अमरनाथ यात्रा होगी आसान, 2029 तक बालटाल रूट पर शुरू होगी केबल कार सेवा, 30 मिनट में पहुंचेेंगे संगम टॉप
देश के करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए अमरनाथ यात्रा को लेकर बड़ी खुशखबरी सामने आई है। आने वाले वर्षों में बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं की यात्रा पहले से कहीं अधिक आसान और सुरक्षित हो जाएगी। केंद्र सरकार ने बालटाल मार्ग पर आधुनिक केबल कार (रोपवे) परियोजना को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद वर्ष 2029 से श्रद्धालु बालटाल से संगम टॉप तक महज 25 से 30 मिनट में पहुंच सकेंगे। अभी यही सफर तय करने में 5 से 8 घंटे तक का समय लगता है और 14 किलोमीटर की कठिन पैदल चढ़ाई करनी पड़ती है।

जानकारी के अनुसार इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत बालटाल से संगम टॉप तक 11.6 किलोमीटर लंबा रोपवे बनाया जाएगा। इस प्रोजेक्ट की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड (NHLML) ने तैयार कर ली है। केंद्र सरकार से इसे मंजूरी भी मिल चुकी है। अब अगले चरण में टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिसके तहत नवंबर या दिसंबर 2026 में निविदाएं जारी होने की संभावना है।
सूत्रों के मुताबिक अप्रैल 2027 से इस परियोजना का निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि निर्माण कार्य तय समय सीमा में पूरा कर वर्ष 2029 तक रोपवे सेवा श्रद्धालुओं के लिए शुरू कर दी जाए। परियोजना पूरी होने के बाद अमरनाथ यात्रा में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा और लाखों श्रद्धालुओं को राहत मिलेगी।
प्रस्तावित केबल कार बालटाल के डोमेल गेट से शुरू होकर संगम टॉप तक पहुंचेगी। हालांकि अमरनाथ गुफा और वहां स्थित प्राकृतिक बर्फ के शिवलिंग की धार्मिक और पर्यावरणीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए रोपवे का अंतिम स्टेशन मुख्य गुफा से लगभग दो किलोमीटर पहले बनाया जाएगा। इसके बाद श्रद्धालुओं को गुफा तक पहुंचने के लिए केवल 2 से 3 किलोमीटर की दूरी पैदल, पालकी या अन्य पारंपरिक साधनों से तय करनी होगी।
वर्तमान समय में बालटाल मार्ग से अमरनाथ गुफा तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब 14 किलोमीटर की कठिन चढ़ाई करनी पड़ती है। ऊंचाई, कम ऑक्सीजन, खराब मौसम और फिसलन भरे रास्तों के कारण यह यात्रा काफी चुनौतीपूर्ण मानी जाती है। बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए यह सफर और भी कठिन हो जाता है। कई बार खराब मौसम या स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण यात्रियों को बीच रास्ते में रुकना पड़ता है।
केबल कार सेवा शुरू होने के बाद यात्रा का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा। श्रद्धालु कम समय में सुरक्षित और आरामदायक तरीके से संगम टॉप तक पहुंच सकेंगे। इससे यात्रा के दौरान लगने वाला शारीरिक श्रम भी काफी कम होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि रोपवे बनने से हर साल लाखों श्रद्धालुओं को लाभ मिलेगा और यात्रा प्रबंधन भी पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित हो सकेगा।
इस परियोजना से केवल श्रद्धालुओं को ही नहीं बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। निर्माण कार्य के दौरान रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, जबकि रोपवे शुरू होने के बाद पर्यटन गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। स्थानीय व्यापारियों, होटल व्यवसायियों और परिवहन सेवाओं से जुड़े लोगों को भी इसका लाभ मिलेगा।
सरकार का कहना है कि परियोजना का निर्माण पर्यावरणीय मानकों और सुरक्षा नियमों का पूरी तरह पालन करते हुए किया जाएगा। पर्वतीय क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा ताकि प्राकृतिक वातावरण और धार्मिक महत्व वाले क्षेत्र पर न्यूनतम प्रभाव पड़े।
यदि निर्धारित समयसीमा के अनुसार कार्य पूरा होता है, तो वर्ष 2029 से अमरनाथ यात्रा एक नए दौर में प्रवेश करेगी। आधुनिक रोपवे सुविधा के कारण यात्रा पहले से अधिक सुरक्षित, तेज और सुविधाजनक होगी। इससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिलेगी और बाबा बर्फानी के दर्शन का सफर पहले की तुलना में कहीं अधिक सहज और यादगार बन जाएगा।

