जयपुर में काव्य संध्या ‘सोपान’ का आयोजन, साहित्य और संगीत के सुरों से सजी यादगार शाम
जयपुर स्थित जवाहर कला केंद्र (जेकेके) के रंगायन सभागार में सोमवार शाम आयोजित काव्य संध्या ‘सोपान – एक शाम कविता के नाम’ साहित्य, संगीत और संवेदनाओं का अनुपम संगम बनकर उभरी। कार्यक्रम में कविता, संगीत, भक्ति और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों ने ऐसा वातावरण निर्मित किया कि उपस्थित श्रोता पूरी तरह मंत्रमुग्ध हो गए। कला और साहित्य के इस विशेष आयोजन ने न केवल मनोरंजन किया, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और मानवीय संवेदनाओं को भी मजबूत करने का संदेश दिया।
इशानवी क्रिएशन के तत्वावधान में आयोजित इस भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम में देशभर के ख्यातनाम कवियों, साहित्यकारों, कलाकारों और काव्य प्रेमियों ने भाग लिया। कार्यक्रम की विशेष आकर्षण देश के सुप्रसिद्ध कवि, लेखक और साहित्यकार आलोक श्रीवास्तव रहे, जिन्होंने मुख्य वक्ता और कवि के रूप में अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई।

अपने संबोधन में आलोक श्रीवास्तव ने वर्तमान समय में समाज के सामने मौजूद चुनौतियों और बढ़ती नकारात्मकता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कला, साहित्य और संगीत ऐसी शक्तियां हैं जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती हैं। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य जीवन की भागदौड़ और तनाव से घिर जाता है, तब साहित्य और संगीत उसे नई ऊर्जा और दिशा प्रदान करते हैं। ऐसे आयोजन लोगों को जोड़ने और समाज में सकारात्मक वातावरण बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनते हैं।
कार्यक्रम के दौरान कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से प्रेम, संवेदना, सामाजिक सरोकार, मानवीय रिश्तों और देशभक्ति जैसे विषयों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। श्रोताओं ने हर प्रस्तुति का तालियों की गड़गड़ाहट के साथ स्वागत किया। वहीं भक्ति संगीत और शिव स्तुति की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को आध्यात्मिक रंग प्रदान किया। संगीत और काव्य के इस संगम ने पूरे सभागार को भावनाओं से सराबोर कर दिया।
आलोक श्रीवास्तव ने राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत और गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्रदेश केवल कला, साहित्य और संगीत की भूमि ही नहीं है, बल्कि वीरता, त्याग और स्वाभिमान की भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप की वीरभूमि राजस्थान का नाम लेते ही मन, मस्तिष्क और चिंतन में एक अद्भुत ऊर्जा का संचार होता है। यह भूमि हर भारतीय को प्रेरणा देती है और राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करती है।
उन्होंने आगे कहा कि किसी भी भारतीय कवि और साहित्यकार के लिए राजस्थान आना और यहां अपनी रचनाओं का पाठ करना गौरव की बात है। उन्होंने जयपुर से अपने लंबे जुड़ाव का उल्लेख करते हुए बताया कि वह पिछले लगभग 30 वर्षों से इस शहर में आते रहे हैं, लेकिन साहित्य और कविता के प्रति लोगों का इतना उत्साह और समर्पण उन्हें बहुत कम देखने को मिला है। उन्होंने जयपुर के साहित्य प्रेमियों की सराहना करते हुए कहा कि यहां के श्रोता कविता को केवल सुनते ही नहीं, बल्कि उसे आत्मसात भी करते हैं।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, कवियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। काव्य संध्या ‘सोपान’ ने यह संदेश दिया कि साहित्य, संगीत और कला समाज को जोड़ने तथा सकारात्मक सोच विकसित करने के सबसे प्रभावी माध्यम हैं। यह आयोजन न केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम रहा, बल्कि संवेदनाओं, विचारों और रचनात्मकता का ऐसा उत्सव बना जिसने उपस्थित सभी लोगों के मन पर गहरी छाप छोड़ी

