Rajasthan Police Recruitment Fraud: डमी कैंडिडेट से नौकरी, 15 साल बाद ‘अघोरी बाबा’ बने पूर्व कांस्टेबल पर FIR

Rajasthan Police Recruitment Fraud से जुड़ा एक चर्चित मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। राजस्थान पुलिस की आरएसी कांस्टेबल भर्ती 2010-11 में कथित फर्जीवाड़े के जरिए नौकरी हासिल करने के आरोप में एक पूर्व कांस्टेबल के खिलाफ अब कार्रवाई शुरू हुई है। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने भर्ती परीक्षा में अपनी जगह कथित तौर पर डमी अभ्यर्थी को बैठाकर चयन प्राप्त किया था। बाद में नौकरी छोड़ने के बाद वह स्वयं को ‘अघोरी बाबा’ के रूप में प्रस्तुत करने लगा और सोशल मीडिया पर सक्रिय रहा। अब स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) की जांच के आधार पर उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस के अनुसार यह मामला राजस्थान की RAC कांस्टेबल भर्ती 2010-11 से जुड़ा है। आरोप है कि भर्ती परीक्षा के दौरान श्रीराम मीणा नामक अभ्यर्थी ने स्वयं परीक्षा देने के बजाय किसी अन्य व्यक्ति को अपनी जगह बैठाया। कथित रूप से इसी माध्यम से चयन प्राप्त कर वह राजस्थान आर्म्ड कॉन्स्टेबुलरी (RAC) की 9वीं बटालियन में कांस्टेबल नियुक्त हुआ।
बताया जा रहा है कि आरोपी कई वर्षों तक पुलिस विभाग में कार्यरत रहा और वर्ष 2024 तक सेवा में रहा। इसके बाद उसने नौकरी छोड़ दी।
SOG जांच में सामने आए आरोप
मामले की प्रारंभिक जांच राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने की। जांच में कथित अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद रिपोर्ट संबंधित पुलिस अधिकारियों को भेजी गई।
इसी रिपोर्ट के आधार पर 9वीं बटालियन RAC के कमांडेंट ने आरोपी के खिलाफ टोंक शहर कोतवाली थाने में नामजद FIR दर्ज करवाई। पुलिस अब पूरे भर्ती रिकॉर्ड, परीक्षा दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है।
नौकरी छोड़ने के बाद बना ‘अघोरी बाबा’
पुलिस जांच के अनुसार नौकरी छोड़ने के बाद आरोपी भीलवाड़ा जिले के कांटोली क्षेत्र में रहने लगा और स्वयं को ‘श्रीराम अघोरी बाबा’ के नाम से पहचान देने लगा।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर वह नियमित रूप से धार्मिक और प्रेरणादायक पोस्ट साझा करता था। उसके प्रोफाइल पर कई सार्वजनिक कार्यक्रमों की तस्वीरें भी दिखाई देती हैं। हालांकि, इन तस्वीरों का वर्तमान मामले से कोई प्रत्यक्ष संबंध पुलिस ने सार्वजनिक रूप से स्थापित नहीं किया है।
पुलिस का क्या कहना है?
पुलिस अधिकारियों के अनुसार SOG की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। आरोपी के खिलाफ दर्ज मामले की विवेचना जारी है और उसकी वर्तमान लोकेशन का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि भर्ती प्रक्रिया में कथित रूप से अन्य किसी व्यक्ति या नेटवर्क की भूमिका थी या नहीं।
भर्ती प्रक्रिया की भी होगी जांच
इस मामले के सामने आने के बाद जांच एजेंसियां उस समय की भर्ती प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज, परीक्षा रिकॉर्ड और पहचान संबंधी औपचारिकताओं की भी समीक्षा कर रही हैं।
यदि जांच के दौरान किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
डिजिटल और तकनीकी साक्ष्यों पर फोकस
जांच में परीक्षा रिकॉर्ड, सेवा दस्तावेज, पहचान संबंधी विवरण और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का मिलान किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सभी तथ्यों का सत्यापन करने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मामला क्यों है महत्वपूर्ण?
राजस्थान पुलिस भर्ती से जुड़े इस मामले ने सरकारी भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज कर दी है। यदि जांच में आरोप प्रमाणित होते हैं, तो यह मामला भर्ती प्रक्रिया में पहचान सत्यापन और तकनीकी निगरानी को और मजबूत बनाने की आवश्यकता की ओर भी संकेत करता है।
जांच जारी, अंतिम फैसला अदालत करेगी
फिलहाल आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है और जांच जारी है। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि किसी भी आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप तब तक आरोप ही माने जाते हैं, जब तक सक्षम न्यायालय में वे विधिक रूप से सिद्ध न हो जाएं। पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है और आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों तथा न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार होगी।
राजस्थान पुलिस और SOG की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि भर्ती प्रक्रिया में कथित फर्जीवाड़ा किस स्तर तक हुआ और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।
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