War Impact : अमेरिका-ईरान जंग का असर, पेट्रोल-डीजल 12 रुपए महंगे, सोना 1.90 लाख तक संभव
War Impact : अमेरिका-ईरान युद्ध गहराया तो होर्मुज स्ट्रेट बंद होने का खतरा। कच्चा तेल 120 डॉलर पहुंचा तो भारत में पेट्रोल-डीजल 10-12 रुपए महंगे हो सकते हैं। सोना 1.90 लाख और चांदी 3.50 लाख तक जा सकती है, शेयर बाजार में गिरावट संभव।
War Impact : होर्मुज स्ट्रेट पर संकट तो तेल 120 डॉलर तक?
अमेरिका-ईरान तनाव अगर लंबा खिंचता है और Strait of Hormuz बंद होता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। दुनिया के कुल पेट्रोलियम का करीब 20% इसी रास्ते से गुजरता है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि ऐसी स्थिति में ब्रेंट क्रूड 100 से 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। फिलहाल यह करीब 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है।
1. पेट्रोल-डीजल 10-12 रुपए तक महंगे
भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% कच्चा तेल आयात करता है। इसमें से करीब आधा हिस्सा होर्मुज मार्ग से आता है।
यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है, तो दिल्ली में पेट्रोल ₹95 से बढ़कर ₹105 और डीजल ₹88 से ₹96 प्रति लीटर तक जा सकता है।
भारत में कीमतें सरकारी तेल कंपनियां तय करती हैं, लेकिन अंतिम असर केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स पर निर्भर करता है। सरकार चाहें तो टैक्स घटाकर बढ़ोतरी का असर कम कर सकती है।
2. सोना ₹1.90 लाख तक संभव
कमोडिटी बाजार के जानकारों के अनुसार युद्ध जैसी स्थिति में निवेशक सुरक्षित विकल्प के तौर पर सोने में निवेश बढ़ाते हैं।
अनुमान है कि सोना 1.60 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम से बढ़कर 1.90 लाख रुपए तक जा सकता है। चांदी 2.67 लाख रुपए प्रति किलो से बढ़कर 3.50 लाख तक पहुंच सकती है।
युद्ध और वैश्विक अनिश्चितता के समय सोना पारंपरिक रूप से ‘सेफ हेवन’ एसेट माना जाता है।
3. शेयर बाजार में गिरावट
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक शेयर बाजार में 1 से 1.5% तक की गिरावट संभव है।
ऐसी स्थिति में सेंसेक्स 1300 अंक और निफ्टी 300 अंक तक गिर सकता है। युद्ध जैसे हालात में निवेशक जोखिम वाले निवेश से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों में लगाते हैं।
होर्मुज स्ट्रेट क्यों अहम?
Strait of Hormuz फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला 167 किमी लंबा जलमार्ग है। हर दिन 1.78 से 2.08 करोड़ बैरल कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है।
सऊदी अरब, इराक, कुवैत और ईरान जैसे देश अपने निर्यात के लिए इस पर निर्भर हैं। भारत के नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट का भी 10% से ज्यादा हिस्सा इसी मार्ग से जाता है।
ईरान के लिए भी जोखिम
यदि ईरान इस मार्ग को बंद करता है, तो उसकी अपनी अर्थव्यवस्था भी प्रभावित होगी क्योंकि उसका तेल निर्यात भी इसी रास्ते से होता है।
चीन, जो ईरान का बड़ा खरीदार है, सप्लाई बाधित होने पर दबाव बना सकता है।
भारत की तैयारी
भारत ने संभावित संकट को देखते हुए खाड़ी देशों के बाहर के सप्लायर्स से आयात बढ़ाने की रणनीति अपनाई है। जरूरत पड़ने पर देश अपने स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) का उपयोग भी कर सकता है।
हालांकि फिलहाल हालात पर नजर रखी जा रही है, लेकिन अगर जंग लंबी चली तो आम लोगों की जेब पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।


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