Sonam Wangchuk Hunger Strike: 16 दिन के अनशन से बिगड़ी तबीयत, बोले- ‘मैं न गांधी हूं, न कोई हीरो’

Sonam Wangchuk Hunger Strike लगातार चर्चा में बना हुआ है। शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। आंदोलन के दौरान उनकी तबीयत लगातार बिगड़ने की खबर सामने आई है। आंदोलन से जुड़े लोगों का दावा है कि अनशन के 16 दिनों में उनका वजन 8.2 किलोग्राम तक कम हो चुका है और ब्लड ग्लूकोज स्तर भी सामान्य से नीचे पहुंच गया है।
इसी बीच सोनम वांगचुक ने समर्थकों और देशवासियों से भावुक अपील करते हुए कहा कि उन्हें किसी भी तरह का “आधुनिक गांधी” या “हीरो” न बनाया जाए। उनका कहना है कि लोकतंत्र में हर नागरिक को खुद आगे बढ़कर अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
Sonam Wangchuk Hunger Strike के दौरान क्या बोले वांगचुक?
जंतर-मंतर से अपने संदेश में सोनम वांगचुक ने कहा कि वे किसी विशेष व्यक्ति की तरह पूजे जाने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि देश में बदलाव लाना है तो हर नागरिक को स्वयं जिम्मेदारी उठानी होगी।
उन्होंने कहा कि लोग किसी एक व्यक्ति पर आंदोलन की जिम्मेदारी छोड़ने के बजाय स्वयं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करें।
Sonam Wangchuk Hunger Strike में स्वास्थ्य लगातार बिगड़ने का दावा
आंदोलन से जुड़े संगठन के अनुसार अनशन के कारण सोनम वांगचुक की सेहत लगातार गिर रही है।
मुख्य दावे इस प्रकार हैं—
- 16 दिनों में लगभग 8.2 किलो वजन कम हुआ।
- ब्लड ग्लूकोज लगभग 67 mg/dL तक पहुंच गया।
- डॉक्टर लगातार स्वास्थ्य पर नजर बनाए हुए हैं।
- चिकित्सकीय निगरानी में अनशन जारी है।
हालांकि स्वास्थ्य संबंधी दावों पर संबंधित सरकारी एजेंसियों की ओर से अलग आधिकारिक मेडिकल बुलेटिन जारी नहीं किया गया है।
Sonam Wangchuk Hunger Strike के दौरान 20 जुलाई संसद मार्च की अपील
सोनम वांगचुक ने अपने संबोधन में लोगों से 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च में शामिल होने की अपील भी की।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखना हर नागरिक का अधिकार है। उन्होंने युवाओं से भी सक्रिय भागीदारी की अपील की।
आंदोलन की प्रमुख मांगें
आंदोलन से जुड़े संगठन ने केंद्र सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं, जिनमें प्रमुख रूप से—
- कथित परीक्षा अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच।
- प्रभावित छात्रों और परिवारों के लिए राहत।
- जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई।
- शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने के उपाय।
- सरकार से जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की मांग।
विभिन्न राजनीतिक दलों ने जताया समर्थन
आंदोलन को लेकर कई राजनीतिक दलों और छात्र संगठनों ने समर्थन व्यक्त किया है। अलग-अलग संगठनों ने लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखने की बात कही है।
हालांकि सरकार की ओर से इन मांगों पर अंतिम निर्णय का इंतजार है।
Sonam Wangchuk Hunger Strike क्यों बना राष्ट्रीय चर्चा का विषय?
सोनम वांगचुक लंबे समय से शिक्षा, पर्यावरण और जनहित से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं। इस बार उनका अनिश्चितकालीन अनशन स्वास्थ्य कारणों और लगातार बढ़ते जनसमर्थन की वजह से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष का नहीं बल्कि जनभागीदारी का विषय है। उनका कहना है कि लोकतंत्र तभी मजबूत होगा जब लोग स्वयं अपनी आवाज उठाएंगे।
Sonam Wangchuk Hunger Strike अब केवल एक व्यक्ति का अनशन नहीं बल्कि जनभागीदारी और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ी बहस का विषय बन चुका है। एक ओर उनकी सेहत को लेकर चिंता बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर उन्होंने लोगों से खुद आगे आकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने की अपील की है। अब सभी की नजर सरकार और आंदोलन के अगले कदम पर टिकी हुई है।
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