ड्रग्स के खिलाफ निर्णायक लड़ाई, तीन साल में राज्यों को नशा मुक्त बनाने की तैयारी
देश में मादक पदार्थों की तस्करी और नशे के बढ़ते खतरे पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने राज्यों के साथ मिलकर व्यापक और परिणाम आधारित रणनीति तैयार की है। इसी दिशा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में शुक्रवार को नार्को कॉ-ऑर्डिनेशन सेंटर (एन-कॉर्ड) की 10वीं शीर्ष स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में सभी राज्यों के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, केंद्रीय और राज्य स्तरीय जांच एवं प्रवर्तन एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इस दौरान अगले तीन वर्षों में राज्यों को ड्रग्स मुक्त बनाने के लक्ष्य को लेकर विस्तृत चर्चा की गई तथा इसके लिए तैयार की गई तीन वर्षीय कार्ययोजना का औपचारिक विमोचन भी किया गया।
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि मादक पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए विभिन्न विभागों और एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए। ड्रग्स नेटवर्क की पहचान कर उसके पूरे तंत्र को ध्वस्त करने, तस्करों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करने, अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों को जब्त करने तथा उनके वित्तीय लेन-देन की गहन जांच को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया। सरकार का मानना है कि केवल तस्करों की गिरफ्तारी ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके आर्थिक तंत्र को भी पूरी तरह खत्म करना आवश्यक है।

गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यों में गठित एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक राज्य में एएनटीएफ का नेतृत्व ऐसे वरिष्ठ अधिकारी को सौंपा जाना चाहिए, जो पूर्णकालिक रूप से इस जिम्मेदारी का निर्वहन करे। उन्होंने स्पष्ट किया कि ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस या किसी एक एजेंसी की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह पूरे प्रशासनिक तंत्र और समाज की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने राज्यों को भरोसा दिलाया कि आवश्यकता पड़ने पर केंद्र सरकार हर संभव तकनीकी, प्रशासनिक और कानूनी सहयोग उपलब्ध कराएगी।
बैठक में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत दर्ज मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए आवश्यकतानुसार विशेष अदालतें स्थापित करने पर भी चर्चा हुई। साथ ही नशा मुक्ति केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से सशक्त बनाने और युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के लिए स्कूलों, कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने पर सहमति बनी। अधिकारियों ने माना कि केवल कानून के जरिए ही नहीं, बल्कि जागरूकता और पुनर्वास के माध्यम से भी इस चुनौती का प्रभावी समाधान संभव है।
बैठक के दौरान अफीम और अन्य मादक पदार्थों की अवैध खेती को पूरी तरह समाप्त करने के लिए राज्यों को विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने, आधुनिक तकनीक के उपयोग और खुफिया सूचनाओं के बेहतर आदान-प्रदान पर भी बल दिया गया, ताकि तस्करी के नेटवर्क को शुरुआती स्तर पर ही ध्वस्त किया जा सके।
अमित शाह ने जिला स्तर पर आयोजित होने वाली एन-कॉर्ड बैठकों को केवल औपचारिकता तक सीमित न रखने की सलाह देते हुए कहा कि प्रत्येक बैठक में ठोस निर्णय लिए जाएं और उनकी नियमित समीक्षा भी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने अधिकारियों से परिणाम आधारित कार्यशैली अपनाने का आह्वान किया। गृह मंत्री ने विशेष रूप से राजस्थान में ड्रग्स के खिलाफ चलाए गए अभियानों और अवैध एमडी फैक्ट्रियों के विरुद्ध की गई प्रभावी कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि इसी प्रकार सभी राज्यों को समन्वित अभियान चलाकर ड्रग्स तस्करी के पूरे नेटवर्क को समाप्त करने की दिशा में कार्य करना होगा।
केंद्र सरकार का लक्ष्य केवल मादक पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाना ही नहीं, बल्कि देश के युवाओं को नशे की गिरफ्त से बाहर निकालकर सुरक्षित और स्वस्थ समाज का निर्माण करना भी है। तीन वर्षीय कार्ययोजना इसी व्यापक सोच का हिस्सा है, जिसके माध्यम से कानून प्रवर्तन, जागरूकता, पुनर्वास और अंतरराज्यीय समन्वय को मजबूत कर भारत को नशा मुक्त बनाने की दिशा में निर्णायक कदम उठाए जा रहे हैं।

