खामेनेई की विदाई में काले कपड़े पहने लाखों लोग पहुंचे: खून बहेगा, बदला-बदला के नारे लगाए; ट्रम्प बोले- ईरान को एक हफ्ते की छुट्टी दी

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई को आखिरी विदाई देने के लिए शनिवार को लाखों लोग तेहरान के इमाम खुमैनी ग्रैंड मोसल्ला में जुटे। शिया परंपरा के मुताबिक काले कपड़े पहने शोकाकुल लोग छाती पीटकर मातम मनाते नजर आए। इस दौरान भीड़ ने “खून बहेगा”, “अमेरिका मुर्दाबाद” और “बदला, बदला” जैसे नारे भी लगाए। भारी गर्मी के बावजूद हजारों महिलाएं और पुरुष झंडे लहराते और तस्वीरें थामे नजर आए, जबकि कुछ लोग आंसू पोंछते भी दिखे।
खामेनेई का शव कांच के ताबूत में रखा गया था, जिसे देखने के लिए भीड़ बेताब दिखी। भीड़ में मौजूद कई लोगों ने बताया कि यह पल उनके लिए बेहद भावुक है, क्योंकि खामेनेई तीन दशकों से ज्यादा समय तक ईरान के सर्वोच्च नेता रहे। बता दें कि खामेनेई की मौत सामान्य नहीं थी, बल्कि 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हवाई हमले में उनकी जान गई थी। यही हमला ईरान पर अमेरिका-इजरायल युद्ध की शुरुआत भी बना था।
3 जुलाई से शुरू हुआ अंतिम संस्कार, 9 जुलाई तक चलेगा सिलसिला
तेहरान में 3 जुलाई से खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़ी रस्में शुरू हो गई हैं, जो 9 जुलाई तक चलेंगी। यह सिलसिला करीब एक सप्ताह तक चलने वाला ईरान के इतिहास का सबसे बड़ा राजकीय शोक कार्यक्रम बताया जा रहा है। पहले दिन यानी 3 जुलाई को विदेशी मेहमानों और राष्ट्राध्यक्षों के लिए विशेष कार्यक्रम रखा गया था, जिसमें 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। हालांकि रूस, चीन, भारत और तुर्किये जैसे देशों के टॉप लीडर्स ने इस मौके पर सीधे तौर पर दूरी बनाई। ईरान की तरफ से इन्हें आमंत्रण भेजा गया था, लेकिन इन देशों ने अपने निचले स्तर के प्रतिनिधियों को भेजकर औपचारिकता निभाई।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर खुद तेहरान पहुंचे। भारत की तरफ से बिहार के राज्यपाल और लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन के साथ विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्घेरिटा को भेजा गया। तुर्किये के उप-राष्ट्रपति जेवदेत यिलमाज, आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिन्यान, जॉर्जिया के राष्ट्रपति मिखाइल कवेलाश्विली, तजाकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमोन के अलावा रूस की तरफ से पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव समेत करीब 30 देशों के प्रतिनिधिमंडल इस मौके पर मौजूद रहे।
परिवार के 4 सदस्यों को भी दी गई अंतिम विदाई
खामेनेई अकेले इस हमले में नहीं मारे गए थे। उनके साथ उनकी 14 महीने की पोती, बेटी, पत्नी और दामाद की भी उसी हमले में मौत हो गई थी। शनिवार और रविवार को हुए सार्वजनिक कार्यक्रमों में इन सभी को भी अंतिम श्रद्धांजलि दी गई। ग्रैंड मोसल्ला में इन सभी ताबूतों को साथ रखा गया था, जहां लोग कतारों में लगकर आखिरी दर्शन कर रहे थे।
तेहरान की सड़कों पर सेना-पुलिस की भारी तैनाती
खामेनेई के अंतिम संस्कार को लेकर तेहरान में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। शहर की सभी मुख्य सड़कों, चौराहों और सरकारी इमारतों के बाहर सेना और पुलिस बल तैनात हैं। मुख्य मार्गों पर सैन्य वाहन गश्त लगा रहे हैं। शनिवार से सोमवार तक तेहरान में सभी सरकारी और निजी दफ्तर बंद रखने का आदेश दिया गया है, और शहर के बड़े हिस्से में निजी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाई गई है। सोमवार को होने वाली मुख्य अंतिम यात्रा के दौरान तेहरान का एयरस्पेस पूरी तरह बंद रखा जाएगा, जिससे किसी भी उड़ान को अनुमति नहीं मिलेगी।
आम लोगों के लिए मुफ्त मेट्रो-बस, होटल किराए में छूट
अंतिम संस्कार में शामिल होने आए आम लोगों के लिए तेहरान प्रशासन ने खास इंतजाम किए हैं। शहर में मेट्रो और सरकारी बसों की सेवा पूरी तरह मुफ्त कर दी गई है। इसके अलावा होटल किराए में 50% तक की छूट दी गई है, जबकि स्कूलों और मस्जिदों में ठहरने की व्यवस्था भी की गई है। दूसरे शहरों से बड़ी संख्या में लोगों को तेहरान लाने के लिए स्पेशल ट्रेनें भी चलाई गई हैं। ईरानी अधिकारियों का अनुमान है कि इस पूरे कार्यक्रम में 1.5 से 2 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं, जो सच में हुआ तो यह ईरान के इतिहास का सबसे बड़ा राजकीय अंतिम संस्कार बन जाएगा।
पांच शहरों से गुजरेगी खामेनेई की अंतिम यात्रा
