धौलपुर में 6 अर्थियां उठीं: दो सड़क हादसों ने मचाया मातम, कांपते हाथों से बेटों ने दी मुखाग्नि–
धौलपुर में 6 अर्थियां एक ही दिन उठने से बुधवार को पूरा शहर शोक में डूब गया। चंबल नदी किनारे स्थित मुक्तिधाम में जब एक के बाद एक छह शव अंतिम संस्कार के लिए पहुंचे तो वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। दो अलग-अलग सड़क हादसों ने छह परिवारों को ऐसा गहरा जख्म दिया, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती।
इन छह मौतों में एक ही परिवार के तीन सदस्य शामिल थे। वहीं दूसरे हादसे में भी एक ही परिवार से जुड़े तीन लोगों की जान चली गई। अंतिम संस्कार के दौरान कई ऐसे भावुक दृश्य सामने आए, जिन्हें देखकर वहां मौजूद लोगों का दिल भर आया।

धौलपुर में 6 अर्थियां उठने से शहर में पसरा मातम
मंगलवार को हुए दो अलग-अलग सड़क हादसों में धौलपुर के छह लोगों की मौत हो गई थी। बुधवार को पोस्टमॉर्टम के बाद सभी शव परिजनों को सौंपे गए।
इसके बाद अलग-अलग घरों से अंतिम यात्राएं निकलीं और चंबल मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार किया गया। एक साथ छह लोगों की मौत से शहर में शोक का माहौल बन गया।
अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में रिश्तेदार, परिचित और स्थानीय लोग शामिल हुए। चंबल किनारे जब चिताएं जलीं तो परिजनों की सिसकियों से माहौल बेहद गमगीन हो गया।
महाकाल दर्शन के लिए निकला था त्रिवेदी परिवार
पहला हादसा उस समय हुआ जब पुरानी सब्जी मंडी क्षेत्र का त्रिवेदी परिवार मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर में दर्शन के लिए जा रहा था।
परिवार की कार एक डंपर से टकरा गई। हादसा इतना गंभीर था कि कपड़ा व्यवसायी सुनील त्रिवेदी की पत्नी सोमा (65), बेटे अंकुर (42) और बहू अर्चना (40) की मौत हो गई।
हादसे के बाद तीनों के शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेजे गए। देर रात शव धौलपुर लाए गए, जिसके बाद परिवार में कोहराम मच गया।
जिस घर से कुछ समय पहले धार्मिक यात्रा की तैयारियां और खुशियां जुड़ी थीं, वहां अचानक मातम छा गया।
परिवार के तीन सदस्यों को एक साथ दी अंतिम विदाई
बुधवार सुबह त्रिवेदी परिवार के घर से तीनों की अंतिम यात्रा निकली। बड़ी संख्या में रिश्तेदार और परिचित अंतिम विदाई देने पहुंचे।
चंबल मुक्तिधाम में सुनील त्रिवेदी ने अपनी पत्नी सोमा को मुखाग्नि दी। वहीं उनके छोटे बेटे रत्नेश ने अपने भतीजे अंश के साथ अंकुर और अर्चना का अंतिम संस्कार किया।
एक ही परिवार के तीन सदस्यों की एक साथ अंतिम विदाई ने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया।
29 साल पुराने हादसे की याद हुई ताजा
धौलपुर में 6 अर्थियां उठने के इस दृश्य ने शहरवासियों को करीब 29 साल पुराने एक दर्दनाक हादसे की याद दिला दी।
12 अक्टूबर 1997 को जयपुर के पास एक टाटा सूमो दुर्घटनाग्रस्त हुई थी। उस हादसे में धौलपुर के हनुमान तिराहे पर रहने वाले तिवारी परिवार के छह लोगों की मौत हुई थी।
उस समय भी धौलपुर में एक साथ छह अर्थियां उठी थीं। मंगलवार के दो सड़क हादसों के बाद बुधवार को जब छह शवों की अंतिम यात्राएं निकलीं तो लोगों को पुरानी घटना फिर याद आ गई।
हादसे ने परिवार की पूरी तस्वीर बदल दी
त्रिवेदी परिवार में हादसे के बाद घर की दो बहुओं में से अब कोई जीवित नहीं रही। परिवार में सुनील त्रिवेदी, उनके छोटे बेटे रत्नेश और दोनों पोते अंश व तेजस रह गए हैं।
परिवार की बेटियां भी पिता और भाइयों को संभालने के लिए धौलपुर पहुंचीं। कुछ दिन पहले तक जिस परिवार में यात्रा को लेकर उत्साह था, वहां अब मातम और सिसकियां हैं।
परिजनों के लिए इस अचानक आई त्रासदी को स्वीकार करना बेहद मुश्किल है।
दूसरे सड़क हादसे में जैन परिवार के तीन लोगों की मौत
दूसरा हादसा धौलपुर-भरतपुर हाईवे पर हुआ। इस दुर्घटना में जयपुर के पदमपुरा स्थित श्रीजी के दर्शन कर लौट रहे जैन परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई।
मृतकों में सरिया व्यवसायी राजकुमार जैन, उनके भतीजे और तेल व्यवसायी विजय जैन, तथा विजय जैन के बेटे आदी जैन शामिल थे।
हादसे के बाद जब तीनों के शव घर पहुंचे तो परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। आसपास के लोग भी परिवार को सांत्वना देने के लिए पहुंचते रहे।
बेटे ने कांपते हाथों से पिता को दी मुखाग्नि
राजकुमार जैन के अंतिम संस्कार का दृश्य सबसे ज्यादा भावुक करने वाला रहा। उनके बेटे मयंक जैन ने अपने पिता को कांपते हाथों से मुखाग्नि दी।
जिस पिता ने बेटे को जीवन की राह दिखाई, उसी पिता को अंतिम विदाई देने की जिम्मेदारी बेटे के सामने थी। यह दृश्य देखकर चंबल मुक्तिधाम में मौजूद कई लोगों की आंखें नम हो गईं।
वहीं विजय जैन और उनके बेटे आदी जैन का अंतिम संस्कार विजय जैन के बड़े बेटे ने किया।
एक के बाद एक उठीं छह अर्थियां
चंबल मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार के दौरान एक के बाद एक छह अर्थियां पहुंचीं। परिजनों की चीख-पुकार और सिसकियों के बीच छह लोगों को अंतिम विदाई दी गई।
इस घटना ने पूरे धौलपुर को झकझोर दिया है। सड़क हादसों में एक साथ छह लोगों की मौत ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और तेज रफ्तार वाहनों से जुड़े जोखिमों को सामने ला दिया है।
दो हादसे, छह मौतें और कई परिवारों की दुनिया उजड़ी
दो अलग-अलग सड़क दुर्घटनाओं ने छह परिवारों से उनके अपनों को छीन लिया। किसी ने पत्नी खोई, किसी ने बेटा, किसी ने पिता और किसी ने अपना बच्चा।
धौलपुर में 6 अर्थियां उठने का यह दृश्य शहर के लोगों के लिए लंबे समय तक याद रहने वाला है। 29 साल पुराने हादसे की याद के साथ बुधवार को धौलपुर ने छह अपनों को नम आंखों से अंतिम विदाई दी।
नोट: यह खबर उपलब्ध जानकारी और परिजनों/स्थानीय रिपोर्टों में बताए गए घटनाक्रम पर आधारित है। सड़क हादसों के कारण और अन्य कानूनी पहलुओं की आधिकारिक जांच के निष्कर्ष अलग हो सकते हैं।
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