहता है तो आने वाले वर्षों में गोडावण की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल सकती है।
पक्षियों की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए सरकार कई महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इसी क्रम में जैसलमेर के रामदेवरा क्षेत्र में 6.25 करोड़ रुपए की लागत से 64 मीटर लंबी विशेष सुरंग का निर्माण किया जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य गोडावण और अन्य वन्यजीवों को सुरक्षित आवागमन का मार्ग उपलब्ध कराना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की संरचनाएं वन्यजीव संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस उपलब्धि पर खुशी व्यक्त करते हुए वैज्ञानिकों, वन विभाग और संरक्षण कार्यों से जुड़े सभी लोगों को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि गोडावण भारत की प्राकृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसके संरक्षण के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरणविदों ने भी इस सफलता का स्वागत किया है। उनका मानना है कि यदि इसी प्रकार वैज्ञानिक प्रयास, सरकारी सहयोग और जनजागरूकता जारी रही तो आने वाले समय में गोडावण को विलुप्त होने के खतरे से बचाया जा सकेगा और राजस्थान की यह अनमोल धरोहर फिर से मरुस्थल की पहचान बन सकेगी।

