1 जुलाई से बैंक ग्राहकों को बड़ी राहत, शिकायत पर अब 30 लाख रुपए तक मिलेगा मुआवजा, RBI लागू करेगा नई ओम्बड्समैन स्कीम
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) देशभर के बैंक ग्राहकों के अधिकारों को और मजबूत करने जा रहा है। 1 जुलाई से लागू होने वाली नई रिजर्व बैंक इंटीग्रेटेड ओम्बड्समैन स्कीम-2026 के तहत यदि किसी बैंक, एनबीएफसी, डिजिटल वॉलेट, पेमेंट सिस्टम ऑपरेटर या क्रेडिट ब्यूरो की लापरवाही के कारण किसी ग्राहक को आर्थिक नुकसान होता है और शिकायत के बावजूद समय पर समाधान नहीं मिलता, तो संबंधित संस्था को ग्राहक को पहले की तुलना में अधिक मुआवजा देना पड़ सकता है। नई व्यवस्था के तहत आर्थिक नुकसान की स्थिति में अधिकतम 30 लाख रुपए तक मुआवजा दिया जा सकेगा। वर्तमान में यह सीमा 20 लाख रुपए है।
आरबीआई के इस फैसले का उद्देश्य बैंकिंग और डिजिटल वित्तीय सेवाओं को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और ग्राहक-केंद्रित बनाना है। पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल बैंकिंग, यूपीआई, मोबाइल वॉलेट और ऑनलाइन लेनदेन में तेजी से वृद्धि हुई है। इसके साथ ही बैंकिंग सेवाओं से जुड़ी शिकायतों की संख्या भी बढ़ी है। ऐसे में ग्राहकों को अधिक सुरक्षा और प्रभावी शिकायत निवारण उपलब्ध कराने के लिए यह महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है।

नई स्कीम के तहत केवल आर्थिक नुकसान की भरपाई ही नहीं होगी, बल्कि यदि किसी ग्राहक को बैंक या वित्तीय संस्था की लापरवाही के कारण मानसिक उत्पीड़न, अनावश्यक परेशानी, समय की बर्बादी या असुविधा का सामना करना पड़ता है, तो इसके लिए भी अधिक मुआवजा मिलेगा। पहले ऐसी परिस्थितियों में अधिकतम 1 लाख रुपए तक मुआवजा दिया जा सकता था, लेकिन अब इस सीमा को बढ़ाकर 3 लाख रुपए कर दिया गया है। इससे ग्राहकों को न्याय मिलने की संभावना और मजबूत होगी।
आरबीआई का मानना है कि बढ़ी हुई मुआवजा राशि वित्तीय संस्थानों को अपनी सेवाओं में सुधार करने और ग्राहकों की शिकायतों का समयबद्ध समाधान करने के लिए प्रेरित करेगी। यदि कोई बैंक या अन्य वित्तीय संस्था ग्राहक की शिकायत को गंभीरता से नहीं लेती या निर्धारित समय सीमा के भीतर उसका समाधान नहीं करती, तो ग्राहक आरबीआई के इंटीग्रेटेड ओम्बड्समैन के पास शिकायत दर्ज करा सकेगा। जांच के बाद यदि संस्था की गलती पाई जाती है, तो उसे मुआवजा देने का आदेश दिया जा सकता है।
नई व्यवस्था में बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी), डिजिटल वॉलेट कंपनियां, क्रेडिट ब्यूरो और अन्य आरबीआई द्वारा विनियमित संस्थाएं शामिल होंगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्राहक चाहे किसी भी वित्तीय सेवा का उपयोग करे, उसके अधिकार सुरक्षित रहें और उसे निष्पक्ष शिकायत निवारण प्रणाली उपलब्ध हो।
राजस्थान के लिए यह बदलाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार बैंक ग्राहकों की शिकायतों के मामले में राजस्थान देश के शीर्ष तीन राज्यों में शामिल है। वर्ष 2024-25 के दौरान राज्य में प्रति एक लाख खाताधारकों पर औसतन 11.9 शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें डिजिटल भुगतान में गड़बड़ी, एटीएम लेनदेन, ऋण संबंधी विवाद, क्रेडिट कार्ड, बैंक खातों की सेवाओं और साइबर धोखाधड़ी से जुड़े मामले प्रमुख रहे हैं। नई ओम्बड्समैन स्कीम लागू होने के बाद ऐसे मामलों में ग्राहकों को अधिक प्रभावी राहत मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम बैंकिंग क्षेत्र में जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। इससे बैंक और वित्तीय संस्थाएं शिकायतों के निस्तारण को प्राथमिकता देंगी और ग्राहकों के साथ बेहतर व्यवहार सुनिश्चित करेंगी। साथ ही डिजिटल बैंकिंग सेवाओं पर लोगों का भरोसा भी मजबूत होगा।
आरबीआई की नई इंटीग्रेटेड ओम्बड्समैन स्कीम-2026 देश के करोड़ों बैंक ग्राहकों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आ रही है। अधिक मुआवजा, तेज शिकायत निवारण और ग्राहकों के अधिकारों की मजबूत सुरक्षा के साथ यह व्यवस्था बैंकिंग सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। 1 जुलाई से लागू होने वाली यह नई प्रणाली बैंकिंग उपभोक्ताओं को पहले से अधिक सुरक्षा और न्याय दिलाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

