Jojari River Pollution Case: जोजरी नदी प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, राजस्थान सरकार से मांगा जवाब

Jojari River Pollution Case एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है। जोधपुर क्षेत्र से जुड़ी जोजरी नदी में बढ़ते प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यदि किसी राज्य के नागरिकों को प्रदूषित पानी के कारण स्वास्थ्य संकट का सामना करना पड़ रहा है, तो यह बेहद गंभीर मामला है। कोर्ट ने विशेष जांच दल (SIT) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए जांच की प्रगति पर असंतोष व्यक्त किया।
Jojari River Pollution Case पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि नागरिकों के जीवन और स्वास्थ्य की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि उद्योगों के कारण प्रदूषण फैल रहा है तो आवश्यक कार्रवाई से पीछे नहीं हटना चाहिए।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि लाखों लोगों के स्वास्थ्य से समझौता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
SIT जांच पर सुप्रीम कोर्ट ने क्यों उठाए सवाल?
सुनवाई के दौरान अदालत ने विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट पर भी गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध रिपोर्टों से ऐसा प्रतीत होता है कि नदी में प्रदूषित जल का प्रवाह अब भी जारी है और जांच अपेक्षित दिशा में आगे बढ़ती नहीं दिख रही।
अदालत ने जांच एजेंसियों से प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने और वास्तविक स्थिति सामने लाने पर जोर दिया। मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को निर्धारित की गई है।
राजस्थान सरकार ने अदालत में क्या कहा?
राज्य सरकार की ओर से पेश पक्ष में बताया गया कि हाल ही में गठित SIT ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट विशेषज्ञ समिति को सौंप दी है।
सरकार ने अदालत को यह भी जानकारी दी कि:
- राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कुछ अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की है।
- पानी के नमूनों के संग्रह से जुड़े कुछ क्षेत्रीय अधिकारियों को निलंबित किया गया है।
- जोजरी नदी के आसपास प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों पर निगरानी रखी जा रही है।
हालांकि अदालत इन जवाबों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिखी और प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया।
उद्योगों को लेकर क्या निर्देश दिए गए?
सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया कि जोजरी नदी के किनारे स्थित कई औद्योगिक इकाइयों का संचालन फिलहाल बंद है।
सरकार ने यह भी कहा कि यदि कोई उद्योग प्रदूषण नियंत्रण के निर्धारित मानकों का पालन करने के लिए आवश्यक कदम उठाता है, तो विशेषज्ञ समिति उसके आवेदन पर विचार कर सकती है।
Jojari River Pollution Case की पृष्ठभूमि
जोजरी नदी प्रदूषण का मुद्दा लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है। वर्ष 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया था।
मामले में यह चिंता जताई गई थी कि औद्योगिक अपशिष्ट और सीवरेज के कारण जोधपुर, पाली और बालोतरा क्षेत्र की नदियों की जल गुणवत्ता गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है।
शोध में सामने आई गंभीर स्थिति
हाल में किए गए एक शैक्षणिक अध्ययन में जोजरी नदी के पानी की गुणवत्ता को लेकर चिंताजनक तथ्य सामने आए।
अध्ययन के अनुसार:
- नदी का पानी पीने योग्य नहीं माना गया।
- कई स्थानों पर सिंचाई के लिए भी पानी उपयुक्त नहीं पाया गया।
- औद्योगिक रासायनिक अपशिष्ट को प्रदूषण का प्रमुख कारण बताया गया।
- विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि समय रहते प्रभावी नियंत्रण नहीं हुआ तो कृषि, भूजल, पशुधन और पर्यावरण पर व्यापक असर पड़ सकता है।
जोजरी नदी का महत्व
जोजरी नदी राजस्थान के नागौर जिले के पाण्डलू क्षेत्र की पहाड़ियों से निकलती है और आगे चलकर जोधपुर जिले के खेजड़ला खुर्द के पास लूनी नदी में मिलती है।
पिछले कई वर्षों से नदी के आसपास स्थित औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले अपशिष्ट जल को लेकर पर्यावरणीय चिंताएं सामने आती रही हैं। नदी किनारे बसे अनेक गांव सीधे तौर पर इसके प्रभाव क्षेत्र में आते हैं।
आगे क्या होगा?
अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर हैं। अदालत द्वारा मांगी गई प्रगति रिपोर्ट और राज्य सरकार की आगामी कार्रवाई से यह तय होगा कि प्रदूषण नियंत्रण और जिम्मेदार संस्थाओं के खिलाफ आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
Jojari River Pollution Case केवल एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि लाखों लोगों के स्वास्थ्य, जल संसाधनों और कृषि से जुड़ा गंभीर मामला है। सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद उम्मीद की जा रही है कि संबंधित एजेंसियां प्रदूषण रोकने और जवाबदेही तय करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाएंगी।

