चारधाम यात्रा पर निकले जैसलमेर के परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, सात दिन बाद मां-बेटी के शव मिले
देवप्रयाग में अलकनंदा नदी में गिरी थी इनोवा कार, परिवार के अधिकांश सदस्यों की दर्दनाक मौत
जैसलमेर/देवप्रयाग। चारधाम यात्रा पर निकले राजस्थान के जैसलमेर निवासी एक परिवार के लिए यह धार्मिक यात्रा जिंदगी का सबसे बड़ा हादसा बन गई। उत्तराखंड के देवप्रयाग में अलकनंदा नदी में गिरी इनोवा कार दुर्घटना के सात दिन बाद लापता मां-बेटी के शव बरामद कर लिए गए हैं। दोनों शव घटना स्थल से करीब 15 किलोमीटर दूर गंगा नदी में मिले हैं। इससे पहले परिवार की एक अन्य बेटी का शव भी बरामद हो चुका था। हादसे के बाद पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।

जानकारी के अनुसार जैसलमेर निवासी परिवार 26 मई को चारधाम यात्रा के लिए रवाना हुआ था। परिवार ने धार्मिक यात्रा के दौरान विभिन्न धामों के दर्शन किए और 2 जून को बद्रीनाथ धाम के दर्शन कर वापस लौट रहा था। इसी दौरान टिहरी जिले के देवप्रयाग क्षेत्र में उनकी इनोवा कार अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी और सीधे अलकनंदा नदी में समा गई।
हादसे के समय वाहन में डॉक्टर दिनेश माली, उनकी मां कमला देवी, बड़ी बहन गुड्डी देवी, भांजी अश्लेषा, भांजा आयुष्मान तथा गुड्डी देवी की दो बेटियां नम्रता और ज्योत्सना सवार थीं। दुर्घटना इतनी भयावह थी कि अधिकांश यात्री नदी के तेज बहाव में बह गए। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीमों ने बड़े स्तर पर रेस्क्यू अभियान शुरू किया।
पिछले सात दिनों से लगातार चल रहे खोज अभियान के दौरान सोमवार को लापता मां और बेटी के शव बरामद किए गए। दोनों शव घटना स्थल से लगभग 15 किलोमीटर दूर गंगा नदी में मिले। इससे पहले 16 वर्षीय ज्योत्सना का शव भी मिल चुका था। शव मिलने के बाद परिजनों की उम्मीदें पूरी तरह टूट गईं और पूरे परिवार में मातम छा गया।
हादसे में एकमात्र जीवित बचे 12 वर्षीय आयुष्मान का इलाज ऋषिकेश स्थित एम्स अस्पताल में चल रहा है। चिकित्सकों के अनुसार उसकी हालत में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है, लेकिन वह अभी भी चिकित्सकीय निगरानी में है। परिवार के अन्य सदस्यों के निधन की खबर ने पूरे जैसलमेर जिले को झकझोर कर रख दिया है।
स्थानीय लोगों के अनुसार माली परिवार समाज में काफी सम्मानित माना जाता है। परिवार धार्मिक प्रवृत्ति का था और चारधाम यात्रा को लेकर बेहद उत्साहित था। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह यात्रा इतनी बड़ी त्रासदी में बदल जाएगी। हादसे की खबर सामने आने के बाद से ही परिवार के रिश्तेदार और परिचित लगातार उत्तराखंड प्रशासन से संपर्क में थे और लापता लोगों की तलाश की जानकारी ले रहे थे।
उत्तराखंड प्रशासन और SDRF की टीमों ने खराब मौसम और तेज बहाव के बावजूद लगातार खोज अभियान जारी रखा। अधिकारियों का कहना है कि नदी का तेज प्रवाह और पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण राहत एवं बचाव कार्य में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। फिर भी टीमों ने लगातार प्रयास करते हुए लापता लोगों की तलाश पूरी की।
परिवार के सभी मृतकों का अंतिम संस्कार मंगलवार को हरिद्वार में किया जाएगा। इसके लिए परिजन और रिश्तेदार हरिद्वार पहुंच चुके हैं। अंतिम संस्कार से पहले मृतकों को श्रद्धांजलि दी जाएगी। इस दर्दनाक हादसे ने न केवल माली परिवार बल्कि पूरे जैसलमेर क्षेत्र को गहरे सदमे में डाल दिया है।
चारधाम यात्रा के दौरान हुए इस हादसे ने एक बार फिर पहाड़ी मार्गों पर सुरक्षित यात्रा और सतर्कता की आवश्यकता को उजागर किया है। फिलहाल पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है और लोग दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।

