क्या NCP को लगेगा एक और झटका? परभणी जिलाध्यक्ष प्रताप देशमुख ने सुनेत्रा पवार को सौंपा इस्तीफा, शिंदे गुट में जाने की चर्चा तेज

महाराष्ट्र की राजनीति में एक और बड़ा उलटफेर होता दिख रहा है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) के परभणी शहर जिलाध्यक्ष प्रताप देशमुख ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, जिसके बाद यह अटकलें तेज हो गई हैं कि वह जल्द ही एकनाथ शिंदे की शिवसेना का दामन थाम सकते हैं। प्रताप देशमुख इस्तीफा प्रकरण को एनसीपी के लिए एक और झटके के तौर पर देखा जा रहा है।
महाराष्ट्र की सियासत में पिछले कुछ महीनों से दल-बदल का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को झटके दर झटके लगने के बाद अब बारी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की आ सकती है। परभणी शहर जिलाध्यक्ष प्रताप देशमुख के इस्तीफे ने पार्टी के भीतर हलचल मचा दी है और इसे आगामी दल-बदल की एक और कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
प्रताप देशमुख इस्तीफा: किसे सौंपा और क्यों?
सूत्रों के अनुसार, प्रताप देशमुख ने अपना इस्तीफा पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा पवार को सौंपा है। बता दें कि इस साल जनवरी में तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार का एक विमान हादसे में निधन हो गया था, जिसके बाद फरवरी में सुनेत्रा पवार को राज्य का उपमुख्यमंत्री बनाया गया और बाद में उन्हें एनसीपी (अजित पवार गुट) की राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर भी चुना गया। ऐसे में पार्टी के भीतर हो रहे इस घटनाक्रम को नए नेतृत्व के सामने खड़ी पहली बड़ी चुनौतियों में से एक माना जा रहा है।
अपने इस्तीफे में प्रताप देशमुख ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में इसे केवल औपचारिक कारण मानते हुए इसके पीछे की असल वजह को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
कौन हैं प्रताप देशमुख
प्रताप देशमुख महाराष्ट्र की राजनीति में कोई नया नाम नहीं हैं। वह दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार के करीबी कार्यकर्ताओं में गिने जाते रहे हैं और लंबे समय से पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में सक्रिय भूमिका निभाते आए हैं। वह परभणी नगर परिषद के पहले महापौर रह चुके हैं, जो उनके राजनीतिक कद और स्थानीय पकड़ को दर्शाता है। इसके अलावा वह मराठवाड़ा शिक्षण मंडल के सदस्य भी हैं, जिससे शिक्षा जगत में भी उनकी अच्छी-खासी पहचान है।
पार्टी के भीतर उनकी गिनती उन नेताओं में होती है जिन्होंने अजित पवार के साथ लंबा राजनीतिक सफर तय किया। ऐसे में प्रताप देशमुख इस्तीफा केवल एक स्थानीय पदाधिकारी के हटने भर की खबर नहीं है, बल्कि इसे परभणी जिले में पार्टी की पकड़ पर पड़ने वाले संभावित असर के तौर पर भी देखा जा रहा है।
शिंदे गुट में शामिल होने की अटकलें
विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से खबर है कि प्रताप देशमुख जल्द ही एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का हिस्सा बन सकते हैं। हालांकि इस संभावित दल-बदल को लेकर अभी तक किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। न तो प्रताप देशमुख की तरफ से और न ही शिवसेना (शिंदे गुट) के किसी नेता की ओर से इस बारे में कोई बयान सामने आया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर प्रताप देशमुख इस्तीफा प्रकरण के बाद यह कयास सही साबित होते हैं, तो यह परभणी की स्थानीय राजनीति में सत्ता समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। गौरतलब है कि परभणी जिला परिषद में सत्ता के लिए पहले से ही अलग-अलग दलों के बीच खींचतान चल रही है, जहां भाजपा, एनसीपी, उद्धव गुट, शिंदे गुट और कांग्रेस के सदस्य अलग-अलग समीकरण बनाने में जुटे रहे हैं। ऐसे में देशमुख जैसे प्रभावशाली स्थानीय नेता का पाला बदलना इन समीकरणों को नया मोड़ दे सकता है।
