Oil Price Hike : ईरान जंग से कच्चा तेल 115 डॉलर पार, एक्सपर्ट बोले कीमत 150 डॉलर तक
Oil Price Hike : अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 115 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज मार्ग प्रभावित होने और ऑयल फैसिलिटीज पर हमलों के कारण सप्लाई संकट गहराया है। विशेषज्ञों ने कीमत 150 डॉलर तक जाने की आशंका जताई है।
Oil Price Hike : ईरान जंग से कच्चा तेल 115 डॉलर पार, कीमत 150 डॉलर तक जाने की आशंका
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें साढ़े तीन साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं।
9 मार्च को ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत करीब 25% बढ़कर 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। इससे पहले 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंची थीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य-पूर्व में तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले समय में तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।
Oil Price Hike : स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना बड़ी वजह
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ जलमार्ग का प्रभावित होना है। यह करीब 167 किलोमीटर लंबा समुद्री मार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है।
ईरान के साथ बढ़ते सैन्य तनाव के कारण यह मार्ग अब सुरक्षित नहीं माना जा रहा है। सुरक्षा खतरे के चलते कई तेल टैंकरों ने इस रास्ते से गुजरना बंद कर दिया है।
दुनिया के कुल पेट्रोलियम व्यापार का लगभग 20% हिस्सा इसी जलमार्ग से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे बड़े तेल निर्यातक देश भी इसी मार्ग पर निर्भर हैं।
भारत भी अपनी जरूरत का करीब 50% कच्चा तेल और लगभग 54% एलएनजी इसी रास्ते से आयात करता है। ऐसे में इस मार्ग के प्रभावित होने से वैश्विक सप्लाई पर बड़ा असर पड़ रहा है।
Oil Price Hike : ऑयल रिफाइनरियों पर हमलों से बढ़ा संकट
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का दूसरा बड़ा कारण मध्य-पूर्व में ऊर्जा ठिकानों पर हुए हमले हैं।
ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों के जवाब में ईरान ने कतर, सऊदी अरब और कुवैत की ऑयल फैसिलिटीज पर ड्रोन हमले किए हैं।
इन हमलों के कारण इन देशों को अपने उत्पादन में कटौती करनी पड़ी है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने चेतावनी दी है कि यदि तनाव बढ़ता है तो क्षेत्र के अन्य ऊर्जा ठिकानों को भी निशाना बनाया जा सकता है।
इससे वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता और बढ़ गई है।
Oil Price Hike : 10 दिनों में 60% तक महंगा हुआ कच्चा तेल
28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी देखी जा रही है।
करीब 10 दिनों के भीतर ही तेल की कीमतों में लगभग 60% तक की बढ़ोतरी हो चुकी है। वर्तमान में ब्रेंट क्रूड 116 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सप्लाई में व्यवधान जारी रहा तो कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।
भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा होने की आशंका
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो भारत में पेट्रोल-डीजल 5 से 6 रुपए प्रति लीटर तक महंगा हो सकता है।
हालांकि भारत सरकार का कहना है कि फिलहाल देश में तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है।
भारत के पास 7-8 हफ्तों का तेल भंडार
एक रिपोर्ट के अनुसार भारत के पास इतना तेल भंडार मौजूद है कि अगर सप्लाई कुछ समय के लिए पूरी तरह रुक भी जाए तो भी देश की ऊर्जा जरूरतें 7 से 8 हफ्तों तक आसानी से पूरी की जा सकती हैं।
इससे फिलहाल देश में पेट्रोल-डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की कमी होने की आशंका कम है।
भारत को रूस से तेल खरीदने में छूट
इस बीच अमेरिका ने भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने में कुछ शर्तों के साथ छूट दी है।
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ऊर्जा एजेंडे के तहत भारत को यह छूट दी गई है। इसके तहत भारतीय रिफाइनरियों को 30 दिन का विशेष लाइसेंस दिया गया है।
इसका उद्देश्य वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई को स्थिर बनाए रखना है।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने बढ़ाई थी खरीद

रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदना शुरू किया था। हालांकि इसको लेकर अमेरिका भारत पर लगातार दबाव बनाता रहा है।
पिछले साल अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने के कारण भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया था। लेकिन हाल ही में ट्रेड डील के बाद इस टैरिफ को हटा दिया गया।
भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें चार साल से स्थिर
भारत में पिछले चार वर्षों से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है।
इसके विपरीत पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमतें करीब 55% तक बढ़ चुकी हैं, जबकि जर्मनी में यह लगभग 22% महंगा हो चुका है।
घरेलू गैस सिलेंडर भी हुआ महंगा
इस बीच भारत सरकार ने घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में भी बढ़ोतरी की है।
दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत 60 रुपए बढ़ाकर 913 रुपए कर दी गई है। पहले यह 853 रुपए में मिल रहा था।
वहीं 19 किलोग्राम वाले कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमत में 115 रुपए का इजाफा किया गया है, जिसके बाद इसकी कीमत 1883 रुपए हो गई है।
नई कीमतें 7 मार्च से लागू हो चुकी हैं।

