NEET Paper Leak 2026: CBI का बड़ा दावा, महीनों पहले रची गई थी साजिश; NTA एक्सपर्ट्स पर गंभीर आरोप
NEET Paper Leak 2026: CBI का बड़ा दावा, महीनों पहले रची गई थी साजिश; NTA एक्सपर्ट्स पर गंभीर आरोप
NEET Paper Leak 2026: मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 से जुड़े पेपर लीक मामले में CBI की चार्जशीट के बाद कई गंभीर दावे सामने आए हैं। केंद्रीय जांच एजेंसी के मुताबिक, कथित पेपर लीक अचानक परीक्षा से ठीक पहले नहीं हुआ, बल्कि इसकी तैयारी कई महीने पहले से की जा रही थी।
CBI ने दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इनमें NTA से जुड़े तीन विषय विशेषज्ञों के नाम भी शामिल हैं। एजेंसी का आरोप है कि इन विशेषज्ञों ने प्रश्नपत्र तैयार करने और मॉडरेशन की प्रक्रिया के दौरान अपनी भूमिका का गलत इस्तेमाल किया और कथित तौर पर सवालों को बाहर पहुंचाया।
चार्जशीट में कथित नेटवर्क में विषय विशेषज्ञों के अलावा कोचिंग संस्थानों से जुड़े लोग और बिचौलियों की भूमिका का भी उल्लेख किया गया है। CBI इसे एक संगठित और कई स्तरों पर फैली साजिश के तौर पर देख रही है।

महीनों पहले शुरू हुआ था कथित नेटवर्क
CBI के अनुसार, NEET Paper Leak 2026 मामले में कथित साजिश परीक्षा के काफी पहले शुरू हो गई थी। जांच एजेंसी का आरोप है कि कुछ कोचिंग संचालकों और बिचौलियों ने प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़े लोगों से संपर्क किया।
जांच के मुताबिक, कथित नेटवर्क में अलग-अलग लोगों की अलग-अलग भूमिका थी। कुछ लोगों पर प्रश्नपत्र तक पहुंच बनाने, कुछ पर सवाल आगे पहुंचाने और कुछ पर इच्छुक छात्रों तक सामग्री पहुंचाने का आरोप है।
CBI का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य आर्थिक लाभ हासिल करना और कुछ उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले अनुचित फायदा पहुंचाना था।
NTA एक्सपर्ट्स पर क्या आरोप लगाए गए?
चार्जशीट में जिन NTA विषय विशेषज्ञों को आरोपी बनाया गया है, उन पर आरोप है कि प्रश्नपत्र तैयार करने के दौरान उन्हें परीक्षा के सवालों तक पहुंच हासिल थी।
जांच एजेंसी के अनुसार, कुछ सवालों को याद करने और बाद में उन्हें लिखकर आगे पहुंचाने का तरीका अपनाया गया। CBI का दावा है कि इस तरीके से डिजिटल रिकॉर्ड बनाने का जोखिम कम किया जा सकता था।
रिपोर्टों के अनुसार, आरोपी पी.वी. कुलकर्णी से जुड़ी जांच में यह भी सामने आया कि प्रश्नपत्र के कुछ हिस्सों की भाषा संबंधी प्रक्रिया में उनकी भूमिका थी। CBI ने दावा किया है कि इस दौरान उन्हें प्रश्नों तक पहुंच मिली और बाद में कथित तौर पर उनका गलत इस्तेमाल किया गया।
छात्रों तक कैसे पहुंचाए गए कथित लीक सवाल?
CBI की जांच के मुताबिक, कथित तौर पर प्राप्त सवालों को आगे छात्रों तक पहुंचाने के लिए कई माध्यमों का इस्तेमाल किया गया।
इनमें—
- WhatsApp चैट
- Telegram
- PDF फाइल
- फोटो
- हाथ से लिखी सामग्री
- कोचिंग नेटवर्क
जैसे माध्यम शामिल होने का दावा किया गया है।
जांच एजेंसी ने कथित तौर पर बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को भी जांच का हिस्सा बनाया है। CBI का कहना है कि डिजिटल रिकॉर्ड, चैट और गवाहों के बयानों से नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में मदद मिली।
हाथ से लिखे सवालों की भी जांच
इस मामले में एक अहम पहलू कथित रूप से हाथ से लिखी गई सामग्री है। CBI के अनुसार, कुछ छात्रों या अन्य लोगों तक प्रश्नों को लिखित रूप में पहुंचाया गया।
ऐसा तरीका कथित तौर पर इसलिए इस्तेमाल किया गया ताकि सीधे डिजिटल फाइल या प्रश्नपत्र की कॉपी भेजने से बचा जा सके।
जांच के दौरान बरामद नोटबुक, लिखित सामग्री और अन्य दस्तावेजों को वास्तविक NEET प्रश्नपत्र से मिलान किए जाने की बात सामने आई है।
पहले भी CBI ने अदालत में दावा किया था कि महाराष्ट्र में एक कोचिंग संचालक ने कथित तौर पर केमिस्ट्री के प्रश्न हासिल करने के लिए भुगतान किया था और कई सवाल वास्तविक परीक्षा के प्रश्नों से मेल खाते पाए गए।
कोचिंग संचालकों और बिचौलियों की भूमिका
CBI ने अपनी चार्जशीट में केवल NTA से जुड़े लोगों को ही आरोपी नहीं बनाया है। एजेंसी ने कुछ कोचिंग संचालकों, संस्थान से जुड़े अधिकारियों और अन्य लोगों पर भी कथित साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया है।
जांच के अनुसार, ये लोग कथित तौर पर परीक्षा से पहले प्राप्त सामग्री को आगे उम्मीदवारों तक पहुंचाने में मदद कर रहे थे।
