Sensex 100 अंक से ज्यादा गिरा, निफ्टी फिसला, ऑटो और IT शेयरों में बिकवाली हावी
शेयर बाजार में 14 जनवरी को गिरावट का माहौल रहा। Sensex 100 अंक से ज्यादा टूटकर 83,500 पर और निफ्टी 25,700 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। ऑटो और IT सेक्टर में बिकवाली, ग्लोबल बाजारों का मिला-जुला संकेत और FIIs की बिकवाली ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई।
शेयर बाजार में कमजोरी, निवेशकों की बढ़ी सतर्कता
भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार, 14 जनवरी को कमजोरी का रुख देखने को मिला। कारोबार की शुरुआत से ही बाजार दबाव में रहा। सेंसेक्स 100 अंक से ज्यादा की गिरावट के साथ 83,500 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया, जबकि निफ्टी भी करीब 50 अंक फिसलकर 25,700 के आसपास ट्रेड कर रहा है। बाजार में यह गिरावट ऐसे समय पर आई है, जब पिछले कुछ सत्रों से निवेशक वैश्विक संकेतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
Sensex और निफ्टी का हाल
बीएसई सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 20 शेयरों में तेजी दर्ज की गई, जबकि 10 शेयर गिरावट के साथ कारोबार करते दिखे। हालांकि, इंडेक्स पर दबाव मुख्य रूप से चुनिंदा बड़े शेयरों में बिकवाली के कारण बना रहा। निफ्टी 50 की बात करें तो इसमें भी कमजोरी दिखाई दी और यह 25,700 के स्तर पर फिसल गया।
विश्लेषकों के अनुसार, हालिया तेजी के बाद मुनाफावसूली और वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने घरेलू बाजार को प्रभावित किया है।
ऑटो और IT सेक्टर में बिकवाली
आज के कारोबार में सबसे ज्यादा दबाव ऑटो और IT सेक्टर पर देखने को मिला। ऑटो कंपनियों के शेयरों में मुनाफावसूली हावी रही, वहीं IT सेक्टर में भी निवेशकों ने सतर्कता बरती। अमेरिका और अन्य विकसित अर्थव्यवस्थाओं से जुड़े संकेतों का IT शेयरों पर सीधा असर पड़ा, क्योंकि इन कंपनियों की कमाई काफी हद तक विदेशी बाजारों पर निर्भर करती है।
दूसरी ओर, मेटल सेक्टर में 0.79% की तेजी दर्ज की गई। कुछ चुनिंदा मेटल शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जिससे इस सेक्टर ने बाजार की गिरावट के बीच राहत प्रदान की।
ग्लोबल मार्केट से मिले मिले-जुले संकेत

वैश्विक बाजारों से आज मिले-जुले संकेत मिले। एशियाई बाजारों में सकारात्मक रुख देखने को मिला।
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दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 0.24% की बढ़त के साथ 4,703 पर कारोबार कर रहा है।
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जापान का निक्केई इंडेक्स 1.53% की मजबूती के साथ 54,370 के स्तर पर है।
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हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग इंडेक्स 0.90% चढ़कर 27,090 पर ट्रेड कर रहा है।
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चीन का शंघाई कंपोजिट इंडेक्स 1.20% की तेजी के साथ 4,138 पर पहुंच गया।
हालांकि, अमेरिकी बाजारों में बीते कारोबारी सत्र में कमजोरी देखने को मिली।
अमेरिकी बाजारों का असर
13 जनवरी को अमेरिका का डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.80% की गिरावट के साथ 49,191 पर बंद हुआ। नैस्डेक कंपोजिट में 0.10% और S&P 500 में 0.19% की गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी बाजारों में यह कमजोरी ब्याज दरों को लेकर बढ़ी अनिश्चितता और निवेशकों की सतर्कता को दर्शाती है, जिसका असर भारतीय बाजारों पर भी पड़ता दिखा।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी
भारतीय शेयर बाजार पर दबाव का एक बड़ा कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली है। 13 जनवरी को FIIs ने कुल ₹1,499 करोड़ के शेयर बेचे। इसके मुकाबले घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने ₹1,181 करोड़ के शेयरों की खरीदारी की, जिससे बाजार को कुछ हद तक सहारा मिला।
दिसंबर 2025 के आंकड़ों पर नजर डालें तो FIIs ने उस महीने कुल ₹34,350 करोड़ के शेयर बेचे थे। वहीं, DIIs ने ₹79,620 करोड़ के शेयरों की खरीदारी कर बाजार को संभाले रखा। यह साफ संकेत देता है कि घरेलू निवेशक बाजार में गिरावट के दौरान लंबी अवधि के नजरिए से निवेश कर रहे हैं।
पिछले सत्र का हाल
शेयर बाजार में 13 जनवरी को भी गिरावट दर्ज की गई थी। उस दिन Sensex 250 अंक टूटकर 83,628 के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी 58 अंक की गिरावट के साथ 25,732 पर बंद हुआ था।
उस सत्र में Sensex के 30 शेयरों में से 20 में गिरावट और 10 में तेजी देखने को मिली थी। फार्मा, रियल्टी, ऑटो और FMCG सेक्टर के शेयरों में बिकवाली का दबाव रहा था, जबकि मेटल, IT और बैंकिंग शेयरों में कुछ हद तक मजबूती देखने को मिली थी।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत
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बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गिरावट को घबराहट की बजाय सतर्कता के साथ देखने की जरूरत है। वैश्विक संकेत, ब्याज दरों से जुड़ी अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां निकट भविष्य में बाजार की दिशा तय करेंगी।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह समय गुणवत्ता वाले शेयरों में चरणबद्ध तरीके से निवेश करने का अवसर हो सकता है। वहीं, अल्पकालिक निवेशकों को बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए जोखिम प्रबंधन पर खास ध्यान देने की सलाह दी जा रही है।
आगे बाजार की चाल कैसी रह सकती है
आने वाले दिनों में बाजार की दिशा कई कारकों पर निर्भर करेगी, जिनमें वैश्विक बाजारों का रुख, कच्चे तेल की कीमतें, डॉलर-रुपया विनिमय दर और घरेलू आर्थिक आंकड़े शामिल हैं। इसके अलावा, कंपनियों के तिमाही नतीजे भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं।
फिलहाल, बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहने की संभावना है। ऐसे में विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निवेशक बिना ठोस रणनीति के जल्दबाजी में फैसले न लें और बाजार की चाल पर नजर बनाए रखें।

