अंतरराष्ट्रीय एमएसएमई दिवस पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की बड़ी घोषणाएं, उद्योग और स्टार्टअप को मिलेगा नया बढ़ावा
राजस्थान में पहली बार अंतरराष्ट्रीय एमएसएमई दिवस का भव्य आयोजन किया गया, जहां मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई), हस्तशिल्प, स्टार्टअप और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को नई दिशा देने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। जयपुर स्थित कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में आयोजित इस कार्यक्रम में उद्योग, निवेश और रोजगार से जुड़े अनेक फैसलों का ऐलान किया गया। मुख्यमंत्री ने लाभार्थियों को 13 करोड़ रुपए से अधिक के ऋण, अनुदान और सब्सिडी के चेक वितरित किए। इसके साथ ही रीको की विभिन्न योजनाओं के तहत भूमि आवंटन पत्र और ऑफर लेटर भी सौंपे गए।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने राजस्थान औद्योगिक विकास नीति, वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) कॉफी टेबल बुक और रैम्प (राइजिंग एंड एक्सीलरेटिंग एमएसएमई परफॉर्मेंस) पोर्टल का भी शुभारंभ किया। सरकार का उद्देश्य स्थानीय उद्योगों को नई तकनीक, वित्तीय सहायता और बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है, ताकि प्रदेश के उत्पाद राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी मजबूत पहचान बना सकें।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि एमएसएमई प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और रोजगार सृजन का सबसे बड़ा माध्यम भी हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को उद्यमिता की ओर प्रेरित करने, नए स्टार्टअप को बढ़ावा देने और पारंपरिक हस्तशिल्प एवं स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उनका कहना था कि विकास और विरासत दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ना सरकार की प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में राजस्थान में 33 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां संचालित हो रही हैं। इसी कारण प्रदेश आज देश का चौथा सबसे बड़ा एमएसएमई राज्य बन चुका है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार निवेश और औद्योगिक विकास को गति देने के लिए लगातार नई नीतियां लागू कर रही है। राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट के माध्यम से राज्य में निवेशकों का विश्वास मजबूत हुआ है और बड़ी संख्या में नए निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।
उद्योगों को जमीन उपलब्ध कराने के लिए लागू की गई डायरेक्ट अलॉटमेंट पॉलिसी-2025 को भी मुख्यमंत्री ने बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष में इस नीति के तहत 1600 से अधिक औद्योगिक भूखंडों का आवंटन किया जा चुका है। इससे नए उद्योगों की स्थापना को गति मिली है और रोजगार के नए अवसर भी तैयार हुए हैं।
मुख्यमंत्री ने उद्योगों से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए किए गए सुधारों की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शहरी क्षेत्रों में एमएसएमई इकाइयों के लिए लैंड यूज अप्रूवल की समय-सीमा 60 दिन से घटाकर केवल 30 दिन कर दी गई है। इसी प्रकार उद्योग स्थापित करने के लिए आवश्यक विभिन्न सरकारी स्वीकृतियों का समय भी 120 दिन से घटाकर मात्र 30 दिन कर दिया गया है। इससे उद्यमियों का समय और लागत दोनों कम होगी तथा उद्योग तेजी से स्थापित किए जा सकेंगे।
सरकार ने गैर-प्रदूषणकारी उद्योगों को भी बड़ी राहत दी है। पहले व्हाइट कैटेगरी में केवल 104 प्रकार के उद्योग शामिल थे, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 877 उद्योगों तक विस्तारित कर दिया गया है। इस निर्णय से हजारों छोटे और मध्यम उद्यमियों को विभिन्न अनुमतियों और प्रक्रियाओं में राहत मिलेगी तथा कारोबार शुरू करना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान होगा।
कार्यक्रम में उद्योगपतियों, स्टार्टअप संस्थापकों, हस्तशिल्प उद्यमियों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भी भाग लिया। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार की नई औद्योगिक नीतियां, आसान प्रक्रियाएं और वित्तीय सहायता योजनाएं प्रदेश में निवेश को नई गति देंगी। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार मिलेगा और राजस्थान औद्योगिक विकास के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर होगा।