CBI का आरोप है कि इस नेटवर्क में पैसा महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था। कुछ मामलों में कथित तौर पर छात्रों से बड़ी रकम ली गई और बदले में उन्हें परीक्षा में अनुचित लाभ देने की कोशिश की गई।
बैंक खाते और अन्य संपत्तियों पर कार्रवाई
जांच एजेंसी ने आरोपियों से जुड़े आर्थिक लेन-देन की भी जांच की है। CBI ने कथित तौर पर आरोपियों के बैंक खातों, लॉकर और अन्य वित्तीय साधनों पर कार्रवाई की है।
इसका उद्देश्य कथित पेपर लीक से जुड़े पैसों के लेन-देन का पता लगाना और अपराध से अर्जित संभावित रकम को ट्रैक करना बताया गया है।
इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की भी जांच
मामले में मोबाइल फोन, डिजिटल डिवाइस, चैट रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामग्री को भी जांच के दायरे में रखा गया है।
CBI का कहना है कि फोरेंसिक जांच से कथित नेटवर्क की गतिविधियों को समझने में मदद मिली। जांच एजेंसी ने गवाहों के बयान और बरामद दस्तावेजों को भी चार्जशीट का हिस्सा बनाया है।
रिपोर्टों के अनुसार, चार्जशीट में बड़ी संख्या में गवाहों और दस्तावेजों का उल्लेख किया गया है।

NEET Paper Leak 2026 में NTA एक्सपर्ट्स पर इतने गंभीर आरोप क्यों?
NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा में प्रश्नपत्र तैयार करने और सुरक्षित रखने की प्रक्रिया बेहद संवेदनशील होती है। ऐसे में परीक्षा से जुड़े किसी व्यक्ति पर गोपनीय सामग्री का कथित रूप से गलत इस्तेमाल करने का आरोप गंभीर माना जाता है।
CBI ने इसी आधार पर आरोपी विशेषज्ञों के खिलाफ आपराधिक साजिश, भरोसे के कथित उल्लंघन और भ्रष्टाचार सहित विभिन्न कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की है।
हालांकि, चार्जशीट में लगाए गए आरोप अभी अदालत में साबित नहीं हुए हैं। आरोपियों को दोषी तभी माना जाएगा जब अदालत में उनके खिलाफ आरोप साबित हों।
पेपर लीक के बाद परीक्षा रद्द होने का विवाद
NEET-UG 2026 परीक्षा को लेकर पेपर लीक की शिकायतों के बाद बड़ा विवाद खड़ा हुआ था। परीक्षा आयोजित होने के बाद प्रश्नपत्र की कथित उपलब्धता और सवालों के मिलान से जुड़े आरोप सामने आए।
इसके बाद जांच एजेंसियों ने मामले की पड़ताल शुरू की। CBI की जांच में अलग-अलग राज्यों से जुड़े लोगों और कथित नेटवर्क की कड़ियों की जांच की गई।
CBI ने बाद में मामले में गिरफ्तारियां कीं और कथित पेपर लीक के स्रोत तक पहुंचने का दावा किया। मई में एजेंसी ने पुणे के एक प्रोफेसर पी.वी. कुलकर्णी की गिरफ्तारी को पेपर लीक के स्रोत से जोड़कर बताया था।
दोबारा परीक्षा भी कराई गई
पेपर लीक विवाद के बाद NEET-UG 2026 को लेकर उम्मीदवारों और अभिभावकों में भारी चिंता देखने को मिली। परीक्षा रद्द किए जाने के बाद दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया।
इस पूरे घटनाक्रम ने देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा और प्रश्नपत्र की गोपनीयता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए।
NEET जैसी परीक्षा में लाखों उम्मीदवार शामिल होते हैं। ऐसे में प्रश्नपत्र से जुड़ी किसी भी अनियमितता का असर सिर्फ कुछ छात्रों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
आगे क्या होगा?
CBI की चार्जशीट के बाद अब मामले में न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। कोर्ट आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करेगा। आरोपियों को अपने बचाव का पूरा कानूनी अधिकार है।
दिल्ली की विशेष फास्ट-ट्रैक अदालत में मामले की सुनवाई होनी है। कोर्ट ने CBI को चार्जशीट से जुड़े बाकी दस्तावेज और संलग्नक दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय भी दिया था।
जांच का अगला महत्वपूर्ण चरण यह होगा कि अदालत के सामने पेश किए गए डिजिटल सबूत, दस्तावेज, गवाहों के बयान और वित्तीय लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड आरोपों को किस हद तक साबित करते हैं।
निष्कर्ष
NEET Paper Leak 2026 मामले में CBI की चार्जशीट ने प्रश्नपत्र की गोपनीयता और परीक्षा व्यवस्था पर नए सवाल खड़े किए हैं। एजेंसी के मुताबिक कथित नेटवर्क में NTA से जुड़े विशेषज्ञों, कोचिंग संचालकों, बिचौलियों और छात्रों तक पहुंच बनाने वाले लोगों की भूमिका थी।
हालांकि, जांच एजेंसी के दावे और चार्जशीट में लगाए गए आरोपों को अदालत का अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। अब इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया के दौरान यह तय होगा कि आरोपों के समर्थन में पेश किए गए साक्ष्य कितने मजबूत हैं और कौन-कौन से आरोपी कानूनी रूप से दोषी साबित होते हैं।

