TMC में बढ़ी अंदरूनी कलह, बागी गुट की दूसरी बैठक से मचा सियासी बवाल
पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बढ़ती अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। शनिवार को टीएमसी के बागी गुट ने एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार बैठक आयोजित की, जिसमें पार्टी के 47 पूर्व पार्षद शामिल हुए। इस बैठक के बाद पार्टी के भीतर राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। खास बात यह रही कि बैठक में तृणमूल कांग्रेस का नाम और चुनाव चिह्न इस्तेमाल किया गया, लेकिन पार्टी प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तस्वीर नहीं लगाई गई। इसे लेकर अब पार्टी के भीतर विवाद गहरा गया है।
जानकारी के अनुसार, यह बैठक पूर्वी कोलकाता के टॉपसिया इलाके में आयोजित की गई। इससे पहले 22 जून को न्यू टाउन में भी इसी बागी गुट की बैठक हुई थी। दोनों बैठकों में शामिल नेताओं ने खुद को तृणमूल कांग्रेस का हिस्सा बताया, लेकिन मंच पर ममता बनर्जी की तस्वीर नहीं होने से कई तरह की राजनीतिक अटकलें लगने लगीं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम पार्टी नेतृत्व के प्रति असंतोष का संकेत माना जा रहा है।

बैठक में शामिल पूर्व पार्षदों ने स्थानीय संगठन और पार्टी की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा की। हालांकि बैठक के बाद बागी गुट की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया, लेकिन लगातार दूसरी बैठक होने से यह स्पष्ट हो गया है कि पार्टी के भीतर असंतुष्ट नेताओं का एक समूह सक्रिय रूप से अपनी रणनीति तैयार कर रहा है।
दूसरी ओर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले आधिकारिक गुट ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी आपत्ति जताई है। टीएमसी नेता डोला सेन ने न्यू टाउन और प्रगति मैदान थाने में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बागी गुट ने पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न का इस्तेमाल बिना अनुमति किया। इसके साथ ही फर्जी दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक संदेश प्रसारित करने तथा आवश्यक अनुमति के बिना बैठक आयोजित करने का भी आरोप लगाया गया है।
शिकायत में कहा गया है कि पार्टी के आधिकारिक अधिकार के बिना इस तरह की गतिविधियां न केवल संगठन के नियमों का उल्लंघन हैं, बल्कि इससे आम कार्यकर्ताओं और जनता के बीच भ्रम की स्थिति भी पैदा हो सकती है। डोला सेन ने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि लोकसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर कई स्तरों पर असंतोष की खबरें सामने आती रही हैं। कुछ नेता संगठन में बदलाव और स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर अपनी नाराजगी पहले भी जाहिर कर चुके हैं। ऐसे में लगातार दो बैठकों का आयोजन यह संकेत देता है कि पार्टी के भीतर मतभेद अब अधिक स्पष्ट रूप से सामने आ रहे हैं।
हालांकि अभी तक ममता बनर्जी या पार्टी नेतृत्व की ओर से इस बैठक पर कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन पार्टी के आधिकारिक नेताओं द्वारा पुलिस में शिकायत दर्ज कराने से यह साफ है कि नेतृत्व इस मामले को गंभीरता से ले रहा है। आने वाले दिनों में संगठनात्मक स्तर पर भी इस मुद्दे पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
इस पूरे घटनाक्रम पर अब पश्चिम बंगाल की राजनीति की नजरें टिकी हुई हैं। यदि बागी गुट अपनी गतिविधियां इसी तरह जारी रखता है, तो तृणमूल कांग्रेस के सामने संगठनात्मक चुनौती और बढ़ सकती है। वहीं दूसरी ओर पार्टी नेतृत्व इस विवाद को जल्द सुलझाने और संगठन में अनुशासन बनाए रखने की कोशिश करेगा।
फिलहाल पुलिस शिकायत के आधार पर मामले की जांच कर रही है। जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या किसी नियम का उल्लंघन हुआ है। आने वाले दिनों में इस विवाद के राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर आगे बढ़ने की संभावना बनी हुई है।

