गाड़ी का रंग भी बन सकता है सड़क हादसों की वजह, रिसर्च में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
सड़क हादसों के पीछे अब तक तेज रफ्तार, नशे में ड्राइविंग, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी और लापरवाही को ही सबसे बड़ा कारण माना जाता रहा है। लेकिन हाल ही में सामने आई एक रिसर्च और ऑटो सेफ्टी स्टडी ने एक ऐसा पहलू उजागर किया है, जिसने सभी को हैरान कर दिया है। इस अध्ययन के अनुसार, वाहन का रंग भी सड़क दुर्घटनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। खासतौर पर काले और गहरे रंग की गाड़ियों के दुर्घटनाग्रस्त होने की संभावना सफेद रंग की गाड़ियों की तुलना में अधिक पाई गई है।
ऑटो सेफ्टी विशेषज्ञों और जयपुर के विभिन्न एक्सीडेंट थानों के आंकड़ों के विश्लेषण में यह तथ्य सामने आया है कि कम विजिबिलिटी वाले रंगों की गाड़ियां सड़क पर अपेक्षाकृत अधिक जोखिम में रहती हैं। अध्ययन के अनुसार देश में बिकने वाली कुल कारों में लगभग 48 प्रतिशत सफेद रंग की होती हैं, जबकि 52 प्रतिशत अन्य रंगों की गाड़ियां होती हैं। हालांकि दुर्घटनाओं के आंकड़ों पर नजर डालें तो सफेद कारों की तुलना में काली कारें दोगुनी दर से हादसों का शिकार होती दिखाई देती हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक सफेद रंग की गाड़ियां दिन और रात दोनों समय अपेक्षाकृत अधिक स्पष्ट दिखाई देती हैं। धुंध, बारिश, कम रोशनी या शाम के समय भी सफेद वाहन आसानी से नजर आ जाते हैं। यही कारण है कि अन्य वाहन चालक समय रहते दूरी और दिशा का सही अनुमान लगा लेते हैं, जिससे दुर्घटना की संभावना कम हो जाती है।
इसके विपरीत काले और गहरे रंग की गाड़ियां अक्सर आसपास के वातावरण में घुल-मिल जाती हैं। रात के समय काली गाड़ी सड़क, पेड़-पौधों या अंधेरे बैकग्राउंड के साथ आसानी से मिश्रित हो जाती है। ऐसे में सामने से आने वाले या पीछे चल रहे वाहन चालक को उसे पहचानने में अधिक समय लग सकता है। यही देरी कई बार दुर्घटना का कारण बन जाती है।
परिवहन सेवा सलाहकार एसोसिएशन के अध्यक्ष रतनलाल शर्मा और उपाध्यक्ष मनोज दिवाकर का कहना है कि सड़क सुरक्षा में वाहन के रंग का योगदान पहले जितना महत्वपूर्ण नहीं माना जाता था, लेकिन अब विभिन्न अध्ययनों और आंकड़ों से इसकी पुष्टि हो रही है। उनका कहना है कि सफेद रंग की कारें कम रोशनी और खराब मौसम की परिस्थितियों में अधिक सुरक्षित मानी जा सकती हैं क्योंकि उनकी दृश्यता बेहतर होती है।
विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि केवल वाहन का रंग ही दुर्घटना का कारण नहीं होता, बल्कि यह कई अन्य कारकों के साथ मिलकर जोखिम को प्रभावित करता है। यदि वाहन में उचित रिफ्लेक्टर, अच्छी गुणवत्ता की लाइटें और सुरक्षा उपकरण लगे हों तो रंग से जुड़े जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके अलावा चालक की सतर्कता और ट्रैफिक नियमों का पालन भी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि वाहन खरीदते समय लोग अक्सर डिजाइन, माइलेज, कीमत और फीचर्स पर ध्यान देते हैं, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से रंग का चयन भी एक महत्वपूर्ण पहलू हो सकता है। विशेष रूप से ऐसे क्षेत्रों में जहां धुंध, बारिश या कम रोशनी की स्थिति अधिक रहती है, वहां हल्के रंग के वाहन अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित साबित हो सकते हैं।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि केवल सफेद रंग की गाड़ी खरीद लेने से दुर्घटना का खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता। सुरक्षित ड्राइविंग, गति नियंत्रण, सीट बेल्ट का उपयोग और ट्रैफिक नियमों का पालन ही सड़क सुरक्षा की सबसे मजबूत गारंटी है। फिर भी यह नया शोध वाहन चालकों और खरीदारों को सुरक्षा के प्रति एक नया दृष्टिकोण जरूर प्रदान करता है।