खामेनेई की अंतिम यात्रा कुल पांच शहरों से गुजरेगी। सोमवार को शव को तेहरान से कोम ले जाया जाएगा, जहां जामकरान मस्जिद में प्रार्थना होगी। इसके बाद यह यात्रा इराक की सीमा में दाखिल होगी, जहां नजफ में इराकी प्रधानमंत्री और वहां के धार्मिक नेता खामेनेई के शव का स्वागत करेंगे। नजफ की इमाम अली दरगाह में रस्में पूरी होने के बाद शव को हेलिकॉप्टर से करबला की इमाम हुसैन दरगाह ले जाया जाएगा। इसके बाद शव को वापस ईरान लाया जाएगा और आखिरकार 9 जुलाई को मशहद में इमाम रजा दरगाह के पास सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। मशहद खामेनेई की जन्मस्थली भी है, जिसे लेकर इस पूरे कार्यक्रम में खास धार्मिक और भावनात्मक महत्व जोड़ा जा रहा है।
गौर करने वाली बात यह भी है कि यह पूरा कार्यक्रम मुहर्रम के इस्लामी महीने में हो रहा है, जो शिया इस्लाम में मातम, बलिदान और शहादत से जुड़ा माना जाता है। साथ ही खामेनेई के शव को सार्वजनिक दर्शन के लिए रखे जाने की तारीख अमेरिका के 250वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के साथ मेल खाती है, जिसे कुछ विश्लेषक प्रतीकात्मक टकराव के तौर पर भी देख रहे हैं।
ट्रम्प का बड़ा बयान: ‘हमने ईरान को एक हफ्ते की छुट्टी दी’
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिका ने खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए ईरान को एक हफ्ते की मोहलत दी है। माउंट रशमोर में दिए एक भाषण में ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने मानवता के नाते ऐसा किया है, ताकि ईरान बिना किसी बाधा के अपने पूर्व नेता को अंतिम विदाई दे सके। ट्रम्प ने यह भी संकेत दिया कि ईरान बातचीत की मेज पर लौटने के लिए तैयार है और कार्यक्रम खत्म होने के तुरंत बाद ईरान को अमेरिकी शर्तें माननी होंगी।
अमेरिका-ईरान वार्ता का अगला दौर फिर शुरू होगा
कतर ने बताया है कि खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद अमेरिका-ईरान वार्ता का अगला दौर फिर शुरू होगा। कतर लंबे समय से इस विवाद में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। अप्रैल में हुए युद्धविराम और जून में हुए समझौते के आधार पर ही आगे की बातचीत आगे बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं दूसरी ओर, ईरान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को फोर्डो, नतांज और इस्फहान स्थित परमाणु ठिकानों के निरीक्षण की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। यह फैसला आगे की बातचीत में एक बड़ी बाधा बन सकता है, क्योंकि अमेरिका और उसके सहयोगी देश इन ठिकानों की पारदर्शी जांच पर जोर देते रहे हैं।
युद्ध के दौरान मारे गए थे खामेनेई, चार महीने बाद हो रहा अंतिम संस्कार
खामेनेई की मौत के करीब चार महीने बाद उनका अंतिम संस्कार हो रहा है। दरअसल, उनका अंतिम संस्कार पहले मार्च में तेहरान और मशहद में होना तय था, लेकिन युद्ध की स्थिति और अभूतपूर्व भीड़ जुटने की आशंका के चलते इसे बार-बार स्थगित करना पड़ा। जून के अंत में जाकर ईरानी अधिकारियों ने अंतिम कार्यक्रम की तारीखों का एलान किया। इस बीच ईरान में जनवरी 2025 से शुरू हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हजारों लोगों की मौत को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने सवाल उठाए हैं, जिसके चलते खामेनेई के प्रति आम ईरानी जनता की भावनाएं भी मिश्रित बताई जा रही हैं। कुछ लोग जहां भावुक होकर मातम मना रहे हैं, वहीं कुछ ऐसे परिवार भी हैं जिन्होंने प्रदर्शनों में अपने परिजनों को खोया है और जिनके लिए यह अंतिम संस्कार राहत का कोई कारण नहीं बनता।
आगे क्या: 5 जुलाई से 9 जुलाई तक का शेड्यूल
अगले कुछ दिनों में यह कार्यक्रम कई अहम पड़ावों से गुजरेगा। 5 जुलाई को खामेनेई और उनके परिवार के सदस्यों के लिए विशेष नमाज-ए-जनाजा अदा की जाएगी, जिसके बाद सार्वजनिक विदाई कार्यक्रम जारी रहेगा। 6 जुलाई को तेहरान में मुख्य अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। 7 जुलाई को कोम की जामकरान मस्जिद में प्रार्थनाएं होंगी और परिस्थितियां अनुकूल रहने पर वहां भी जुलूस निकाला जा सकता है। 8 जुलाई को शव को इराक के नजफ ले जाया जाएगा, जहां इराकी प्रधानमंत्री और वरिष्ठ अधिकारी औपचारिक स्वागत करेंगे, इसके बाद शव करबला भी जाएगा। आखिरकार 9 जुलाई को मशहद में इमाम रजा दरगाह के निकट खामेनेई को सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा, जिसके साथ ही यह हफ्तेभर चला भावनात्मक और राजनीतिक रूप से अहम अंतिम संस्कार समाप्त होगा।
इस पूरे आयोजन पर दुनिया की नजर टिकी हुई है, क्योंकि यह न सिर्फ ईरान के भीतर सत्ता परिवर्तन के अगले चरण को दिखाता है, बल्कि अमेरिका-ईरान संबंधों की दिशा भी इसी कार्यक्रम के बाद तय होने की संभावना है

