होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ा तनाव, अमेरिकी नौसेना का ईरान के ठिकानों पर हमला, ईरान ने भी किया जवाबी एक्शन
होर्मुज मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव ने नया मोड़ ले लिया है। अमेरिकी नौसेना ने ईरान के 10 सैन्य ठिकानों पर हमला किया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस सैन्य कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि यह हमले होर्मुज स्ट्रेट के पास स्थित ईरानी सैन्य ठिकानों पर किए गए। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई ‘एम/टी किकु’ नाम के तेल टैंकर पर हुए कथित ईरानी ड्रोन हमले के जवाब में की गई है।
CENTCOM के अनुसार अमेरिकी नौसेना ने उन ठिकानों को निशाना बनाया, जहां से ड्रोन और मिसाइल गतिविधियों को संचालित किए जाने की आशंका थी। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है और तेल टैंकरों पर हमले को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी उद्देश्य से यह सैन्य कार्रवाई की गई।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे एक तेल टैंकर को ड्रोन हमले का निशाना बनाया गया। हमले में जहाज को नुकसान जरूर पहुंचा, लेकिन वह अपनी यात्रा जारी रखने में सफल रहा। अमेरिका ने इस हमले के लिए सीधे तौर पर ईरान को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि ईरान ने इस आरोप को लेकर अलग रुख अपनाया है और अमेरिका के दावों को चुनौती दी है।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि हाल के दिनों में होर्मुज स्ट्रेट में लगातार बढ़ती सैन्य गतिविधियां वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए खतरा बन रही हैं। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का परिवहन होता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का सैन्य संघर्ष अंतरराष्ट्रीय बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डाल सकता है।
दूसरी ओर ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई का दावा किया है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार उन्होंने बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाया। ईरान का कहना है कि यह हमला अमेरिका द्वारा उसके मिसाइल और ड्रोन ठिकानों पर की गई हालिया सैन्य कार्रवाई के जवाब में किया गया। हालांकि इन हमलों से हुए नुकसान को लेकर अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका क्षेत्र में लगातार सैन्य हस्तक्षेप कर रहा है और उसकी संप्रभुता का उल्लंघन कर रहा है। वहीं अमेरिका का कहना है कि उसकी कार्रवाई केवल अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा और अपने सहयोगी देशों के हितों की रक्षा के लिए की गई है। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव ने पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई का यह सिलसिला जारी रहता है तो इसका असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है। होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया के बड़े हिस्से के लिए तेल की आपूर्ति होती है, इसलिए यहां किसी भी प्रकार की अस्थिरता का प्रभाव पूरी दुनिया पर महसूस किया जा सकता है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द कूटनीतिक प्रयास नहीं किए गए तो यह विवाद और अधिक गंभीर रूप ले सकता है।
फिलहाल अमेरिका और ईरान दोनों अपने-अपने दावों पर कायम हैं। एक ओर अमेरिका तेल टैंकर पर हुए हमले के जवाब में अपनी कार्रवाई को उचित ठहरा रहा है, वहीं दूसरी ओर ईरान इसे आक्रामक सैन्य कदम बताते हुए जवाबी कार्रवाई का दावा कर रहा है। आने वाले दिनों में इस पूरे घटनाक्रम पर दुनिया की नजर बनी रहेगी, क्योंकि इसका प्रभाव केवल मध्य पूर्व ही नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

