गौतम अडाणी मामले में अमेरिकी अदालत सख्त, जस्टिस डिपार्टमेंट से मांगा फैसले का पूरा आधार
भारतीय उद्योगपति गौतम अडाणी से जुड़े अमेरिकी आपराधिक मामले में एक नया मोड़ सामने आया है। अमेरिका की एक संघीय अदालत ने जस्टिस डिपार्टमेंट से पूछा है कि उसने अडाणी के खिलाफ आपराधिक मुकदमा वापस लेने का फैसला किन आधारों पर लिया। अदालत ने स्पष्ट किया है कि केवल एक संक्षिप्त नोटिस देना पर्याप्त नहीं है और सरकार को अपने फैसले के पीछे की कानूनी और तथ्यात्मक वजह विस्तार से बतानी होगी। इस घटनाक्रम के बाद यह मामला एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
शुक्रवार को ब्रुकलिन की अमेरिकी जिला अदालत में सुनवाई के दौरान जिला जज निकोलस गराउफिस ने जस्टिस डिपार्टमेंट के रुख पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से दाखिल किया गया नोटिस बेहद संक्षिप्त, सामान्य और निष्कर्षात्मक है। इसमें यह स्पष्ट नहीं किया गया कि आखिर किन कारणों से अभियोजन पक्ष ने मुकदमा आगे नहीं बढ़ाने का निर्णय लिया। अदालत का मानना है कि इतने महत्वपूर्ण मामले में केवल एक औपचारिक सूचना देना न्यायिक प्रक्रिया के लिए पर्याप्त नहीं माना जा सकता।

इससे पहले 18 मई को अमेरिकी फेडरल प्रॉसिक्यूटर्स यानी सरकारी वकीलों ने घोषणा की थी कि वे गौतम अडाणी के खिलाफ दर्ज इस मामले में आगे मुकदमा नहीं चलाएंगे। अभियोजन पक्ष के इस फैसले के बाद अडाणी के कानूनी प्रतिनिधियों ने अदालत से अनुरोध किया कि मामले को औपचारिक रूप से पूरी तरह खारिज कर दिया जाए ताकि कानूनी प्रक्रिया समाप्त हो सके।
अडाणी के वकीलों ने बुधवार को ब्रुकलिन के अमेरिकी जिला जज निकोलस गराउफिस के समक्ष याचिका दायर करते हुए कहा कि जब सरकार स्वयं मुकदमा नहीं चलाना चाहती तो अदालत को भी मामले को समाप्त घोषित कर देना चाहिए। हालांकि अदालत ने इस अनुरोध पर तत्काल फैसला देने से इनकार कर दिया और कहा कि पहले सरकार को अपने फैसले का विस्तृत स्पष्टीकरण देना होगा।
जज गराउफिस ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालत का दायित्व केवल सरकारी अनुरोध को स्वीकार करना नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि ऐसा निर्णय उचित कानूनी आधार पर लिया गया हो। उन्होंने कहा कि सरकार का संक्षिप्त और सपाट बयान अदालत को किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए पर्याप्त आधार उपलब्ध नहीं कराता। ऐसे में बिना उचित कारण जाने मामले को खारिज करना न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं होगा।
यह मामला कथित रिश्वतखोरी योजना से जुड़े सिक्योरिटीज फ्रॉड और वायर फ्रॉड के आरोपों से संबंधित था। हालांकि अभियोजन पक्ष ने मुकदमा आगे नहीं बढ़ाने का निर्णय लिया, लेकिन अदालत अब यह जानना चाहती है कि इस निर्णय के पीछे क्या कानूनी, तथ्यात्मक या प्रक्रियागत कारण रहे। अदालत के इस रुख को न्यायिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी न्याय प्रणाली में अदालतों को यह अधिकार प्राप्त है कि वे अभियोजन पक्ष के महत्वपूर्ण फैसलों की समीक्षा करें, विशेष रूप से तब जब मामला सार्वजनिक महत्व या अंतरराष्ट्रीय प्रभाव से जुड़ा हो। इसलिए जस्टिस डिपार्टमेंट को अब अदालत के समक्ष विस्तृत जवाब दाखिल करना पड़ सकता है।
फिलहाल अदालत ने मामले को औपचारिक रूप से खारिज करने से इनकार किया है और सरकार के जवाब का इंतजार किया जा रहा है। अब सभी की नजर जस्टिस डिपार्टमेंट की अगली प्रतिक्रिया और अदालत की आगामी सुनवाई पर टिकी है। यह मामला केवल गौतम अडाणी ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कारोबारी जगत और निवेशकों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसके परिणाम का असर वैश्विक निवेश माहौल और कॉरपोरेट गवर्नेंस की धारणा पर भी पड़ सकता है।

