जयपुर गुप्त वृंदावन धाम: 6 एकड़ में बनेगा 17 मंजिला मंदिर, CM भजनलाल ने किया शिला पूजन
जयपुर गुप्त वृंदावन धाम में राधा-कृष्ण शिला पूजन
जयपुर गुप्त वृंदावन धाम में सोमवार को राधा-कृष्ण शिला पूजन का धार्मिक आयोजन हुआ। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने वैष्णव परंपरा के अनुसार विधि-विधान से शिला का पूजन किया और भगवान श्रीकृष्ण-बलराम की महाआरती में हिस्सा लिया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
जगतपुरा स्थित गुप्त वृंदावन धाम को एक बड़े आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। मंदिर निर्माण में इसी पूजित शिला से श्री श्री राधा श्यामसुंदर की प्रतिमा तैयार किए जाने की योजना है।
मुख्यमंत्री ने इस दौरान भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं और ब्रज क्षेत्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ा ब्रज क्षेत्र भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में विशेष स्थान रखता है।

जयपुर गुप्त वृंदावन धाम 6 एकड़ में होगा तैयार
धाम के अध्यक्ष अमितासना दास के अनुसार, यह पूरा प्रोजेक्ट करीब 6 एकड़ भूमि में विकसित किया जा रहा है। इसका निर्माण ‘हरे कृष्ण मूवमेंट, जयपुर’ की ओर से कराया जा रहा है।
इस परियोजना का उद्देश्य धार्मिक आस्था के साथ भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं और वैदिक ज्ञान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। प्रस्तावित 17 मंजिला गुप्त वृंदावन धाम को राजस्थान के प्रमुख आध्यात्मिक केंद्रों में विकसित करने की योजना है।
मंदिर परिसर में धार्मिक गतिविधियों के साथ श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए संस्कृति एवं अध्यात्म से जुड़ी कई सुविधाएं भी उपलब्ध कराने की तैयारी है।
17 मंजिला मंदिर बनेगा आकर्षण का केंद्र
जयपुर गुप्त वृंदावन धाम में प्रस्तावित 17 मंजिला मंदिर इसकी सबसे प्रमुख विशेषताओं में शामिल है। मंदिर की वास्तुकला में भारतीय धार्मिक परंपराओं और राजस्थान की शिल्पकला की झलक देखने को मिलेगी।
आयोजकों के मुताबिक, मंदिर परिसर को इस तरह विकसित किया जा रहा है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को धार्मिक अनुभव के साथ भारतीय संस्कृति और भगवान कृष्ण की लीलाओं से जुड़ी जानकारी भी मिल सके।
मंदिर के उद्घाटन को लेकर भी विशेष योजना बनाई गई है। आयोजकों के अनुसार, अगले वर्ष 12 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा धाम के उद्घाटन का कार्यक्रम प्रस्तावित है।
180 फीट लंबी कमान छतरी पर दिखेंगी कृष्ण की लीलाएं
गुप्त वृंदावन धाम में 180 फीट लंबी और करीब 108 फीट चौड़ी कमान छतरी बनाई जा रही है। इसकी खासियत यह होगी कि रात के समय प्रोजेक्शन मैपिंग तकनीक के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं को प्रदर्शित किया जाएगा।
यह व्यवस्था श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण बनने की उम्मीद है। धार्मिक कथाओं को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत करने से बच्चों और युवाओं को भी भारतीय धार्मिक परंपराओं को समझने का अवसर मिलेगा।
राजस्थानी शैली में बनेगा 70 फीट ऊंचा मुख्य द्वार
धाम का मुख्य प्रवेश द्वार भी विशेष डिजाइन के साथ तैयार किया जा रहा है। इसकी ऊंचाई करीब 70 फीट बताई गई है।
मुख्य द्वार को राजस्थानी शिल्पकला के अनुरूप सजाया जाएगा। इसमें 108 मयूर आकृतियों का इस्तेमाल किया जाएगा। मोर की आकृतियों से सजा यह प्रवेश द्वार धाम की वास्तुकला को अलग पहचान देने वाला होगा।
25 हजार वर्गफीट का दर्शन हॉल और वैदिक म्यूजियम
धाम परिसर में श्रद्धालुओं के लिए करीब 25 हजार वर्गफीट का विशाल दर्शन हॉल तैयार किया जाएगा। इसके अलावा यहां 14 प्रेजेंटेशन रूम और एक ऑडियो-विजुअल थिएटर भी प्रस्तावित है।
परिसर में वैदिक म्यूजियम भी विकसित किया जा रहा है। संग्रहालय के माध्यम से भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपराओं और भगवान कृष्ण से जुड़ी धार्मिक कथाओं को आधुनिक तरीके से प्रस्तुत करने की योजना है।
इन सुविधाओं का उद्देश्य केवल दर्शन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यहां आने वाले लोगों को भारतीय आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के बारे में जानकारी देना भी होगा।
जयपुर गुप्त वृंदावन धाम में ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट
आयोजकों के मुताबिक पूरे परिसर का निर्माण ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट के आधार पर किया जा रहा है। प्रोजेक्ट में हरियाली और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।
धाम में प्राकृतिक वातावरण को बनाए रखने के साथ आधुनिक सुविधाओं को भी शामिल किया जाएगा। इसके जरिए धार्मिक स्थल को पर्यावरण के अनुकूल विकसित करने की कोशिश की जा रही है।
राजस्थान का बड़ा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र बनाने की तैयारी
जयपुर गुप्त वृंदावन धाम को सिर्फ मंदिर के रूप में विकसित करने के बजाय एक व्यापक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र बनाने की योजना है।
यहां देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी धार्मिक एवं सांस्कृतिक अनुभव उपलब्ध कराने की तैयारी है। ब्रज की परंपरा, कृष्ण भक्ति, वैदिक ज्ञान और राजस्थान की कला-संस्कृति को एक ही परिसर में प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है।
राधा-कृष्ण शिला पूजन के साथ इस परियोजना के धार्मिक महत्व को भी नई दिशा मिली है। आने वाले समय में 17 मंजिला मंदिर, प्रोजेक्शन मैपिंग, वैदिक म्यूजियम और राजस्थानी वास्तुकला इस धाम को जयपुर के प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों में पहचान दिला सकते हैं।
Read More:- https://youtu.be/tUSwzCIP9Nw

