मदन राठौड़ फर्जी लेटर पैड: BJP प्रदेशाध्यक्ष के नाम से जाली पत्र भेजकर SDM पर दबाव बनाने की कोशिश, आरोपी गिरफ्तार

मदन राठौड़ फर्जी लेटर पैड मामला राजस्थान के सिरोही जिले से सामने आया है, जिसने प्रशासन और पुलिस दोनों को सतर्क कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राजस्थान प्रदेशाध्यक्ष और राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ के नाम से कथित तौर पर फर्जी लेटर पैड तैयार कर उपखंड अधिकारी (SDM) को एक पत्र भेजा गया। जांच में सामने आया कि पत्र पर किए गए हस्ताक्षर और लेटर पैड दोनों ही जाली थे। मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
मदन राठौड़ फर्जी लेटर पैड से SDM को भेजा गया पत्र
जानकारी के अनुसार सिरोही जिले की पिंडवाड़ा तहसील में स्थित एक दुकान के खिलाफ कार्रवाई करवाने के उद्देश्य से मदन राठौड़ फर्जी लेटर पैड का इस्तेमाल किया गया। कथित पत्र में स्वरूपगंज क्षेत्र के गरबा चौक मुख्य बाजार का उल्लेख करते हुए राजकीय माध्यमिक विद्यालय के सामने संचालित ‘अम्बिका मोजरी एंड चप्पल’ नामक दुकान को अतिक्रमण बताया गया और SDM से उसे हटाने की सिफारिश की गई।
बाद में पत्र की सत्यता की जांच की गई तो पता चला कि यह किसी भी आधिकारिक कार्यालय से जारी नहीं किया गया था।
व्हाट्सएप के जरिए भेजा गया था फर्जी दस्तावेज
पुलिस जांच में सामने आया कि 21 जुलाई 2026 को एक मोबाइल नंबर से व्हाट्सएप के माध्यम से यह कथित पत्र पिंडवाड़ा SDM को भेजा गया। दस्तावेज़ पीडीएफ/इमेज फॉर्मेट में साझा किया गया था ताकि वह आधिकारिक प्रतीत हो।
जब संबंधित कार्यालय से पुष्टि की गई तो साफ हो गया कि सांसद मदन राठौड़ के जयपुर या दिल्ली स्थित किसी भी कार्यालय से ऐसा कोई पत्र जारी नहीं हुआ था। साथ ही लेटर पैड की डिजाइन और हस्ताक्षर भी असली रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते थे।
मदन राठौड़ फर्जी लेटर पैड मामले में निजी सचिव ने दर्ज कराई शिकायत
घटना की जानकारी मिलते ही भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के निजी सचिव प्रभु दयाल यादव ने सिरोही पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत भेजी।
शिकायत में कहा गया कि किसी जनप्रतिनिधि के नाम, लेटर पैड और हस्ताक्षर का दुरुपयोग कर प्रशासनिक अधिकारियों को गुमराह करना गंभीर अपराध है। उन्होंने फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की।
पुलिस जांच में आरोपी तक कैसे पहुंची?
शिकायत मिलने के बाद सिरोही पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की। जांच के दौरान व्हाट्सएप नंबर की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया।
इन्हीं तकनीकी जानकारियों के आधार पर पुलिस संदिग्ध तक पहुंची और पूछताछ के बाद कथित आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे मामले में कोई और व्यक्ति शामिल था या नहीं।
क्या थी पूरी साजिश?
प्रारंभिक जांच के अनुसार फर्जी पत्र का उद्देश्य एक विशेष दुकान के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई करवाना था। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इसके पीछे निजी रंजिश, व्यापारिक प्रतिस्पर्धा या किसी अन्य प्रकार का दबाव बनाने की मंशा थी।
अधिकारियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासनिक व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी सांसद और राजनीतिक दल के प्रदेशाध्यक्ष के नाम से फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी अधिकारियों को भेजना प्रशासनिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
यदि समय रहते इस फर्जीवाड़े का खुलासा नहीं होता तो प्रशासन गलत दस्तावेज के आधार पर कार्रवाई भी कर सकता था। यही कारण है कि पुलिस इस मामले को साइबर और दस्तावेजी धोखाधड़ी दोनों दृष्टिकोण से जांच रही है।
स्थानीय लोगों में भी चर्चा का विषय
घटना सामने आने के बाद सिरोही के व्यापारिक और सामाजिक संगठनों में भी इस मामले को लेकर चर्चा है। लोगों का कहना है कि किसी व्यक्ति की निजी रंजिश के कारण इस तरह फर्जी लेटर पैड और हस्ताक्षर का इस्तेमाल करना कानून व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है।
साथ ही लोगों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
मदन राठौड़ फर्जी लेटर पैड मामला केवल फर्जी दस्तावेज तैयार करने का नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था को प्रभावित करने की कथित कोशिश का भी उदाहरण है। पुलिस की शुरुआती कार्रवाई में आरोपी की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि पूरे षड्यंत्र की गहराई से जांच जारी है। आने वाले दिनों में जांच से यह स्पष्ट होगा कि इस मामले के पीछे अकेला व्यक्ति था या कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय था।