महाराष्ट्र में दल-बदल का सिलसिला
यह कोई पहला मौका नहीं है जब महाराष्ट्र की राजनीति में किसी बड़े नेता के दल बदलने की चर्चा गर्म हुई हो। पिछले कुछ समय में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को कई झटके लग चुके हैं। हाल ही में पार्टी के कई विधायक और सांसद तक अपना पाला बदलकर शिंदे गुट में शामिल हो चुके हैं। इनमें परभणी क्षेत्र से जुड़े नेता भी शामिल रहे हैं, जिससे यह इलाका पहले से ही दल-बदल की राजनीति का केंद्र बना हुआ है।
ऐसे में प्रताप देशमुख के इस्तीफे को इसी बड़े सियासी घटनाक्रम की एक कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है, जहां अलग-अलग दलों के स्थानीय व क्षेत्रीय नेता अपने राजनीतिक भविष्य को देखते हुए पाला बदलने का फैसला ले रहे हैं। विशेषकर आगामी स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं यानी नगर निकाय और जिला परिषद चुनावों को ध्यान में रखते हुए नेता अपने लिए ज्यादा मजबूत राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं।
एनसीपी के लिए क्यों अहम है यह घटनाक्रम
एनसीपी (अजित पवार गुट) के लिए यह घटनाक्रम इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि पार्टी अभी अपने संस्थापक नेता अजित पवार के निधन के बाद के दौर से गुजर रही है। सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में पार्टी को संगठनात्मक स्तर पर मजबूती देने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन इसी बीच परभणी जैसे महत्वपूर्ण जिले में जिलाध्यक्ष स्तर के नेता का इस्तीफा पार्टी के लिए किसी झटके से कम नहीं माना जा रहा।
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन के बाद कुछ पुराने और स्थानीय स्तर पर मजबूत नेता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं, जिसके चलते वे नए विकल्पों की तलाश में जुट गए हैं। हालांकि इस बारे में अभी तक किसी आधिकारिक सूत्र ने पुष्टि नहीं की है और यह केवल कयास के स्तर पर ही है।
आगे क्या हो सकता है
फिलहाल सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रताप देशमुख आधिकारिक तौर पर कब और किस मंच से अपने अगले राजनीतिक कदम का ऐलान करते हैं। अगर वह वाकई शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल होते हैं, तो इसका सीधा असर परभणी की स्थानीय राजनीति और आगामी निकाय चुनावों में देखने को मिल सकता है।
साथ ही, यह देखना भी दिलचस्प होगा कि एनसीपी (अजित पवार गुट) की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा पवार और पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इस स्थिति को कैसे संभालता है। क्या पार्टी देशमुख को मनाने की कोशिश करेगी, या फिर उनके इस्तीफे को स्वीकार कर आगे बढ़ेगी, यह आने वाले दिनों में साफ हो सकता है।
महाराष्ट्र की राजनीति में इस समय हर छोटे-बड़े घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रखी जा रही है, क्योंकि आगामी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले हर दल अपने संगठन को मजबूत करने और प्रतिद्वंद्वियों को कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रहा है। प्रताप देशमुख इस्तीफा प्रकरण इसी बड़ी सियासी शतरंज की एक और चाल साबित हो सकता है, जिसका असर आने वाले समय में परभणी सहित पूरे मराठवाड़ा क्षेत्र की राजनीति पर पड़ सकता है। महाराष्ट्र में स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के चुनावों से जुड़ी आधिकारिक जानकारी और कार्यक्रम के लिए पाठक राज्य निर्वाचन आयोग, महाराष्ट्र की वेबसाइट देख सकते हैं।
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