अगले हफ्ते शेयर बाजार में रहेगी हलचल, सिर्फ 4 दिन होगा कारोबार; जानिए किन फैक्टर्स पर रहेगी निवेशकों की नजर
भारतीय शेयर बाजार के लिए 22 जून से शुरू होने वाला सप्ताह काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस सप्ताह निवेशकों की नजर घरेलू और वैश्विक दोनों घटनाक्रमों पर रहेगी। मुहर्रम के अवकाश के कारण 26 जून को बाजार बंद रहेगा, ऐसे में पूरे सप्ताह में केवल चार कारोबारी सत्र ही होंगे। इसके बावजूद बाजार में उतार-चढ़ाव और हलचल बनी रहने की संभावना है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता तनाव, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, वैश्विक आर्थिक संकेतक और तकनीकी स्तर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। निवेशकों को इस सप्ताह विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है।

सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल पर रहेगी नजर
बाजार विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी के लिए प्रमुख सपोर्ट जोन 23,936, 23,870, 23,820, 23,466, 23,345 और 23,320 के स्तर पर मौजूद हैं। सपोर्ट वह स्तर होता है जहां बाजार को नीचे गिरने से सहारा मिलता है। इस स्तर पर खरीदारी बढ़ने से कीमतों में स्थिरता देखने को मिल सकती है।
वहीं रेजिस्टेंस जोन 24,140, 24,382, 24,450, 24,480, 24,535 और 24,646 के स्तर पर माना जा रहा है। रेजिस्टेंस वह स्तर होता है जहां बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और बाजार को ऊपर बढ़ने में कठिनाई होती है। यदि निफ्टी इन स्तरों को पार कर लेता है तो बाजार में नई तेजी देखने को मिल सकती है।
वेल्थ व्यू एनालिटिक्स की रिपोर्ट के अनुसार ये स्तर आने वाले दिनों में ट्रेडर्स और निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण संकेतक साबित हो सकते हैं।
अमेरिका-ईरान तनाव सबसे बड़ा फैक्टर
इस सप्ताह बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारकों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव सबसे ऊपर माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच पहले 60 दिनों के युद्धविराम और शांति वार्ता को लेकर सहमति बनी थी, लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने एक बार फिर अनिश्चितता बढ़ा दी है।
ईरान ने शनिवार को एक बार फिर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने की बात कही है। हालांकि अमेरिकी सेना ने इस दावे को खारिज किया है। इसके बावजूद इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का तनाव वैश्विक तेल आपूर्ति और ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर कहा कि यदि 60 दिनों के भीतर कोई स्थायी समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका भविष्य में होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाने पर विचार कर सकता है। उनका कहना है कि यह शुल्क मध्य-पूर्व क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पर हुए खर्च की भरपाई के लिए लगाया जा सकता है।
शांति वार्ता पर टिकी दुनिया की नजर
तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडल रविवार को स्विट्जरलैंड पहुंचे, जहां दोनों देशों के बीच शांति वार्ता हो रही है। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर शामिल हैं। वहीं ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्री अब्बास अराघची कर रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि वार्ता के परिणाम का असर केवल अंतरराष्ट्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक वित्तीय बाजारों और भारतीय शेयर बाजार पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है।
विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी रहेंगी अहम
विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) और घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) की खरीदारी-बिकवाली भी बाजार की चाल तय करेगी। यदि विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में खरीदारी जारी रखते हैं तो बाजार को मजबूती मिल सकती है। वहीं बिकवाली बढ़ने पर दबाव देखने को मिल सकता है।
कुल मिलाकर आने वाला सप्ताह निवेशकों के लिए बेहद अहम रहने वाला है। वैश्विक घटनाक्रम, तकनीकी स्तर और विदेशी निवेशकों की रणनीति बाजार की दिशा निर्धारित करेगी। ऐसे में विशेषज्ञ निवेशकों को सोच-समझकर निवेश करने और जोखिम प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की सलाह दे रहे हैं।

