Rajasthan University Hunger Strike: जयपुर में छात्र आंदोलन तेज, शुभम रेवाड़ की भूख हड़ताल छठे दिन भी जारी

Rajasthan University Hunger Strike एक बार फिर प्रदेश की छात्र राजनीति और शिक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा का विषय बन गया है। राजस्थान विश्वविद्यालय परिसर में छात्र नेता शुभम रेवाड़ पिछले कई दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनका कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन ठोस निर्णय नहीं लेते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
इस आंदोलन की सबसे बड़ी मांग छात्रसंघ चुनावों की बहाली और राजस्थानी भाषा के लिए विश्वविद्यालय में अलग स्नातकोत्तर एवं शोध विभाग की स्थापना है। आंदोलन अब केवल विश्वविद्यालय परिसर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रदेश की शिक्षा और छात्र अधिकारों पर नई बहस को जन्म दे रहा है।
Rajasthan University Hunger Strike क्यों बना चर्चा का विषय?
Rajasthan University Hunger Strike ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं और छात्र हितों को लेकर लगातार बहस चल रही है। हाल के महीनों में छात्रों से जुड़े कई मुद्दों ने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक विमर्श को प्रभावित किया है।
जयपुर में चल रहा यह आंदोलन भी शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्र प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दों को केंद्र में ला रहा है। शुभम रेवाड़ का कहना है कि विश्वविद्यालयों में छात्रों की भागीदारी लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए छात्रसंघ चुनावों को जल्द बहाल किया जाना चाहिए।
भूख हड़ताल के पीछे क्या हैं प्रमुख मांगें?
छात्र नेता शुभम रेवाड़ ने अपनी भूख हड़ताल के माध्यम से दो प्रमुख मांगें सामने रखी हैं।
छात्रसंघ चुनाव बहाल किए जाएं
राजस्थान में पिछले कुछ वर्षों से छात्रसंघ चुनाव आयोजित नहीं हुए हैं। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि इससे छात्रों की लोकतांत्रिक भागीदारी प्रभावित हुई है।
उनका तर्क है कि छात्रसंघ केवल चुनावी संस्था नहीं बल्कि विश्वविद्यालय और छात्रों के बीच संवाद का माध्यम भी है। यदि चुनाव नहीं होंगे तो छात्रों की समस्याओं को प्रभावी ढंग से प्रशासन तक पहुंचाना कठिन हो जाएगा।
राजस्थानी भाषा का अलग विभाग बने
दूसरी प्रमुख मांग राजस्थानी भाषा से जुड़ी है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि राजस्थान की मातृभाषा होने के बावजूद विश्वविद्यालय में राजस्थानी भाषा के लिए स्वतंत्र स्नातकोत्तर (PG) और पीएचडी विभाग उपलब्ध नहीं है।
उनका आरोप है कि विदेशी भाषाओं के नियमित विभाग संचालित हो रहे हैं जबकि राजस्थानी भाषा सीमित स्वरूप में पढ़ाई जाती है।
छात्रों का कहना है कि इससे शोध और उच्च शिक्षा के इच्छुक विद्यार्थियों को पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाते।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति का भी उठाया मुद्दा
Rajasthan University Hunger Strike के दौरान आंदोलनकारियों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) का भी उल्लेख किया है।
उनका कहना है कि यदि नई शिक्षा नीति स्थानीय भाषाओं और भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने की बात करती है, तो विश्वविद्यालय स्तर पर राजस्थानी भाषा को भी समान अवसर मिलना चाहिए।
आंदोलनकारी मांग कर रहे हैं कि—
- PG विभाग खोला जाए
- PhD कार्यक्रम शुरू हों
- शोध कार्य को बढ़ावा दिया जाए
- नियमित फैकल्टी नियुक्त की जाए
छात्रसंघ चुनाव क्यों बने बड़ा मुद्दा?
राजस्थान विश्वविद्यालय लंबे समय से छात्र राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।
छात्र नेताओं का मानना है कि छात्रसंघ चुनाव बंद होने से—
- छात्र नेतृत्व कमजोर हुआ है,
- लोकतांत्रिक अभ्यास प्रभावित हुआ,
- छात्र समस्याओं का प्रतिनिधित्व कम हुआ।
आंदोलनकारियों का कहना है कि चुनाव बहाल होने से छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच संवाद बेहतर होगा।
समर्थन जुटाने की कोशिशें तेज
Rajasthan University Hunger Strike को लेकर विभिन्न छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों की नजर भी इस आंदोलन पर बनी हुई है।
इसी क्रम में कुछ संगठनों के प्रतिनिधियों के विश्वविद्यालय पहुंचकर आंदोलनकारियों से मिलने की जानकारी सामने आई है।
इससे आंदोलन को व्यापक समर्थन मिलने की संभावना भी जताई जा रही है।
विश्वविद्यालय प्रशासन की क्या भूमिका?
फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से आंदोलन को लेकर आधिकारिक स्तर पर लगातार स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
प्रशासन का प्रयास है कि छात्रों के साथ संवाद के माध्यम से समाधान निकाला जाए ताकि शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित न हों।
छात्रों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता
लगातार भूख हड़ताल के चलते शुभम रेवाड़ के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता व्यक्त की जा रही है।
आंदोलन स्थल पर समर्थक लगातार मौजूद हैं और चिकित्सकीय निगरानी बनाए रखने की मांग भी उठाई जा रही है।
यदि अनशन लंबा चलता है तो स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं।
क्या सरकार करेगी कोई फैसला?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या राज्य सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन आंदोलनकारियों की मांगों पर कोई सकारात्मक निर्णय लेते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि—
- छात्रसंघ चुनाव,
- भाषा संरक्षण,
- विश्वविद्यालय सुधार
जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा की आवश्यकता है।
यदि बातचीत आगे बढ़ती है तो आंदोलन का समाधान निकल सकता है।
राजस्थान की छात्र राजनीति पर असर
Rajasthan University Hunger Strike आने वाले समय में प्रदेश की छात्र राजनीति को प्रभावित कर सकता है।
यदि इस आंदोलन को व्यापक समर्थन मिलता है तो अन्य विश्वविद्यालयों में भी छात्र संगठन इसी तरह की मांगों को लेकर सक्रिय हो सकते हैं।
Rajasthan University Hunger Strike अब केवल एक छात्र नेता की भूख हड़ताल नहीं रह गया है, बल्कि यह छात्र प्रतिनिधित्व, भाषा संरक्षण और उच्च शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर व्यापक बहस का विषय बन चुका है।
शुभम रेवाड़ की मांगें छात्रसंघ चुनाव बहाली और राजस्थानी भाषा के लिए स्वतंत्र विभाग स्थापित करने पर केंद्रित हैं। अब सभी की नजर राज्य सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन पर है कि वे इन मांगों पर क्या रुख अपनाते हैं।

